बंगाल की खाड़ी में उठे भीषण चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट (नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के पास) पर भारी तबाही मचाई है। 100 से 110 किमी प्रति घंटे (झोंकों में 120 किमी/घंटा) की रफ्तार वाली तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों के निर्देश दिए हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : बंगाल की खाड़ी में उठा भीषण चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट से टकराया। तूफान के प्रभाव से तटीय इलाकों में तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान ने नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के आसपास सुबह लगभग 3:30 से 5:30 बजे के बीच दस्तक दी। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। एक सप्ताह के भीतर इस क्षेत्र में आने वाला यह दूसरा गंभीर चक्रवाती मौसम तंत्र है। इससे पहले चक्रवात ‘अरनब’ ने भी क्षेत्र को प्रभावित किया था।
स्थिति को देखते हुए आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु के आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया गया था। नेल्लोर, प्रकाशम, बापटला और कृष्णा जिलों के निचले तटीय क्षेत्रों को सबसे अधिक खतरा बताया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई थी। इसके अलावा कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया। समुद्र में खगोलीय ज्वार से 1 से 1.5 मीटर तक ऊंची तूफानी लहरें उठने की आशंका थी, जिससे बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों के निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया।
तट के पास समुद्री लहरों की ऊंचाई 9 से 14 मीटर तक रहने का अनुमान जताया गया था। चक्रवात के खतरे को देखते हुए राज्य प्रशासन ने संवेदनशील तटीय क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। लगभग 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी। आपदा प्रबंधन और राहत दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को संभावित नुकसान से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा, क्योंकि तूफान से हजारों बिजली के खंभे प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। तूफान के कारण विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम हवाई अड्डों से संचालित कई घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं।
मछुआरों को 4 नवंबर की दोपहर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और आंध्र प्रदेश के तटीय समुद्री क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। समुद्र में संचालित अपतटीय और तटीय गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से रोकने की सिफारिश की गई। तूफान का असर उत्तरी तमिलनाडु में भी देखने को मिला। चेन्नई समेत कई इलाकों में भारी बारिश हुई, जिसके चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया और कुछ क्षेत्रों में स्कूल बंद कर दिए गए।
3 नवंबर की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अब तक किसी की मौत या बड़ी चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ने की खबरें सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार, तूफान धीरे-धीरे कमजोर पड़ते हुए आंतरिक क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से घरों के भीतर रहने, निचले और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने तथा मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
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