अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ग्लोबल ईवी आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 2 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है और वैश्विक स्तर पर नई बिकने वाली कारों में इनकी हिस्सेदारी 25% तक पहुँच गई है। इस बाजार में चीन सबसे आगे है, जहाँ 1.3 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रिक कारें बिकीं और बाजार हिस्सेदारी 53-55% रही। वहीं, कड़े पर्यावरणीय मानकों के चलते यूरोप में बिक्री 30% बढ़कर 40 लाख से अधिक (28% बाजार हिस्सेदारी) हो गई। इसके विपरीत, अमेरिका में यह वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी (10% से नीचे) रही। वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से प्रतिदिन 12 लाख बैरल तेल की बचत हुई है। IEA का अनुमान है कि 2026 तक यह बिक्री 2.3 करोड़ तक पहुँच सकती है। बैटरी की घटती लागत और चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री वर्ष 2025 में दो करोड़ वाहनों के आंकड़े को पार कर गई। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर बिकने वाली नई कारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंतरिक दहन इंजन वाले वाहनों से स्वच्छ परिवहन की ओर बढ़ते बदलाव में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ग्लोबल ईवी आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ी।
पिछले कई वर्षों से हर साल लगभग 35 लाख अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री का रुझान जारी है। चीन इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में सबसे आगे बना हुआ है। वहां 1.3 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रिक कारें बिकीं और घरेलू नई कारों के बाजार में इनकी हिस्सेदारी लगभग 53 से 55 प्रतिशत रही। प्रमुख बाजारों में यूरोप ने सबसे तेज वृद्धि दर्ज की। यहां इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 30 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 40 लाख से ज्यादा हो गई। नई कारों की बिक्री में इनकी हिस्सेदारी लगभग 28 प्रतिशत रही। कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से जुड़े कड़े मानकों ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके विपरीत, अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता अपेक्षाकृत धीमी रही और कुछ आकलनों में इनकी बाजार हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है।
दुनिया के तीन सबसे बड़े बाजारों से बाहर भी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री लगभग 20 लाख तक पहुंच गई। उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विशेष रूप से किफायती चीनी मॉडलों के कारण इन वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में सबसे अधिक हिस्सेदारी रही, जबकि प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों ने भी योगदान दिया। वर्तमान में वैश्विक कारों के कुल बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग पांच प्रतिशत है। वर्ष 2025 में इन वाहनों के उपयोग से प्रतिदिन अनुमानित 12 लाख बैरल तेल की खपत कम हुई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि 2026 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री लगभग 2.3 करोड़ तक पहुंच सकती है। इससे वैश्विक नई कारों के बाजार में इनकी हिस्सेदारी 28 से 30 प्रतिशत के करीब हो सकती है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सरकारी नीतियों का समर्थन, बैटरी की घटती लागत, विभिन्न मॉडलों की उपलब्धता और चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार प्रमुख कारण हैं। चीन उत्पादन और बिक्री दोनों में अग्रणी है, जबकि यूरोप में कड़े पर्यावरणीय नियमों ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति बढ़ाई है। उभरते बाजार भी अब इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे हैं। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों में असमान विकास, चार्जिंग सुविधाओं की कमी और सरकारी नीतियों में बदलाव जैसी चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। वर्ष 2025 के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल सीमित वर्ग तक पहुंचने वाला विकल्प नहीं रह गए हैं, बल्कि कई देशों में मुख्यधारा के वाहन बाजार का हिस्सा बन चुके हैं। परिवहन क्षेत्र में जलवायु और वायु गुणवत्ता संबंधी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इस रफ्तार को बनाए रखना जरूरी होगा।

