भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े स्टार्टअप कृषि और शहरी कचरे को जैव ईंधन, जैविक खाद, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग और निर्माण सामग्री जैसे उपयोगी उत्पादों में बदलकर नए आर्थिक अवसर पैदा कर रहे हैं। कचरे के स्रोतों के नजदीक काम करने वाली ये कंपनियां परिवहन लागत घटाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने और प्रदूषण से निपटने में मदद कर रही हैं, जिसमें मंदिरों के फूलों से अगरबत्ती व पैकेजिंग बनाने और फसल अवशेषों से बायोचार व स्ट्रॉ तैयार करने जैसे अभिनव कार्य शामिल हैं। आधुनिक रीसाइक्लिंग सुविधाओं की कमी वाले छोटे शहरों में कम लागत वाली तकनीक अपनाने वाले ये स्टार्टअप किसानों और कचरा संग्रहकर्ताओं के लिए आय के नए स्रोत बना रहे हैं, जिससे चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में सर्कुलर इकोनॉमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े स्टार्टअप कृषि और शहरी कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ नए आर्थिक अवसर पैदा कर रहे हैं।
जहां हरित तकनीक की चर्चा में इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा प्रमुखता से छाए रहते हैं, वहीं ये कंपनियां कचरे से जैव ईंधन, जैविक खाद, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग, निर्माण सामग्री और पशु आहार जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन स्टार्टअप की खासियत यह है कि वे छोटे शहरों में कचरे के स्रोतों के नजदीक काम करते हैं।
इससे परिवहन लागत घटती है, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होता है और प्रदूषण की समस्या से निपटने में मदद मिलती है। इस क्षेत्र में मंदिरों से निकलने वाले फूलों के कचरे का इस्तेमाल कर अगरबत्ती, खाद और पैकेजिंग सामग्री तैयार करना एक प्रमुख उदाहरण है। वहीं, धान की भूसी, फसल अवशेष और नारियल की पत्तियों को बायोचार, जैव अपघटनीय स्ट्रॉ और वैकल्पिक पैकेजिंग फोम में बदला जा रहा है।
शहरी क्षेत्रों में जैविक कचरे से बायोगैस और पोषक तत्वों से भरपूर खाद बनाने के लिए विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण इकाइयां भी विकसित की जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे शहरों में बड़ी मात्रा में मिश्रित कचरा पैदा होता है, लेकिन वहां आधुनिक रीसाइक्लिंग सुविधाओं की कमी है। ऐसे में कम लागत वाली और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल तकनीक अपनाने वाले स्टार्टअप इस अंतर को भर रहे हैं। इनसे किसानों और असंगठित क्षेत्र के कचरा संग्रहकर्ताओं के लिए आय के नए स्रोत भी बन रहे हैं। भारत में रीसाइक्लिंग के लक्ष्य बढ़ाने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के बीच इस क्षेत्र में निवेशकों और नीति निर्माताओं की दिलचस्पी बढ़ रही है। यह बदलाव दिखाता है कि स्वच्छ ऊर्जा के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी नवाचार छोटे शहरों के लिए कचरे को पर्यावरणीय चुनौती से आर्थिक अवसर में बदल सकता है।
Also Read: ब्रिटेन में खाद्य कचरे के अलग संग्रह की पहल तेज, रीसाइक्लिंग बढ़ाने पर जोर

