उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों को ई-कचरा संग्रह केंद्र (E-Waste Collection Centers) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों और समाज को ई-कचरे के सुरक्षित प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में अब ई-कचरा संग्रह केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों पर छात्र-छात्राएं खराब मोबाइल फोन, चार्जर, केबल, कैलकुलेटर, की-बोर्ड और अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा कर सकेंगे। इसके साथ ही विद्यार्थियों को ई-कचरे की पहचान, उसके सुरक्षित संग्रह और उचित निस्तारण के बारे में जागरूक किया जाएगा।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि इस अभियान के लिए सभी जिलों में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। विद्यार्थियों को यह भी बताया जाएगा कि वे घर में मौजूद ई-कचरे की पहचान कैसे करें और अभिभावकों की सहमति से उसे विद्यालय के संग्रह केंद्र में जमा करें। एकत्र ई-कचरे को सुरक्षित और सूखे कंटेनरों में रखा जाएगा तथा बाद में अधिकृत एजेंसी को सौंपा जाएगा।
विद्यालयों में विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा। इसका पहला चरण 30 सितंबर तक और दूसरा चरण दो से 31 अक्तूबर तक चलेगा। स्कूलों में कचरे के पृथक्करण के लिए चार रंगों के कूड़ेदान रखे जाएंगे।
हरे कूड़ेदान में गीला कचरा, जैसे बचा हुआ भोजन तथा फल-सब्जियों के छिलके रखे जाएंगे। नीले कूड़ेदान में कागज, प्लास्टिक, कांच, रबर और लकड़ी सहित सूखा कचरा जमा होगा। लाल कूड़ेदान में इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनिटरी पैड जैसे स्वच्छता अपशिष्ट रखे जाएंगे। वहीं काले कूड़ेदान में पेंट के डिब्बे, एक्सपायर्ड दवाएं और खराब बल्ब जैसे विशेष देखभाल वाले कचरे को रखा जाएगा।
महानिदेशक ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि विद्यालयों में एकत्र कचरे को केवल अधिकृत एजेंसियों को ही सौंपा जाए। अभियान के संचालन और कचरे के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर 30 सितंबर को एक वेबिनार भी आयोजित किया जाएगा।
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