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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > इको-टूरिज्म ने बदली किस्मत, ब्राजील में फिर दहाड़ रहे जगुआर
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जैव-विविधता

इको-टूरिज्म ने बदली किस्मत, ब्राजील में फिर दहाड़ रहे जगुआर

Environment Pulse
Last updated: October 2, 2026 8:36 pm
Environment Pulse
Published: October 2, 2026
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शिकार और संघर्ष के कारण कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे जगुआर अब ब्राजील के पैंटानाल और अटलांटिक फॉरेस्ट जैसे क्षेत्रों में तेजी से वापस लौट रहे हैं। संरक्षण परियोजनाओं और तेजी से बढ़ते इको-टूरिज्म ने स्थानीय समुदायों और पशुपालकों के लिए जगुआरों को नुकसान के बजाय आर्थिक अवसर में बदल दिया है, जिससे उन्हें मारने की घटनाओं में कमी आई है। हालांकि, पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन यह मॉडल वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: कभी शिकार के कारण स्थानीय स्तर पर विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके और पशुपालकों के लिए खतरा माने जाने वाले जगुआर अब ब्राजील के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फिर से तेजी से दिखाई देने लगे हैं। संरक्षण कार्यक्रमों और तेजी से बढ़ते इको-टूरिज्म ने इन बड़े बिल्लीनुमा शिकारी जानवरों को पशुपालकों के लिए नुकसान का कारण मानने की बजाय आर्थिक अवसर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ब्राजील के विशाल पैंटानाल आर्द्रभूमि क्षेत्र में दुनिया में जगुआर का सबसे अधिक घनत्व पाया जाता है। दक्षिणी पैंटानाल स्थित कैमान इकोलॉजिकल रिफ्यूज में 2011 में पूर्व रेसिंग ड्राइवर मारियो हैबरफेल्ड द्वारा शुरू किए गए Onçafari प्रोजेक्ट ने जगुआर को सफारी वाहनों की मौजूदगी का धीरे-धीरे अभ्यस्त बनाने की पहल की। इस प्रयास से पर्यटकों के लिए जगुआर देखने की संभावना में बड़ा बदलाव आया है।

जहां पहले इन दुर्लभ और छिपकर रहने वाले जानवरों को देख पाना मुश्किल था, वहीं अब लगभग 100 प्रतिशत पर्यटक कम से कम एक जगुआर देख लेते हैं। हाल के वर्षों में यहां सालाना जगुआर देखे जाने की घटनाओं की संख्या 1,000 से अधिक रही है। 2017 के एक अध्ययन के अनुसार, उत्तरी पैंटानाल में जगुआर पर्यटन से सालाना करीब 68 लाख डॉलर की आय होती है।

इसके मुकाबले इसी क्षेत्र में जगुआरों द्वारा मवेशियों को नुकसान पहुंचाने से होने वाला अनुमानित आर्थिक नुकसान लगभग 1.21 लाख डॉलर था। इस आर्थिक अंतर ने पशुपालकों के लिए जगुआरों को मारने की बजाय उनके संरक्षण को अधिक लाभकारी विकल्प बनाया है। कई पूर्व पशुपालक कर्मचारी अब वन्यजीव गाइड के रूप में काम कर रहे हैं। कैमान जैसे पर्यटन केंद्रों में प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद लॉज में पर्यटकों की संख्या और ठहरने की दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस मॉडल ने स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण से सीधे आर्थिक लाभ जोड़ने का अवसर दिया है।

उत्तरी पैंटानाल के पोर्टो जोफ्रे क्षेत्र में भी इसी तरह के परिणाम सामने आए हैं। Jaguar ID Project के अनुसार, इंसानी मौजूदगी के अभ्यस्त हो चुके जगुआरों की संख्या 2013 में 29 से बढ़कर 2023 में 130 हो गई। यह 400 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। इस परियोजना में पर्यटकों और गाइडों द्वारा खींची गई तस्वीरों की मदद से जगुआरों की पहचान की जाती है, क्योंकि प्रत्येक जानवर के शरीर पर मौजूद धब्बों का पैटर्न अलग होता है। नागरिक विज्ञान से जुड़े इन प्रयासों ने भी सैकड़ों जगुआरों की पहचान और निगरानी में मदद की है।

तस्वीरों और क्षेत्रीय आंकड़ों के जरिए वैज्ञानिकों को जगुआरों की आबादी, आवाजाही और व्यवहार को समझने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही है। ब्राजील के अटलांटिक फॉरेस्ट क्षेत्र में स्थित इगुआसू नेशनल पार्क और ब्राजील-अर्जेंटीना के व्यापक ग्रीन कॉरिडोर में भी जगुआरों की संख्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2000 के दशक के अंत की तुलना में इस क्षेत्र में जगुआरों की संख्या दोगुने से अधिक होकर कम से कम 105 तक पहुंच गई है। ब्राजील के Jaguars of Iguaçu Project और अर्जेंटीना के Proyecto Yaguareté के बीच सीमा पार सहयोग ने संरक्षण प्रयासों को मजबूती दी है।

स्थानीय समुदायों के बीच जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों से पशुधन पर हमलों के जवाब में जगुआरों को मारने की घटनाओं में भी कमी लाने में मदद मिली है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी के लिए कई रचनात्मक पहल भी सामने आई हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाला Jaguar Crocheteers समूह जगुआर की थीम वाले हस्तशिल्प तैयार कर पर्यटकों को बेचता है। इससे स्थानीय महिलाओं को आय का स्रोत मिलता है और समुदाय में जगुआर को लेकर गौरव की भावना मजबूत होती है। अनुमान है कि दुनिया में बचे हुए जगुआरों में लगभग आधे ब्राजील में पाए जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) जगुआर को वैश्विक स्तर पर Near Threatened श्रेणी में रखता है, जबकि ब्राजील में इसे Vulnerable माना जाता है। पैंटानाल में पुनर्वासित जगुआरों को सफलतापूर्वक प्राकृतिक वातावरण में दोबारा छोड़े जाने के मामले भी सामने आए हैं। इनमें कुछ ऐसे जगुआर भी शामिल हैं जिनसे जंगल में पैदा हुए शावक और अगली पीढ़ी के शावक देखे गए हैं। इससे संरक्षण कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय आबादी को मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। हालांकि, इको-टूरिज्म की सफलता अपने साथ नई चुनौतियां भी लेकर आई है। लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर भीड़ बढ़ने के कारण कभी-कभी एक ही जगुआर के आसपास बड़ी संख्या में नावें जमा हो जाती हैं। इससे जानवरों पर तनाव पड़ने की आशंका है और पर्यटकों के अनुभव की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यटन को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए नावों की संख्या सीमित करने, पर्यटकों को अलग-अलग क्षेत्रों में वितरित करने और पर्यटन गतिविधियों के बेहतर नियमन जैसे उपाय जरूरी हैं। पैंटानाल में गंभीर सूखा और जंगलों की आग जैसी जलवायु संबंधी चुनौतियां भी जगुआरों के आवास के लिए खतरा बनी हुई हैं। इसके बावजूद संरक्षण विशेषज्ञ ब्राजील के अनुभव को वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय आर्थिक हितों को जोड़ने वाले प्रभावी मॉडल के रूप में देखते हैं।

जब किसी जीव के जीवित रहने से स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिलने लगता है, तो उसके संरक्षण के लिए प्रोत्साहन भी मजबूत होता है। ब्राजील में जगुआरों की वापसी यह संकेत देती है कि सही संरक्षण रणनीति, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जिम्मेदार इको-टूरिज्म के जरिए कभी तेजी से घटती वन्यजीव आबादी को फिर से मजबूत किया जा सकता है।

पैंटानाल और अन्य क्षेत्रों में इन प्रयासों के चलते जगुआर एक बार फिर ब्राजील के समृद्ध और पुनर्जीवित वन्य क्षेत्र का प्रमुख प्रतीक बनते दिखाई दे रहे हैं।

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