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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > आपदा की चेतावनी मिलने के बावजूद हर तीन में से एक व्यक्ति नहीं कर पाता बचाव, संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्ट में खुलासा
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आपदा की चेतावनी मिलने के बावजूद हर तीन में से एक व्यक्ति नहीं कर पाता बचाव, संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्ट में खुलासा

Environment Pulse
Last updated: October 21, 2026 1:33 pm
Environment Pulse
Published: October 21, 2026
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विश्व जोखिम सर्वेक्षण 2026 की रिपोर्ट ‘फ्रॉम अलर्ट टू एजेंसी: व्हाट टर्न्स वार्निंग्स इंटू एक्शन’ के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में दुनिया भर में लगभग 110 करोड़ लोग प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए हैं। हालांकि पांच में से लगभग चार वयस्कों को अग्रिम चेतावनी मिली, लेकिन चेतावनी मिलने के बावजूद 36 प्रतिशत लोग अपनी सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाने में असमर्थ रहे। यह रिपोर्ट 140 देशों में 1.43 लाख से अधिक लोगों के साक्षात्कारों पर आधारित है। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : कम आय वाले देशों में चेतावनी और सुरक्षा उपायों के बीच बड़ी खाई, दुनिया में पिछले पांच वर्षों में 110 करोड़ लोग हुए आपदाओं से प्रभावित अक्टूबर 2026। प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए समय रहते चेतावनी मिलना बेहद जरूरी है, लेकिन केवल अलर्ट जारी कर देना लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता।

विश्व जोखिम सर्वेक्षण 2026 की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में किसी आपदा से प्रभावित और अग्रिम चेतावनी प्राप्त करने वाले 36 प्रतिशत लोग इसके बावजूद अपनी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठा सके।

यह निष्कर्ष आपदा चेतावनी और उसके आधार पर कार्रवाई करने की क्षमता के बीच मौजूद गंभीर अंतर को उजागर करता है। ‘फ्रॉम अलर्ट टू एजेंसी: व्हाट टर्न्स वार्निंग्स इंटू एक्शन’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में आपदा से प्रभावित पांच में से लगभग चार वयस्कों को कम से कम एक अग्रिम चेतावनी मिली थी।

इसके बावजूद एक-तिहाई से अधिक लोग अपनी सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाने में असमर्थ रहे। यह रिपोर्ट गैलप की ओर से 140 देशों और क्षेत्रों में 1.43 लाख से अधिक लोगों के साक्षात्कार पर आधारित है। इसके निष्कर्षों को संयुक्त राष्ट्र की अर्ली वार्निंग्स फॉर ऑल पहल के डैशबोर्ड में भी शामिल किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कम आय वाले देशों में पिछले पांच वर्षों के दौरान 31 प्रतिशत वयस्कों ने आपदा का सामना किया, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह आंकड़ा 16 प्रतिशत रहा। यानी कम आय वाले देशों में लोगों के आपदा से प्रभावित होने की संभावना लगभग दोगुनी थी। इसके बावजूद कम आय वाले देशों में केवल 64 प्रतिशत प्रभावित वयस्कों को अग्रिम चेतावनी मिली, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह अनुपात 84 प्रतिशत था।

मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में चेतावनी की पहुंच सबसे कम रही, जहां केवल 47 प्रतिशत लोगों तक अलर्ट पहुंच सका। चेतावनी मिलने के बाद भी सुरक्षा उपाय अपनाने में आर्थिक असमानता स्पष्ट दिखाई दी। कम आय वाले देशों में चेतावनी पाने वाले केवल 48 प्रतिशत वयस्कों ने बचाव के लिए कदम उठाए। निम्न-मध्यम आय वाले देशों में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत था। इसके विपरीत, उच्च-मध्यम और उच्च आय वाले देशों में यह अनुपात 71 प्रतिशत या उससे अधिक रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि आपदा संबंधी चेतावनी कितने माध्यमों से दी जाती है, इसका लोगों की प्रतिक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

केवल एक माध्यम से चेतावनी पाने वाले लोगों में 37 प्रतिशत ही सुरक्षा के लिए कदम उठा सके। दो माध्यमों से चेतावनी मिलने पर यह आंकड़ा बढ़कर 51 प्रतिशत और तीन माध्यमों से चेतावनी मिलने पर 64 प्रतिशत हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि मोबाइल संदेश, फोन अलर्ट और अन्य संचार माध्यमों के जरिए एक ही चेतावनी को अलग-अलग तरीकों से पहुंचाना अधिक प्रभावी हो सकता है।

हालांकि, कई क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और संचार सुविधाओं की सीमित उपलब्धता अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, आपदा से निपटने की तैयारी और स्वयं निर्णय लेकर कार्रवाई कर पाने का भरोसा लोगों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिन लोगों के पास आपदा से निपटने की घरेलू योजना थी और जिन्हें अपनी ओर से कदम उठाने की क्षमता पर भरोसा था, उनमें चेतावनी मिलने के बाद कार्रवाई करने का अनुपात 83 प्रतिशत रहा।

इसके विपरीत, जिन लोगों के पास न तो कोई योजना थी और न ही कार्रवाई करने का पर्याप्त भरोसा, उनमें केवल 27 प्रतिशत ही सुरक्षा के उपाय अपना सके। यह अंतर बताता है कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी अलर्ट या तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकता। परिवारों को संभावित खतरों, सुरक्षित स्थानों, निकासी मार्गों और आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले उपायों के बारे में पहले से जानकारी होना भी जरूरी है। रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में दुनिया भर में लगभग 110 करोड़ लोग किसी न किसी आपदा से प्रभावित हुए।

इनमें से करीब 22 करोड़ लोगों को कोई अग्रिम चेतावनी नहीं मिली। संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली का अर्थ केवल तकनीक स्थापित करना या मोबाइल फोन पर संदेश भेजना नहीं है। इसकी पूरी प्रक्रिया में जोखिम की पहचान, समय पर सूचना पहुंचाना और लोगों को उस सूचना के आधार पर कार्रवाई करने में सक्षम बनाना शामिल होना चाहिए। रिपोर्ट में एसएमएस आधारित चेतावनी सेवाओं के विस्तार को उन लोगों तक पहुंच बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया गया है, जो अभी मौजूदा व्यवस्थाओं से बाहर हैं।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि आपदा से निपटने की क्षमता घर से विकसित होती है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी केवल परिवारों पर नहीं छोड़ी जा सकती। सरकारों और संबंधित संस्थानों को जोखिम संबंधी जानकारी, कमजोर समुदायों की सुरक्षा, संचार सुविधाओं और दीर्घकालिक आपदा तैयारी में निवेश बढ़ाना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर चेतावनी तभी जीवन और आजीविका बचा सकती है, जब वह सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसके पास उस पर कार्रवाई करने के साधन भी उपलब्ध हों।

वैश्विक स्तर पर सभी लोगों तक पूर्व चेतावनी पहुंचाने के लक्ष्य को सफल बनाने के लिए सूचना के साथ-साथ तैयारी, संसाधन और स्थानीय स्तर पर प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना आवश्यक है।

Also Read: वैश्विक जैव विविधता का दो-तिहाई हिस्सा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में, लेकिन निर्यात में हिस्सेदारी महज 14 प्रतिशत

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