चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी रामसर स्थल (Ramsar Site) का दर्जा मिल गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाली यह चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश की पहली और भारत की 103वीं रामसर साइट बन गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है। शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में 1958 में बनाई गई यह कृत्रिम झील प्रवासी पक्षियों और कई दुर्लभ प्रजातियों का प्रमुख आवास है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (रामसर साइट) घोषित किया गया है। इसके साथ ही यह केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल बन गया है। इस उपलब्धि के बाद भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। सुखना झील को रामसर साइट संख्या 2602 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश की सौज झील को भी रामसर स्थल का दर्जा दिया गया।
शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में चंडीगढ़ के किनारे स्थित यह कृत्रिम मीठे पानी की झील लगभग 565 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। वर्ष 1958 में शहर की नियोजित संरचना के तहत मौसमी सुखना चोए नदी पर बांध बनाकर इसका निर्माण किया गया था।
वर्षा जल पर निर्भर यह आर्द्रभूमि खुले जल क्षेत्र, उथले पानी में उगने वाली वनस्पतियों, झाड़ियों और वन क्षेत्रों जैसे विविध प्राकृतिक आवासों को संरक्षण प्रदान करती है। सुखना झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। यहां संकटग्रस्त श्रेणी के कॉमन पोचार्ड, लुप्तप्राय पल्लास फिश ईगल और लुप्तप्राय ब्लैक पॉन्ड टर्टल जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं। इससे झील का पारिस्थितिक महत्व और बढ़ जाता है।
रामसर का दर्जा मिलने से झील को अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ संरक्षण के लिए अतिरिक्त महत्व मिलेगा, लेकिन इसके सामने कई पर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं। अधिकारियों के अनुसार, चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में फैले 10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र वाले शिवालिक जलग्रहण क्षेत्र से भारी मात्रा में गाद झील में पहुंचती है। दशकों से जारी गाद जमाव के कारण झील की जल संग्रहण क्षमता कुछ आकलनों के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है। इसके अलावा आक्रामक खरपतवार भी इसके संरक्षण में बाधा बन रहे हैं।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए वर्ष 2026 में झील के रेगुलेटर छोर पर गाद निकालने का अभियान चलाया गया, जिसके तहत लगभग 34,000 से 35,000 घन मीटर गाद हटाई गई। इसके साथ ही जलग्रहण क्षेत्र में मृदा एवं नमी संरक्षण, वनीकरण और नियमित रूप से खरपतवार हटाने जैसे उपाय किए जा रहे हैं। सुखना झील पहले से ही आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत संरक्षित है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इससे पहले झील को कानूनी इकाई का दर्जा भी दिया था।
अधिकारियों का मानना है कि रामसर का दर्जा मिलने से झील के जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा, जल गुणवत्ता में सुधार और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। साथ ही पर्यटन एवं मनोरंजन गतिविधियों और पर्यावरणीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। अब सुखना झील का संरक्षण वैश्विक स्तर पर अधिक निगरानी और जवाबदेही के दायरे में होगा।

