तमिलनाडु वन विभाग ने पश्चिमी घाट (विशेषकर नीलगिरी, मुदुमलाई और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व) में तेजी से फैल रहे आक्रामक विदेशी पेड़ ‘सेनना स्पेक्टाबिलिस’ को हटाने के लिए TN PIPER नीति के तहत एक बड़ा अभियान चलाया है। दक्षिण और मध्य अमेरिका की इस प्रजाति के कारण स्थानीय जैव विविधता, चारे की उपलब्धता और जंगलों का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा था।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। तमिलनाडु वन विभाग ने पश्चिमी घाट के संवेदनशील जंगलों में तेजी से फैल रहे विदेशी आक्रामक पेड़ सेनना स्पेक्टाबिलिस (Senna spectabilis) को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान तेज कर दिया है।
नीलगिरी के अलावा मुदुमलाई और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व समेत कई वन क्षेत्रों में इस प्रजाति के उन्मूलन और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली का काम चल रहा है।
दक्षिण और मध्य अमेरिका की मूल निवासी यह पीले फूलों वाली प्रजाति तमिलनाडु के जंगलों में तेजी से फैलकर घने झुरमुट बना रही है। इसके कारण स्थानीय वनस्पतियों के लिए उपलब्ध जगह और संसाधन कम हो रहे हैं, जैव विविधता प्रभावित हो रही है तथा हाथी और हिरण जैसे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए चारे की उपलब्धता भी घट रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घनी सेनना वनस्पति जंगलों में आग के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु के जंगलों में सेनना स्पेक्टाबिलिस का फैलाव करीब 2,446 से 3,192 हेक्टेयर क्षेत्र तक दर्ज किया गया था। वर्ष 2025 के अंत तक और 2026 के दौरान वन विभाग ने लगभग 1,963 से 2,693 हेक्टेयर क्षेत्र से इस आक्रामक प्रजाति को हटा दिया था।
विभाग ने मार्च 2026 तक सभी संबंधित वन प्रभागों से इसे पूरी तरह समाप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था। यह अभियान तमिलनाडु पॉलिसी ऑन इनवेसिव प्लांट्स एंड इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन (TN PIPER) का हिस्सा है।
तमिलनाडु सरकार के अनुसार, यह भारत में आक्रामक विदेशी पौधों से निपटने और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए तैयार की गई पहली व्यापक राज्य स्तरीय नीतियों में से एक है। सेनना को हटाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बड़े पेड़ों की छाल को चारों ओर से हटाकर उन्हें धीरे-धीरे सुखाया जाता है, जबकि छोटे पौधों को जड़ समेत उखाड़ा जाता है। नई पौध को यांत्रिक तरीके से साफ किया जाता है। अभियान में स्थानीय समुदायों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
वन विभाग ने हटाए गए पेड़ों और जैविक सामग्री के उपयोग के लिए तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड (TNPL) तथा सेशसय्यी पेपर एंड बोर्ड्स लिमिटेड (SPB) के साथ साझेदारी की है। इसके तहत काटी गई सेनना बायोमास को कागज के लिए पर्यावरण अनुकूल पल्प में बदला जा रहा है।
TNPL अब तक प्रमुख वन क्षेत्रों से निकाली गई 31,000 मीट्रिक टन से अधिक सेनना को संसाधित कर चुका है। वन विभाग के लिए पेड़ों को हटाना अभियान का अंतिम लक्ष्य नहीं है। सेनना से मुक्त किए गए क्षेत्रों में स्थानीय घास, झाड़ियों और देशी पेड़-पौधों को फिर से लगाया जा रहा है, ताकि प्राकृतिक आवास बहाल हो सके।
इसका उद्देश्य नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व में बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों के लिए अनुकूल पारिस्थितिक परिस्थितियां तैयार करना है। पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहल को ऐसी मिसाल बताया है, जिसमें नीति निर्माण, जमीनी कार्रवाई और औद्योगिक सहयोग को एक साथ जोड़ा गया है।
2026 की शुरुआत में मद्रास हाई कोर्ट में प्रस्तुत प्रगति रिपोर्टों में भी सेनना स्पेक्टाबिलिस के राज्यव्यापी उन्मूलन का काम अंतिम चरण में पहुंचने की जानकारी दी गई थी। तमिलनाडु का यह अभियान पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को आक्रामक प्रजातियों से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
साथ ही, हटाई गई वनस्पति को कचरे के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलकर यह पहल सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक व्यावहारिक मॉडल भी प्रस्तुत करती है।
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