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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > ब्रिटेन में ब्लूटंग बीमारी का कहर, पशुधन संकट गहराया; 3,472 से अधिक मामले दर्ज
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ब्रिटेन में ब्लूटंग बीमारी का कहर, पशुधन संकट गहराया; 3,472 से अधिक मामले दर्ज

Environment Pulse
Last updated: November 4, 2026 8:39 pm
Environment Pulse
Published: November 4, 2026
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ब्रिटेन में ‘ब्लूटंग’ (Bluetongue) बीमारी का प्रकोप अपने सबसे गंभीर स्तर पर पहुँच गया है, जिससे पशुधन संकट गहरा गया है। जुलाई 2026 से अब तक इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में इस वायरस के 3,472 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले तीन सीज़न के कुल मामलों से पाँच गुना से अधिक है। अकेले इंग्लैंड में 2,917 फार्म प्रभावित हुए हैं, जिसमें डेवोन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है। कीटों (मिज) के माध्यम से फैलने वाली इस विषाणुजनित बीमारी से भेड़ों और मवेशियों को बुखार, सूजन, दूध उत्पादन में गिरावट और गर्भपात जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ब्रिटिश वेटरनरी एसोसिएशन ने इसे पशु कल्याण का बड़ा संकट बताया है क्योंकि इस बीमारी का कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। टीकों की सीमित उपलब्धता, प्रयोगशाला रिपोर्ट में देरी और किसानों पर बढ़ते मानसिक व आर्थिक दबाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। पशुपालन संगठनों ने 2027 के मौसम के लिए अभी से टीकाकरण की योजना बनाने की अपील की है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : ब्रिटेन में ब्लूटंग (Bluetongue) बीमारी का प्रकोप इस वर्ष अपने सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। पशुपालन क्षेत्र से जुड़े संगठनों और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे पशु कल्याण का बड़ा संकट बताया है। जुलाई 2026 से अब तक इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में ब्लूटंग वायरस के 3,472 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा पिछले तीन पशु रोग मौसमों के कुल मामलों से पांच गुना से भी अधिक है।

इंग्लैंड में सबसे ज्यादा 2,917 प्रभावित पशु फार्म दर्ज किए गए हैं, जबकि वेल्स में 500 और स्कॉटलैंड में 55 मामले सामने आए हैं। उत्तरी आयरलैंड में अब तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। यहां एक मामले का अर्थ ऐसे फार्म से है, जहां कम से कम एक संक्रमित पशु की पुष्टि हुई हो। इसलिए वास्तविक रूप से प्रभावित भेड़, गाय और बकरियों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

इंग्लैंड का दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है। अकेले डेवोन में 1,291 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा समरसेट में 373 और कॉर्नवाल में 352 मामले दर्ज किए गए हैं। ब्लूटंग एक विषाणुजनित बीमारी है, जो संक्रमित काटने वाले छोटे कीटों (मिज) के माध्यम से फैलती है। इससे पशुओं को बुखार, मुंह में घाव, सूजन और लंगड़ापन जैसी समस्याएं होती हैं। गंभीर संक्रमण में गर्भपात, मृत बच्चों का जन्म और पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है।

भेड़ों में इसके लक्षण अधिक गंभीर दिखाई देते हैं, जबकि मवेशियों में संक्रमण के कई मामले सामने नहीं आ पाते। नेशनल फार्मर्स यूनियन की मुख्य पशु स्वास्थ्य एवं कल्याण सलाहकार कैथरीन मैकलॉघलिन ने बताया कि इस प्रकोप के कारण किसानों को पशुओं की मौत, प्रजनन संबंधी नुकसान, दूध उत्पादन में गिरावट और पशुओं की विकास दर प्रभावित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा श्रम, पशु चिकित्सा और उपचार संबंधी खर्च भी बढ़ गए हैं।

उन्होंने कहा कि किसान गंभीर मानसिक दबाव और तनाव से गुजर रहे हैं। ब्रिटिश वेटरनरी एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. ग्वेन रीस ने इसे पशु कल्याण का बड़ा संकट बताते हुए कहा कि इस बीमारी का कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। पशु चिकित्सक फिलहाल केवल सहायक चिकित्सा के जरिए संक्रमित पशुओं को राहत देने का प्रयास कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी का असर अब पशुओं के प्रजनन और भविष्य की उत्पादकता पर भी दिखाई देने लगा है।

किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे शरद ऋतु में मवेशियों की गर्भावस्था की जांच कराएं, क्योंकि कई गायें गर्भधारण नहीं कर पाई हैं या उनके गर्भ में कमजोर अथवा विकृत बछड़े हो सकते हैं। कुछ पशुपालन क्षेत्रों में युवा मवेशियों की विकास दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। बीमारी के प्रसार के दौरान टीकों की प्रभावशीलता को लेकर अनिश्चितता, प्रयोगशालाओं से जांच रिपोर्ट मिलने में तीन सप्ताह तक की देरी और टीकों की सीमित उपलब्धता ने स्थिति को और गंभीर बनाया। संक्रमण के प्रसार को दर्शाने वाले मानचित्र भी वास्तविक स्थिति से दो से तीन सप्ताह पीछे चल रहे थे, जिससे किसानों को अपने क्षेत्रों में संक्रमण के खतरे का सही आकलन करने में कठिनाई हुई।

अब ब्रिटेन के पशुपालन संगठनों और सरकारी अधिकारियों ने 2027 के प्रजनन एवं पशुपालन मौसम के लिए पहले से टीकाकरण की योजना बनाने की अपील की है। विशेषज्ञों को आशंका है कि वायरस संक्रमित कीटों अथवा गर्भस्थ संक्रमित पशुओं में सर्दियों के दौरान भी बना रह सकता है और अगले वर्ष फिर तेजी से फैल सकता है। ब्रिटेन के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों ने टीकाकरण को इस बीमारी से बचाव का सबसे भरोसेमंद दीर्घकालिक उपाय बताया है। इस वर्ष के प्रकोप ने पशु रोग निगरानी, प्रयोगशाला जांच और टीकों की उपलब्धता से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। कीटों की सक्रियता का मौसम सामान्य से अधिक समय तक बने रहने के कारण नवंबर में भी नए संक्रमण सामने आ रहे हैं।

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