तिब्बत के पठार पर स्थित गुलिया आइस कैप से वैज्ञानिकों ने 1,28,000 साल से भी अधिक पुराना जलवायु रिकॉर्ड खोजा है, जो ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर किसी पर्वतीय हिमखंड से प्राप्त अब तक का सबसे पुराना आइस कोर रिकॉर्ड है। ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के ग्लेशियोलॉजिस्ट लोनी थॉम्पसन के नेतृत्व में ‘साइंस एडवांसेज’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, 310 मीटर लंबे आइस कोर नमूनों का विश्लेषण करने और रेडियोधर्मी समस्थानिकों व भू-चुंबकीय निशानियों का मिलान करने से अंतिम हिमयुग और उसके बाद के पर्यावरणीय बदलावों को समझने का दुर्लभ प्रमाण मिला है। अत्यधिक ऊंचाई और शुष्क जलवायु के कारण सुरक्षित रहे ये प्राचीन रिकॉर्ड पृथ्वी के हिममंडल की दीर्घकालिक स्थिरता और जलवायु इतिहास का अध्ययन करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : वैज्ञानिकों ने तिब्बत के पठार पर स्थित गुलिया आइस कैप से प्राप्त बर्फ में 1,28,000 साल से भी अधिक पुराना जलवायु रिकॉर्ड खोजने की पुष्टि की है।
यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर किसी पर्वतीय हिमखंड से प्राप्त अब तक का सबसे पुराना आइस कोर रिकॉर्ड है। इस खोज से अंतिम हिमयुग और उसके बाद के जलवायु परिवर्तनों को समझने का नया अवसर मिला है। ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के बर्ड पोलर एंड क्लाइमेट रिसर्च सेंटर के ग्लेशियोलॉजिस्ट लोनी थॉम्पसन के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के निष्कर्ष साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने 1992 और 2015 में गुलिया आइस कैप से निकाले गए दो आइस कोर का तुलनात्मक अध्ययन किया। दोनों नमूने लगभग 310 मीटर लंबे थे और उनमें ऑक्सीजन आइसोटोप के पैटर्न लगभग समान मिले। इससे संकेत मिला कि बर्फ में संरक्षित जलवायु संबंधी संकेत लंबे समय बाद भी दोहराए जा सकते हैं और विश्वसनीय हैं।
बर्फ की वास्तविक आयु निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिकों ने बेरिलियम-10 और क्लोरीन-36 जैसे रेडियोधर्मी समस्थानिकों का इस्तेमाल किया। इनके जरिए 41,000 साल से अधिक पुराने लाशांप जियोमैग्नेटिक एक्सकर्शन की रासायनिक निशानियों की पहचान की गई।
उस दौरान पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र अस्थायी रूप से काफी कमजोर हो गया था। इन संकेतों का आसपास की तिब्बती गुफाओं में मिले ऑक्सीजन आइसोटोप रिकॉर्ड से मिलान करने पर शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि आइस कोर की सबसे गहरी परतें 1,28,000 साल से भी पुरानी हैं। थॉम्पसन के अनुसार, ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर पर्वतीय चोटियों से इतनी पुरानी बर्फ का रिकॉर्ड मिलना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पहले पेरू के हुआस्कारान जैसे ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों से मिले आइस कोर लगभग 30,000 साल पुराने रिकॉर्ड तक ही पहुंच पाए थे।
गुलिया पठार की अत्यधिक ऊंचाई और शुष्क जलवायु ने इस प्राचीन बर्फ को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई। इन हिमखंडों में तापमान, वर्षा और वायुमंडलीय बदलावों से जुड़े रासायनिक तथा समस्थानिक संकेत संरक्षित हैं। ये आंकड़े एक पूर्ण हिमयुग और उसके बीच के गर्म अंतराल के जलवायु चक्र को समझने में मदद कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज तिब्बती क्षेत्र के जलवायु इतिहास को काफी पीछे तक ले जाती है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करती है कि कुछ पर्वतीय ग्लेशियर अत्यधिक जलवायु बदलावों के बावजूद प्राचीन पर्यावरणीय अभिलेखों को संरक्षित रख सकते हैं। यह रिकॉर्ड पृथ्वी के हिममंडल की दीर्घकालिक स्थिरता और हिमयुग के दौरान हुए बदलावों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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