By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: नवीकरणीय ऊर्जा से भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की वृद्धि दर धीमी : यूएनईपी रिपोर्ट
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > ऊर्जा > नवीकरणीय ऊर्जा से भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की वृद्धि दर धीमी : यूएनईपी रिपोर्ट
AI Image
ऊर्जा

नवीकरणीय ऊर्जा से भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की वृद्धि दर धीमी : यूएनईपी रिपोर्ट

Environment Pulse
Last updated: November 5, 2026 8:26 pm
Environment Pulse
Published: November 5, 2026
Share
AI Image
SHARE

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार और ऊर्जा दक्षता में सुधार के चलते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की वृद्धि दर धीमी पड़ रही है। हालांकि कुल उत्सर्जन में अभी भी वृद्धि जारी है, लेकिन सौर और पवन ऊर्जा के बढ़ते योगदान से कोयले पर निर्भरता का प्रभाव कुछ हद तक कम हुआ है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि सूर्यास्त के बाद शाम के समय बिजली की मांग पूरी करना एक बड़ी चुनौती है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : सौर और पवन ऊर्जा का बढ़ता योगदान, शाम के समय बिजली की मांग पूरी करना अब भी बड़ी चुनौती नई दिल्ली/नैरोबी। भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की वृद्धि दर धीमी पड़ रही है। इसकी प्रमुख वजह नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में लगातार हो रहा विस्तार और ऊर्जा दक्षता में सुधार है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल उत्सर्जन का स्तर अभी भी ऊंचा है और इसमें वृद्धि जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार पहले की तुलना में कम हुई है। सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी से बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता के प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल रही है। हालांकि, बिजली व्यवस्था के सामने शाम के समय मांग पूरी करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। दिन में सौर ऊर्जा से पर्याप्त बिजली मिलती है, लेकिन सूर्यास्त के बाद इसका उत्पादन घट जाता है।

ऐसे में घरेलू और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ जाती है। यूएनईपी के विश्लेषण में ऊर्जा भंडारण, मांग प्रबंधन और बिजली उत्पादन व्यवस्था में लचीलापन बढ़ाने को आवश्यक बताया गया है। इसके लिए बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो परियोजनाओं और सौर-पवन ऊर्जा के संयुक्त संयंत्रों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में भारत की प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दर अपेक्षाकृत कम होने और देश की विकास संबंधी जरूरतों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बिजली क्षेत्र का तेजी से कार्बन मुक्त होना जरूरी बताया गया है।

सौर मॉड्यूल और पवन टर्बाइन के घरेलू निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया है। हालांकि, ट्रांसमिशन नेटवर्क की सीमाएं, भूमि अधिग्रहण और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए वित्त की उपलब्धता अब भी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्सर्जन वृद्धि दर में कमी महत्वपूर्ण है, लेकिन दीर्घकाल में वास्तविक उत्सर्जन में कटौती भी जरूरी होगी। इसके लिए परिवहन और उद्योगों का विद्युतीकरण, भवनों में ऊर्जा दक्षता तथा ऊर्जा की खपत का बेहतर प्रबंधन आवश्यक है।

Also Read: दिल्ली की नई ईवी नीति में पेट्रोल दोपहिया वाहनों पर शिकंजे की तैयारी इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल को मिलेगा प्रोत्साहन

You Might Also Like

ऑफशोर विंड एनर्जी: जलवायु बचाने के साथ समुद्री पारिस्थितिकी की सुरक्षा कितनी संभव?
जलवायु परिवर्तन को ‘वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित करने की मांग, 2016 से अब तक गर्मी से करीब 30 लाख मौतें
AI बूम के बीच 2030 तक डेटा सेंटरों की जल खपत 9.3 ट्रिलियन लीटर पहुंचने का अनुमान: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट
How Rural India tries combatting Global Warming
2045 तक भारत पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाए तो 17 लाख से अधिक लोगों की बच सकती है जान: आईसीसीटी रिपोर्ट
TAGGED:Greenhouse Gas EmissionsIndia Climate PolicyRenewable energySolar and Wind EnergyUNEP Report
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट, चार राज्यों में जंगलों में आग – Environment Pulse

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
ऊर्जा

Dance, and You Power the Lights

Environment Pulse
Environment Pulse
October 10, 2026
दुनिया पर मंडराया ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा, फरवरी 2027 तक जारी रह सकता है असर
मैली हुई गोमती, बेरोजगार हुए धोबी: लखनऊ के घाटों पर प्रदूषण की मार
आईआईटी-गुवाहाटी ने पानी से हाइड्रोजन बनाने के लिए सस्ता कैटेलिस्ट विकसित किया
Arab League environment committee focuses on pastures and food security

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?