By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: इलेक्ट्रिक वाहन करीब दो साल में चुकाते हैं कार्बन उत्सर्जन का शुरुआती बोझ, जीवनकाल में 78% तक कम उत्सर्जन
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > इलेक्ट्रिक व्हीकल > इलेक्ट्रिक वाहन करीब दो साल में चुकाते हैं कार्बन उत्सर्जन का शुरुआती बोझ, जीवनकाल में 78% तक कम उत्सर्जन
AI Image
इलेक्ट्रिक व्हीकल

इलेक्ट्रिक वाहन करीब दो साल में चुकाते हैं कार्बन उत्सर्जन का शुरुआती बोझ, जीवनकाल में 78% तक कम उत्सर्जन

Environment Pulse
Last updated: October 28, 2026 4:43 pm
Environment Pulse
Published: October 28, 2026
Share
AI Image
SHARE

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के आंकड़ों के अनुसार, बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपने पूरे जीवनकाल में पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में लगभग 73% से 78% तक कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करते हैं, और यदि इन्हें पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा से चार्ज किया जाए तो यह कमी 80% तक हो सकती है। हालांकि बैटरियों में प्रयुक्त खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकेल) के खनन और प्रसंस्करण के कारण ईवी के निर्माण का शुरुआती कार्बन उत्सर्जन पारंपरिक पेट्रोल कारों से 30% से 40% अधिक होता है। अमेरिका और यूरोप जैसे क्षेत्रों में सामान्य परिस्थितियों में लगभग दो साल या करीब 17,000 किलोमीटर की ड्राइविंग के बाद ये वाहन इस शुरुआती उत्सर्जन की भरपाई कर लेते हैं। लगभग 18 साल के सामान्य जीवनकाल में पेट्रोल कारों का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ईवी की तुलना में 3.5 गुना तक अधिक हो सकता है, जिससे जलवायु के लिहाज से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग अत्यधिक फायदेमंद साबित होता है। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का इस्तेमाल पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में जलवायु पर पड़ने वाले प्रभाव को काफी कम कर सकता है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के आंकड़ों के अनुसार, बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन अपने पूरे जीवनकाल में समान श्रेणी के पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में लगभग 73 से 78 प्रतिशत कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करते हैं।

यदि इन्हें पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित बिजली से चार्ज किया जाए, तो उत्सर्जन में कमी 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में शुरुआती कार्बन उत्सर्जन अपेक्षाकृत अधिक होता है।

इसकी प्रमुख वजह बैटरियों में इस्तेमाल होने वाले लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे खनिजों का खनन और प्रसंस्करण है। इसके कारण ईवी के निर्माण से जुड़ा उत्सर्जन पारंपरिक पेट्रोल कार की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत अधिक हो सकता है। जलवायु संबंधी विश्लेषणों के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप जैसे क्षेत्रों में सामान्य परिस्थितियों में लगभग दो साल तक वाहन चलाने के बाद इलेक्ट्रिक कार इस शुरुआती उत्सर्जन अंतर की भरपाई कर सकती है।

इसके लिए करीब 17,000 किलोमीटर की ड्राइविंग का अनुमान दिया गया है। लगभग 18 साल के सामान्य वाहन जीवनकाल में पेट्रोल कारों से होने वाला ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में 3.5 गुना तक अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती उत्सर्जन की भरपाई होने के बाद इलेक्ट्रिक वाहन का प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर जलवायु के लिहाज से उसका लाभ बढ़ाता है। बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने से यह फायदा और मजबूत हो सकता है।

ये निष्कर्ष वाहन उत्सर्जन मानकों, सार्वजनिक परिवहन बेड़ों के विद्युतीकरण और बैटरी तकनीक के भविष्य को लेकर वैश्विक नीतिगत चर्चाओं को दिशा दे रहे हैं।

Also Read: दुनिया के 70% मीठे पानी की खपत सिंचाई में, केवल 20% कृषि भूमि से मिलता है 40% खाद्य उत्पादन

You Might Also Like

The Amazon may be much closer to its breaking point than we thought
नेपाल के पीएम ने यूएन में जलवायु संकट पर दुनिया को घेरा, बाढ़ को बताया ‘दुनिया के लिए चेतावनी’
सभी विभाग अपनी छतों पर शीघ्र लगवाएं सोलर पैनल : मुख्य सचिव
बदलती दुनिया पर नज़र रखने का सबसे बेहतरीन ज़रिया बने सैटेलाइट्स
भारत में EV क्रांति से 2030 तक पैदा होंगी 40 मिलियन तक नौकरियां
TAGGED:Battery Manufacturingcarbon emissionsClimate changecobaltElectric VehiclesEVGreenhouse Gas EmissionsICCTlithiumnickelpetrol vehiclesRenewable energy
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: अल नीनो की आशंका के बीच भारत ने 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य घटाकर 37.393 करोड़ टन किया – Environment Pu

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
जैव-विविधता

महाराष्ट्र में तेंदुओं की आबादी नियंत्रित करने के लिए देश का पहला इम्यूनोकॉन्ट्रासेप्शन पायलट प्रोजेक्ट शुरू

Environment Pulse
Environment Pulse
October 19, 2026
भारत में चरम मौसम का असर, IMD ने बारिश की विसंगतियों और गर्मी को लेकर चेताया
भारत के बढ़ते कोकिंग कोयला उत्पादन के बीच व्यापक मीथेन रणनीति की जरूरत
उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024 के तहत आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना
Metropolitan Air Quality: A Warning Signal for the Planet’s Environmental Future

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?