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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > मौसम का बड़ा अलार्म: ‘लिविंग मेमोरी’ का सबसे ताकतवर अल नीनो दे सकता है दस्तक
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ईको सिस्टमजल

मौसम का बड़ा अलार्म: ‘लिविंग मेमोरी’ का सबसे ताकतवर अल नीनो दे सकता है दस्तक

Environment Pulse
Last updated: August 25, 2026 8:22 pm
Environment Pulse
Published: August 25, 2026
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ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अल नीनो 2026 में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है और यह 19वीं सदी के बाद का सबसे शक्तिशाली अल नीनो साबित हो सकता है। नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने का अनुमान है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अल नीनो इस साल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) ने चेतावनी दी है कि 2026 का यह अल नीनो आधुनिक दौर के सबसे शक्तिशाली घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है और संभवतः 19वीं सदी के बाद का सबसे बड़ा अल नीनो साबित हो।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।

मेट ऑफिस के अनुसार, उसके नवीनतम पूर्वानुमान मॉडल नीनो 3.4 क्षेत्र में आने वाले महीनों में समुद्री सतह के तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक की असामान्य वृद्धि का संकेत दे रहे हैं।

यह स्तर पिछले बड़े अल नीनो घटनाक्रमों की तुलना में बेहद असाधारण होगा। मेट ऑफिस के प्रमुख लंबी अवधि के पूर्वानुमानकर्ता प्रोफेसर एडम स्कैफ के अनुसार, पूर्वानुमानों में अल नीनो का संकेत अब तक देखे गए स्तरों में सबसे तीव्र है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम तीव्रता को लेकर अभी कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। अल नीनो, एल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) की गर्म अवस्था है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह का तापमान बढ़ने से वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आता है, जिसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के तापमान, बारिश, तूफानों और मानसून पर पड़ सकता है।

मेट ऑफिस के अनुसार, इस घटनाक्रम से भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिणी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना बढ़ सकती है, जबकि दक्षिण अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा हो सकती है।

भारत के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है क्योंकि अल नीनो का असर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून पर पड़ सकता है। मेट ऑफिस के नवीनतम आकलन के मुताबिक, भारत में मानसूनी बारिश पहले से ही सामान्य से काफी नीचे चल रही है और अल नीनो के मजबूत होने के साथ कुछ क्षेत्रों में कम बारिश का जोखिम बढ़ सकता है।

हालांकि, किसी एक मौसम पर अल नीनो के प्रभाव को अन्य जलवायु कारकों से अलग करके देखना उचित नहीं होगा। वैश्विक स्तर पर इसका असर इससे कहीं व्यापक हो सकता है। अल नीनो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है और अटलांटिक क्षेत्र में तूफानों की गतिविधि को दबाने की दिशा में काम कर सकता है।

यूरोप और ब्रिटेन में इसका प्रभाव आमतौर पर अप्रत्यक्ष होता है, लेकिन मेट ऑफिस के अनुसार इस साल शरद ऋतु और शुरुआती सर्दियों में उत्तर-पश्चिमी यूरोप, जिसमें ब्रिटेन भी शामिल है, में अधिक नम, तूफानी और तेज हवाओं वाली परिस्थितियों की संभावना बढ़ सकती है।

इस असाधारण अल नीनो का एक और संभावित प्रभाव वैश्विक तापमान पर पड़ सकता है। बड़े अल नीनो के दौरान महासागर से अधिक गर्मी वायुमंडल में पहुंचती है, जिससे वैश्विक औसत तापमान में अस्थायी वृद्धि होती है।

मेट ऑफिस का अनुमान है कि 2027 में वैश्विक तापमान 2024 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर अब तक का सबसे गर्म वर्ष बन सकता है और औद्योगिक-पूर्व स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान की सीमा को अस्थायी रूप से पार कर सकता है। मेट ऑफिस ने हालांकि जोर दिया है कि अल नीनो की अंतिम तीव्रता और इसके क्षेत्रीय प्रभाव आने वाले महीनों में और स्पष्ट होंगे।

मौसम वैज्ञानिक समुद्र और वायुमंडल से जुड़े आंकड़ों की लगातार निगरानी कर रहे हैं तथा नए पूर्वानुमानों के आधार पर आकलन को अपडेट किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित रिकॉर्ड-स्तरीय घटना को देखते हुए देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को बाढ़, सूखा, अत्यधिक गर्मी और अन्य चरम मौसम संबंधी जोखिमों के लिए समय रहते तैयारी करनी चाहिए।

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