बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के अनुसार एक ही दिन में भरी 168 किमी की उड़ान
‘जे132′ नामक इस गिद्ध की शारीरिक क्षमता की बेहतरी के लिए सोसाइटी ने किए उपाय
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
वैसे तो हमारे देश की जैव-विविधिता बेहद समृद्ध है लेकिन उसमें गिद्धों का स्थान बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये हमारे प्राकृतिक सफाईकर्मी माने जाते थे। आपको ध्यान होगा कि पिछले कुछ वर्षों पहले भारत में गिद्धों की संख्या तेजी से कम रही थी लेकिन अब यह स्थिति बदली है। गिद्धों के बारे में नए-नए शोध भी हो रहे हैं। इस दिशा में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी ने बेहतरीन काम किया है। इन्हीं प्रयासों के बीच ‘जे132′ नाम के एक गिद्ध ने 56 दिनों में 1600 किलोमीटर से अधिक उड़ान भरकर वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों और प्रेमियों को चौंका दिया है।
जंगल में जाने के बाद किसी ने नहीं सोचा था कि यह इतनी लंबी दूरी तय करेगा। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी ने बताया कि ‘जे132′ नाम के इस गिद्ध ने पिछले दिनों एक ही दिन में 168 किमी की उड़ान भरी थी। इसे सात जून को नासिक में तीसरी बार जंगल में छोड़ा गया था।
पहले दो बार जब इसे जंगल में छोड़ा गया, तो इसकी सेहत और जीवित रहने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए इसे विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। पिछले आठ सप्ताह में इस गिद्ध ने 1,618 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। इस दौरान उन्होंने लंबी उड़ान क्षमता, जंगल में जीवित रहने के कौशल और प्राकृतिक वातावरण के साथ सामंजस्य का शानदार प्रदर्शन किया।
बीएनएचएस के निदेशक और देश के जाने-माने वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट किशोर रिठे ने बताया कि नासिक के ढोल ओहोल और देवडोंगरा क्षेत्र से इस गिद्ध ‘जे132′ को कई जंगली गिद्धों को अक्सर उड़ते देखा गया है। अगर बारिश भी हो तो भी यहां रहने वाले गिद्ध अपने दम पर मृत वन्यजीव को खोजकर भोजन करते दिखाई पड़ते हैं। इन गिद्धों में ‘जे132′ भी शामिल है।
वन्यजीव पर शोध करने वाले बताते हैं पिछले आठ सप्ताह में इस गिद्ध ने प्रतिदिन औसत लंबी दूरी तय की। यह भव्य पक्षी उत्तरी नासिक तक उड़ा। यह जगह गिद्धों का महत्वपूर्ण आवास माना जाता है। इसे महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर भी देखा गया।
निदेशक किशोर रिठे ने कहा की इस गिद्ध को पहली बार 11 दिसंबर 2025 को पेंच बाघ अभयारण्य में निगरानी प्रजनन कार्यक्रम के तहत पाले गए भारतीय गिद्धों के दूसरे समूह के साथ छोड़ा गया। उस समय वह 20 दिन में 750 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर नासिक तक की उड़ान भर चुका था लेकिन उसकी शारीरिक क्षमता और बेहतर बनाने के लिए उपचार किया गया।
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