रॉटरडैम कन्वेंशन की केमिकल रिव्यू कमेटी (CRC-22) ने अत्यंत विषैले कीटनाशक मिथाइल पैराथियॉन के लिए एक नया ‘डिसीजन गाइडेंस डॉक्यूमेंट’ अपनाया है, जिसका उद्देश्य इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उपयोग पर नियंत्रण मजबूत करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखे जाने के कारण ब्राजील और यूरोपीय संघ जैसे देशों में इस पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। यदि 2027 में पनामा सिटी में होने वाले सम्मेलन में इसे मंजूरी मिल जाती है, तो इसे कन्वेंशन के एनेक्स III में शामिल कर लिया जाएगा, जिससे आयातक देशों की स्पष्ट सहमति यानी ‘प्रायर इनफॉर्म्ड कंसेंट’ (PIC) प्रक्रिया अनिवार्य हो जाएगी।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: रॉटरडैम कन्वेंशन की केमिकल रिव्यू कमेटी ने अत्यधिक विषैले ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक मिथाइल पैराथियॉन के लिए एक नया Decision Guidance Document अपनाया है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके व्यापार और उपयोग से जुड़े जोखिमों पर नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह निर्णय 16 सितंबर 2026 को रोम स्थित खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) मुख्यालय में 15 से 18 सितंबर तक हुई समिति की 22वीं बैठक (CRC-22) के दौरान लिया गया। दस्तावेज में ब्राजील और यूरोपीय संघ की नियामकीय कार्रवाइयों का उल्लेख है, जहां इस रसायन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
इसका उद्देश्य देशों को मिथाइल पैराथियॉन के आयात और उपयोग को लेकर जोखिम आधारित और सूचित निर्णय लेने में सहायता देना है। मिथाइल पैराथियॉन का इस्तेमाल अनाज, फल, विशेष रूप से खट्टे फलों, अंगूर की बेलों, सब्जियों, सजावटी पौधों, कपास और अन्य फसलों में चबाने तथा रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसे अत्यंत खतरनाक कीटनाशक की श्रेणी में रखता है। इसके संपर्क में आने से तंत्रिका तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं, जिनमें व्यवहार में बदलाव, सांस लेने में कमी, लकवा, कोमा और मृत्यु शामिल हैं। लंबे समय में यह प्रजनन तंत्र को नुकसान, म्यूटाजेनिक प्रभाव और विलंबित न्यूरोपैथी जैसी समस्याओं से भी जुड़ा है। खेतों में कीटनाशक मिलाने और छिड़काव करने वाले श्रमिकों के लिए इसका जोखिम विशेष रूप से गंभीर माना जाता है।
सुरक्षात्मक उपकरणों के इस्तेमाल के बावजूद संपर्क का खतरा बना रह सकता है। यह रसायन पक्षियों, मधुमक्खियों और जलीय जीवों के लिए भी अत्यधिक विषैला है। ब्राजील की स्वास्थ्य नियामक संस्था ANVISA ने मानव स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के आधार पर दिसंबर 2015 से मिथाइल पैराथियॉन युक्त सभी उत्पादों के उत्पादन, उपयोग, बिक्री, आयात और निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
यूरोपीय संघ ने भी इसके मौजूदा अनुमोदनों को कई वर्ष पहले वापस ले लिया था और नए अनुमोदनों की अनुमति नहीं दी है। रॉटरडैम कन्वेंशन के तहत मिथाइल पैराथियॉन के कुछ अत्यधिक सांद्रित फॉर्मूलेशन पहले से ही Severely Hazardous Pesticide Formulation के रूप में सूचीबद्ध थे।
नई सिफारिश इसके सामान्य कीटनाशक उपयोग को भी इसके दायरे में लाने की दिशा में है। समिति द्वारा अपनाया गया निर्णय मार्गदर्शन दस्तावेज अब रॉटरडैम कन्वेंशन के पक्षकार देशों के सम्मेलन (Conference of the Parties) को अंतिम विचार के लिए भेजा गया है। इसका 13वां सम्मेलन 19 से 30 अप्रैल 2027 तक पनामा सिटी में प्रस्तावित है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो मिथाइल पैराथियॉन को कन्वेंशन के Annex III में शामिल किया जाएगा और उस पर Prior Informed Consent (PIC) प्रक्रिया लागू होगी।
PIC व्यवस्था के तहत निर्यात करने वाले देशों को आयातक देशों को संबंधित रसायन के जोखिम, सुरक्षा उपायों और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी तथा शिपमेंट से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनकी स्पष्ट सहमति सुनिश्चित करनी होगी। यह व्यवस्था विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां खतरनाक रसायनों का स्वतंत्र मूल्यांकन करने के लिए संसाधन सीमित हो सकते हैं।
रॉटरडैम कन्वेंशन को 1998 में अपनाया गया था और यह 2004 में लागू हुआ। इसका उद्देश्य कुछ खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में देशों के बीच साझा जिम्मेदारी, सूचना के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि, किसी रसायन को रॉटरडैम कन्वेंशन के Annex III में शामिल किया जाना अपने आप में उसके उत्पादन या उपयोग पर वैश्विक प्रतिबंध नहीं लगाता। इसका मुख्य उद्देश्य जोखिम संबंधी जानकारी साझा करना और आयातक देशों को सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है, ताकि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की बेहतर सुरक्षा हो सके।
समिति की मौजूदा कार्रवाई 2025 में हुई CRC-21 बैठक के दौरान मिथाइल पैराथियॉन को सूचीबद्ध करने की पूर्व सिफारिश के बाद हुई है। अंतर-सत्रीय प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया निर्णय मार्गदर्शन दस्तावेज अब अंतिम रूप में स्वीकार कर लिया गया है।

