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ऑर्गेनिक अंडों का कार्बन फुटप्रिंट अधिक, पिंजरे में पाली गई मुर्गियों के अंडों से जलवायु पर पड़ता है कम असर: अध्ययन

Environment Pulse
Last updated: July 30, 2026 6:23 pm
Environment Pulse
Published: July 30, 2026
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ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने किया अपने अध्ययन में इस तरह का चौंकाने वाला दावा

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्मिथ स्कूल ऑफ एंटरप्राइज एंड द एनवायरनमेंट की टीम ने की स्टडी

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

ऑर्गेनिक अंडों के उत्पादन से पर्यावरण पर अधिक असर पड़ता है, जबकि पिंजरे में पाली गई मुर्गियों के अंडे जलवायु परिवर्तन के मामले में कम प्रभाव डालते हैं। यह दावा एक नए अध्ययन में किया गया है, जिसमें बताया गया है कि ऑर्गेनिक और फ्री-रेंज अंडों का उत्पादन पिंजरे में पाली गई मुर्गियों के अंडों की तुलना में लगभग दोगुना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करता है।

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि यदि ब्रिटेन की पूरी अंडा उत्पादन व्यवस्था को ऑर्गेनिक फ्री-रेंज मॉडल में बदल दिया जाए, तो इससे लगभग 23.16 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होगा। इसके विपरीत, यदि पूरा उत्पादन केज प्रणाली से किया जाए तो उत्सर्जन लगभग 11.84 लाख टन रहेगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि फ्री-रेंज और ऑर्गेनिक प्रणाली में समान संख्या में अंडे प्राप्त करने के लिए अधिक मुर्गियों की आवश्यकता होती है, क्योंकि पिंजरे में पाली गई मुर्गियां अंडा उत्पादन के मामले में अधिक दक्ष होती हैं। यही कारण है कि इन प्रणालियों में प्रति अंडा पर्यावरणीय प्रभाव अधिक दिखाई देता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि ऑर्गेनिक फ्री-रेंज प्रणाली का प्रभाव जल प्रदूषण, अम्लीकरण और भूमि उपयोग के मामले में भी सबसे अधिक था। इसके अलावा, इस प्रणाली में मुर्गियों की मृत्यु दर भी अन्य प्रणालियों की तुलना में अधिक दर्ज की गई।

यह अध्ययन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के स्मिथ स्कूल ऑफ एंटरप्राइज एंड द एनवायरनमेंट की वरिष्ठ शोध सहयोगी डॉ. हैरियट बार्टलेट और उनके सहयोगियों ने किया है। यह शोध रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में ब्रिटेन के पोल्ट्री फार्मों के आंकड़ों का विश्लेषण कर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, भूमि उपयोग, प्रदूषण और पशु कल्याण से जुड़े संकेतकों का मूल्यांकन किया गया।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्वयं स्वीकार किया है कि अध्ययन में प्रयुक्त आंकड़े वर्ष 2009-10 के हैं, इसलिए यह हाल के वर्षों में अंडा उत्पादन तकनीकों में हुए सुधारों को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता। अध्ययन में कीटनाशकों के उपयोग, जैव विविधता और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों को भी शामिल नहीं किया गया। डॉ. बार्टलेट ने कहा कि यह अध्ययन पर्यावरण और पशु कल्याण के बीच मौजूद एक महत्वपूर्ण संतुलन को सामने लाता है। उनके अनुसार, जिन प्रणालियों को पशु कल्याण के लिहाज से बेहतर माना जाता है, वे कई बार समान उत्पादन के लिए अधिक संसाधनों और अधिक पक्षियों की मांग करती हैं, जिससे उनका पर्यावरणीय प्रभाव बढ़ सकता है।

सॉयल एसोसिएशन सर्टिफिकेशन के नियामक एवं व्यापार मामलों के प्रमुख ली होल्डस्टॉक, जो इस अध्ययन का हिस्सा नहीं थे, ने कहा कि शोध महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है, लेकिन यह पर्यावरणीय प्रभाव की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता। उनके अनुसार, टिकाऊ खाद्य प्रणाली का मूल्यांकन केवल कार्बन उत्सर्जन से नहीं बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता, जल संरक्षण, जैव विविधता, रासायनिक इनपुट और पशु कल्याण जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। शोध के अनुसार वर्तमान में ब्रिटेन में अंडा उत्पादन विभिन्न प्रणालियों—केज, बार्न, फ्री-रेंज और ऑर्गेनिक—के मिश्रण से होता है, जिससे कुल अनुमानित उत्सर्जन 14.39 लाख टन है। अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि टिकाऊ कृषि और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

(Photo courtesy- AI)

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