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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जमीन > सुपर अल नीनो की आशंका से जिम्बाब्वे में सूखे का खतरा
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सुपर अल नीनो की आशंका से जिम्बाब्वे में सूखे का खतरा

Environment Pulse
Last updated: October 21, 2026 1:34 pm
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Published: October 21, 2026
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अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में वर्ष 2026-27 के कृषि सत्र के दौरान ‘सुपर अल नीनो’ के प्रभाव से गंभीर सूखे की आशंका जताई गई है, जिसके चलते सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच सामान्य से कम बारिश और तापमान में वृद्धि की संभावना है, जिससे कृषि, पशुधन और खाद्य सुरक्षा पर संकट आ सकता है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में वर्ष 2026-27 के कृषि सत्र के दौरान गंभीर सूखे की आशंका को देखते हुए सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मौसम पूर्वानुमानों में शक्तिशाली अल नीनो, जिसे ‘सुपर अल नीनो’ भी कहा जा रहा है, के प्रभाव से सामान्य से कम बारिश, लंबे समय तक शुष्क मौसम और तापमान में वृद्धि की संभावना जताई गई है।

इससे कृषि उत्पादन, पशुधन और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है। जिम्बाब्वे के मौसम सेवा विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने छह स्तंभों पर आधारित जलवायु लचीलापन रणनीति को मंजूरी दी है।

इसके तहत रणनीतिक अनाज भंडार मजबूत करने, जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने, किसानों के लिए वित्तीय सहायता बेहतर बनाने, पशुधन की सुरक्षा, जरूरत पड़ने पर अनाज आयात और आपदा पूर्व चेतावनी एवं समन्वय व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

सूखे के संभावित प्रभावों को कम करने के लिए सरकार 50 करोड़ डॉलर का एल नीनो सुरक्षा कोष तैयार कर रही है। इसमें 25 करोड़ डॉलर नकद और 25 करोड़ डॉलर के अनाज भंडार का प्रावधान है। अनाज भंडार में मक्का, छोटे अनाज और गेहूं शामिल होंगे। खरीद में स्थानीय किसानों को प्राथमिकता देने की योजना है, ताकि खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के साथ घरेलू कृषि अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल सके।

सरकार एक पूर्व-नियोजित कार्रवाई प्रोटोकॉल भी विकसित कर रही है। इसके अंतर्गत मौसम संबंधी चेतावनी के ऐसे संकेत निर्धारित किए जाएंगे, जिनके आधार पर पहले से तय राहत उपायों और वित्तीय संसाधनों को सक्रिय किया जा सके। इसका उद्देश्य सूखे के व्यापक संकट में बदलने से पहले प्रभावित समुदायों तक सहायता पहुंचाना है।

बारिश की संभावनाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों के तहत एक नवंबर 2026 से क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू करने की योजना है। इसके लिए हरारे, बुलावायो और मास्विंगो में केंद्र निर्धारित किए गए हैं। क्लाउड सीडिंग में बादलों में उपयुक्त कणों का इस्तेमाल कर वर्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है।

हालांकि, इसकी सफलता मौसम की परिस्थितियों और बादलों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। कृषि क्षेत्र में सरकार का प्रमुख ध्यान ‘पफुमवुद्जा/इंट्वासा’ कार्यक्रम पर है। इस पहल के तहत कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन, जल संरक्षण और जलवायु के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके साथ सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और सूखा सहन करने वाले छोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों को कृषि-मौसम संबंधी सलाह उपलब्ध कराने पर भी जोर है, ताकि वे बारिश की संभावनाओं के अनुसार फसलों का चयन कर सकें और बुवाई का सही समय निर्धारित कर सकें। पारंपरिक समुदायों के नेताओं को भी तैयारियों में शामिल किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण स्तर पर जागरूकता और समन्वय बढ़ाया जा सके।

जिम्बाब्वे को 2023-24 में अल नीनो से जुड़े गंभीर सूखे का सामना करना पड़ा था। उस दौरान बड़े पैमाने पर अनाज जुटाने की जरूरत पड़ी और लाखों लोग प्रभावित हुए। इसी अनुभव को देखते हुए अधिकारी इस बार संकट आने का इंतजार करने के बजाय मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर पहले से कार्रवाई करने पर जोर दे रहे हैं।

जिम्बाब्वे को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) की संयुक्त पूर्व-निवारक कार्रवाई अपील में उच्च जोखिम वाले देशों में शामिल किया गया है। सरकार घरेलू स्तर पर खाद्य भंडार और अन्य सुरक्षा उपाय मजबूत करने के साथ अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से अतिरिक्त सहायता जुटाने का प्रयास भी कर रही है। जिम्बाब्वे की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में छोटे किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

ऐसे में सूखे से निपटने की रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों तक समय पर वित्तीय सहायता, मौसम संबंधी जानकारी, सिंचाई सुविधाएं और सूखा सहन करने वाले बीज पहुंच पाते हैं या नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलती जलवायु परिस्थितियों में केवल अनाज का भंडारण पर्याप्त नहीं होगा।

कृषि पद्धतियों में बदलाव, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और समय पर राहत व्यवस्था भी जरूरी है। यदि सरकार की योजनाओं को पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के साथ समय पर लागू किया जाता है, तो संभावित सूखे के प्रभाव को कम करने और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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