असेंबलिंग के बजाय बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर और रीसाइक्लिंग में पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर।
पारंपरिक ऑटो सेक्टर के मुकाबले स्पेशलाइज्ड रोल्स की मांग अधिक, 2030 तक कुल ‘ग्रीन जॉब्स’ में EV की हिस्सेदारी होगी 60%।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर बढ़ता रुझान केवल वाहन खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार का एक विशाल अवसर लेकर आ रहा है। मानव संसाधन सेवा प्रदाता कंपनी एडेको इंडिया (Adecco India) की नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत के EV सेक्टर में 30 मिलियन से 40 मिलियन (3 से 4 करोड़) नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।
कहाँ पैदा होंगी नौकरियां?
रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में कुल भर्तियां हर साल 15-20% की दर से बढ़ेंगी, जबकि विशेष भूमिकाओं (Specialized Roles) की मांग 35% की तेज़ी से बढ़ेगी।
अप्रत्यक्ष नौकरियां (85-90%): कुल 30-40 मिलियन नौकरियों में से केवल 10-15% ही प्रत्यक्ष यानी फैक्ट्री असेंबलिंग से जुड़ी होंगी। बाकी 85-90% नौकरियां सपोर्ट इकोसिस्टम में होंगी—जैसे चार्जिंग स्टेशन मेंटेनेंस, बैटरी केयर, फ्लीट मैनेजमेंट, सॉफ्टवेयर व टेलीमैटिक्स, कस्टमर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और बैटरी रीसाइक्लिंग।
मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी: कुल EV भर्तियों में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 50-55% बना रहेगा।
तेज़ी से बढ़ने वाले 3 क्षेत्र: बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, EV इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (रीसाइक्लिंग व रीयूज़)।
सरकारी आंकड़े और नीतिगत पहल
PM E-DRIVE योजना: जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, FY 2025-26 के तहत 12.6 लाख से अधिक EV टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर रजिस्टर या अस्थायी रूप से रजिस्टर किए गए हैं (जिनमें से 6.4 लाख अकेले इसी वित्तीय वर्ष में 27 जुलाई तक जुड़े हैं)।
दिल्ली EV नीति 2026: 1 जुलाई 2026 से लागू इस नीति के तहत ₹7,000 करोड़ का पुश दिया गया है, जिसमें पूरे शहर में 30,000 चार्जिंग पॉइंट लगाने का लक्ष्य है, जिससे स्थानीय स्तर पर सर्विस और ऑपरेशन्स के कई अवसर पैदा होंगे।
वेतन, टैलेंट की कमी और री-स्किलिंग
उच्च वेतन: EV की खास स्किल्स वाले वर्कर पारंपरिक पेट्रोल या डीजल गाड़ियों पर काम करने वाले वर्क्स की तुलना में 45 प्रतिशत तक ज़्यादा वेतन कमा सकते हैं।
टैलेंट गैप: बाजार में बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर और कनेक्टेड मोबिलिटी की समझ रखने वाले लोगों का टैलेंट पूल अभी काफी छोटा है।
ग्लोबल मार्केट में स्थिति: एडेको इंडिया के डायरेक्टर और जनरल स्टाफिंग प्रमुख दीपेश गुप्ता के अनुसार, ग्लोबल पैसेंजर-कार EV मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 4% है, जबकि टू-व्हीलर सेगमेंट में यह 17% है। उन्होंने पारंपरिक ऑटो वर्क्स की री-स्किलिंग और टेक्निकल ट्रेनिंग में निवेश पर ज़ोर दिया है।
नया इकोनॉमिक इकोसिस्टम: ‘Trev Mobility’ के फाउंडर और CEO नवीन गुप्ता का मानना है कि कमर्शियल फ्लीट के इलेक्ट्रिक होने से ऑपरेशन्स, चार्जिंग मैनेजमेंट, ड्राइवर ट्रेनिंग और डिलीवरी रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसे क्षेत्रों में नई भूमिकाएं बढ़ रही हैं।
नौकरियों का स्वरूप
एडेको इंडिया का अनुमान है कि इस सेक्टर में नई भर्तियों में से लगभग 40-50% शुरुआत में कॉन्ट्रैक्ट या फ्लेक्सी-स्टाफिंग के तौर पर होंगी, जो इंडस्ट्री परिपक्व होने के साथ स्थायी (Permanent) नौकरियों में बदल सकती हैं। इसके अलावा, 2030 तक भारत में बनने वाली सभी ‘ग्रीन जॉब्स’ में से लगभग 60% EV इकोसिस्टम से जुड़ी होंगी।
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