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आंध्र प्रदेश में बीपीसीएल की एक लाख करोड़ रुपये की रिफाइनरी परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश

Environment Pulse
Last updated: October 25, 2026 11:07 am
Environment Pulse
Published: October 25, 2026
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भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की आंध्र प्रदेश के रामायपट्टनम बंदरगाह के पास प्रस्तावित एक लाख करोड़ रुपये की रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश की गई है। इस बड़ी परियोजना से देश की तेल शोधन क्षमता में सालाना 90 लाख टन की वृद्धि होगी और घरेलू ईंधन व पेट्रोकेमिकल की मांग पूरी करने के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना समर्थकों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, विशाल पैमाने की इस परियोजना के कारण वायु गुणवत्ता, जल संसाधन और तटीय पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंताएं भी जताई गई हैं, जिसके चलते अंतिम स्वीकृति के लिए कड़े पर्यावरणीय मानकों और पारदर्शी निगरानी प्रणालियों का पालन करना अनिवार्य होगा। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित एक लाख करोड़ रुपये की रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश की गई है। रामायपट्टनम बंदरगाह के निकट प्रस्तावित इस परियोजना से देश की तेल शोधन क्षमता में सालाना 90 लाख टन की वृद्धि हो सकती है।

हालांकि, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां अभी महत्वपूर्ण चरण हैं। यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। प्रस्तावित परिसर में कच्चे तेल को संसाधित कर ईंधन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल तैयार किया जाएगा।

इससे घरेलू मांग पूरी करने के साथ संभावित निर्यात को भी समर्थन मिल सकता है। रामायपट्टनम बंदरगाह के निकट स्थान का चयन समुद्री संपर्क की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया है। इस स्थान से कच्चे तेल के आयात और तैयार उत्पादों की ढुलाई में मदद मिलने की उम्मीद है।

औद्योगिक विकास और रोजगार की उम्मीद परियोजना के समर्थकों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्माण के दौरान और परियोजना के संचालन के बाद प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध हो सकता है। इसके अतिरिक्त, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, निर्माण सामग्री और अन्य सहायक उद्योगों को भी लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना से क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को गति मिलने और बुनियादी ढांचे में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश के कारण यह देश की प्रमुख प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है। हालांकि, पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश को अंतिम स्वीकृति नहीं माना जा सकता। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए शेष नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन महत्वपूर्ण रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परिसर जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं के लिए वायु गुणवत्ता, जल संसाधन, समुद्री पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों पर संभावित प्रभावों का आकलन आवश्यक है।

परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने की स्थिति में उत्सर्जन नियंत्रण, अपशिष्ट जल उपचार और पर्यावरणीय निगरानी से संबंधित शर्तें लागू हो सकती हैं। इन मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा। स्थानीय स्तर पर परियोजना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। कुछ लोगों को रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद है, जबकि अन्य भूमि उपयोग, तटीय पारिस्थितिकी और औद्योगिक गतिविधियों के संयुक्त प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।

इसलिए सार्वजनिक परामर्श, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और निगरानी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखना जरूरी होगा। ऊर्जा विस्तार और जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलन भारत एक ओर ऊर्जा की बढ़ती मांग पूरी करने और रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और उत्सर्जन तीव्रता कम करने के लक्ष्य भी निर्धारित कर चुका है।

परियोजना के समर्थकों का तर्क है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों के जरिए पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा सकता है। इसके विपरीत, आलोचकों का सवाल है कि नई जीवाश्म ईंधन आधारित परियोजनाएं दीर्घकालिक डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप किस तरह होंगी।

अब इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रबंधन, तकनीकी विकल्पों और स्थानीय समुदायों के हितों से संबंधित प्रावधानों पर नजर रहेगी। अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि प्रस्तावित औद्योगिक विस्तार किस प्रकार आर्थिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करता है।

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