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Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > सस्टेनिबिलिटी > क्या चीन एशिया में ग्रीन फार्मिंग क्रांति का इंजन बन सकता है? पाम ऑयल और सस्टेनेबल एग्री-फाइनेंस से बदलती क्षेत्रीय खेती की तस्वीर
(फोटो सौजन्य-एआई)
सस्टेनिबिलिटी

क्या चीन एशिया में ग्रीन फार्मिंग क्रांति का इंजन बन सकता है? पाम ऑयल और सस्टेनेबल एग्री-फाइनेंस से बदलती क्षेत्रीय खेती की तस्वीर

Environment Pulse
Last updated: August 10, 2026 10:20 pm
Environment Pulse
Published: August 10, 2026
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(फोटो सौजन्य-एआई)
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दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम ऑयल आयातक चीन अब सर्टिफाइड सस्टेनेबल प्रोड्यूस की खरीद बढ़ाकर दक्षिण-पूर्व एशियाई कृषि को दे रहा है नई दिशा।

Contents
चीन का बढ़ता सर्टिफाइड पाम ऑयल बाजारविकासशील एशिया की दो प्रमुख चुनौतियांचीन की क्षमता और समाधान का रोडमैपभविष्य के प्रमुख रणनीतिक कदम

215 अरब डॉलर के कृषि आयात और दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन लोन/बॉन्ड मार्केट के दम पर एशिया में ग्रीन एग्रीकल्चर को निवेश-योग्य (Investable) बनाने की तैयारी।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

पाम ऑयल हमारे दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है—हमारे स्नैक्स, शैम्पू से लेकर फ्यूल टैंक तक में इसका इस्तेमाल होता है। वैश्विक पाम ऑयल उत्पादन में इंडोनेशिया और मलेशिया का वर्चस्व है, लेकिन इस विस्तार के कारण जंगलों की कटाई, जैव विविधता (Biodiversity) के नुकसान और प्रदूषण जैसी गंभीर कीमतें चुकानी पड़ी हैं।

इसी बीच, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम ऑयल आयातक चीन अब अपनी विशाल क्रय शक्ति (Buying Power) का उपयोग कर इस पूरे उद्योग को सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) की ओर मोड़ रहा है।

चीन का बढ़ता सर्टिफाइड पाम ऑयल बाजार

आयात आंकड़े: वर्ष 2024 में चीन ने कुल 4.36 मिलियन टन पाम ऑयल का आयात किया, जिसमें से लगभग 500,000 टन RSPO-सर्टिफाइड (Roundtable on Sustainable Palm Oil) था।

कॉर्पोरेट भागीदारी: 2025 के मध्य तक, 480 चीनी कंपनियां इस सर्टिफिकेशन बॉडी का हिस्सा बन चुकी थीं।

संस्थान की रिपोर्ट: बीजिंग स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ़ फाइनेंस एंड सस्टेनेबिलिटी की रिसर्च के अनुसार, चीन अब केवल मांग का स्रोत (Demand Source) नहीं रहा, बल्कि विकासशील एशिया में ग्रीन फार्मिंग को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख उत्प्रेरक (Catalyst) बन सकता है।

विकासशील एशिया की दो प्रमुख चुनौतियां

विकासशील एशियाई देशों में कृषि ही रोजगार और जीडीपी का मुख्य आधार है, लेकिन यही क्षेत्र जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सबसे बड़ा प्रभाव झेल रहे हैं। तरक्की के रास्ते में दो मुख्य बाधाएं हैं:

सीमित खरीदार और कमजोर सर्टिफिकेशन: कमजोर सर्टिफिकेशन सिस्टम के कारण चीनी और यूरोपीय संघ (EU) जैसे बड़े बाजारों तक सस्टेनेबल प्रोड्यूसर्स की पहुंच सीमित हो जाती है।

कम निवेश: ग्रीन एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट्स में जोखिम (Risk) और लाभ (Reward) का संतुलन अनुकूल न होने से निवेश की भारी कमी है।

चीन की क्षमता और समाधान का रोडमैप

व्यापारिक क्षमता: 2024 में चीन ने कुल $215 बिलियन का कृषि सामान आयात किया, जिसमें से केवल 16% हिस्सा दक्षिण-पूर्व एशिया से था। इसका मतलब है कि सर्टिफाइड सस्टेनेबल उत्पादकों के पक्ष में मांग को मोड़ने की बड़ी गुंजाइश उपलब्ध है।

सप्लाई चेन और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग: चीन की बड़ी एग्री-फूड कंपनियां सस्टेनेबिलिटी शर्तों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करवा सकती हैं और छोटे किसानों को सीधा समर्थन दे सकती हैं।

ग्रीन लोन और बॉन्ड्स: चीन विश्व का सबसे बड़ा ग्रीन लोन और बॉन्ड मार्केट संचालित करता है (जो फिलहाल मुख्य रूप से घरेलू है)। विदेशों में ‘सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड लोन’ उपलब्ध कराने से इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है।

भविष्य के प्रमुख रणनीतिक कदम

एशियाई कृषि में इस बदलाव को केवल नीतिगत इच्छा तक सीमित न रखकर वास्तविक निवेश में बदलने के लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं।

सर्टिफिकेशन स्टैंडर्ड्स को एक समान बनाना।

ट्रेड बैरियर्स (व्यापारिक बाधाओं) को कम करना।

बड़ी एग्री-कंपनियों के लिए प्रकटीकरण (Disclosure) नियमों को सख्त करना।

एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) जैसे संस्थानों के माध्यम से निवेश के जोखिम को कम (De-risk) करना।

Also Read: फ़ूड सिक्योरिटी से सॉइल सिक्योरिटी तक: कैसे बायोलॉजी भारतीय खेती के नियमों को फिर से लिख रही है

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