बेहतर यूरेनियम आपूर्ति से बढ़ेगा भारतीय परमाणु रिएक्टरों की उत्पादन क्षमता
भारत की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी, बढ़ेगी अंतरराष्ट्रीय साख

एनवायरमेंट पल्स डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान अपने समकक्ष आस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ जो ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौता किया है, उससे आने वाले दिनों, खासकर वर्ष 2047 तक (इस वर्ष तक भारत सरकार ने देश में 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य अपने सामने रखा है) भारत का ऊर्जा परिदृश्य पूरी तरह बदल जाने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि आस्ट्रेलिया में दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत यूरेनियम भंडार मौजूद है। वहां से भारत को यूरेनियम की बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित होने पर हमारे परमाणु बिजलीघरों को निर्बाध ईंधन आपूर्ति हो सकेगी, जिससे ऊर्जा उत्पादन के बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा। अभी हमारे परमाणु बिजलीघर पर्याप्त यूरेनियम की आपूर्ति न होने के कारण पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते हैं।
यूरेनियम से उत्पादित विद्युत कार्बन-मुक्त होती है। इससे भारत की कोयले पर निर्भरता कम होगी और ग्लोबल वॉर्मिंग के खिलाफ लड़ाई में हमें अपनी गैर-जीवाश्म ईंधन विद्युत क्षमता को बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
यूरेनियम की विद्युत उत्पादन क्षमता बहुत अधिक होती है। इसकी बहुत कम मात्रा से भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा की जा सकती है। जैसे, सिर्फ कुछ ग्राम यूरेनियम से कई टन कोयले के बराबर ऊर्जा मिलती है। यूरेनियम ईंधन की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित होने से भारत की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। यह व्यापार पूरी तरह से अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की साख और मजबूत होगी।

