भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए छोटे डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करने की एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अक्टूबर 2026 में घोषित इन शोध परियोजनाओं का नेतृत्व संस्थान का ‘सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई’ (CeRAI) और बोधन एआई केंद्र कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कम बिजली और संसाधनों में बेहतर एआई सेवाएं प्रदान करना है, जिससे कृषि, स्वास्थ्य, विनिर्माण और शिक्षा (जैसे देश के 25 करोड़ स्कूली विद्यार्थियों के लिए व्यक्तिगत एआई शिक्षण सहायक) जैसे क्षेत्रों को लाभ मिल सके। शोधकर्ता ऊर्जा की खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए जीपीयू संचालन को ग्रिड के दबाव व बिजली कीमतों के अनुकूल बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और प्रभावी शीतलन प्रणालियों पर काम कर रहे हैं, जो बड़े डेटा सेंटरों की तुलना में पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी विकास के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करता है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए छोटे डेटा सेंटरों की ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करने की पहल की है। इसका उद्देश्य भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो कम बिजली और संसाधनों में बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा सके। अक्टूबर 2026 में एआई मापन एवं शासन से संबंधित एक औद्योगिक सम्मेलन के दौरान घोषित इन शोध परियोजनाओं का नेतृत्व संस्थान का सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई (CeRAI) और संबंधित उत्कृष्टता केंद्र कर रहे हैं।
आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने छोटे और वितरित डेटा सेंटरों की संभावनाओं पर जोर दिया। ऐसे केंद्रों को कम लागत वाली इंजीनियरिंग तकनीकों के जरिए विकसित किया जा सकता है। इनका उपयोग कृषि, अंतरिक्ष, विनिर्माण, स्वास्थ्य और कानून जैसे क्षेत्रों में एआई सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है। संस्थान में स्थापित और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से वित्तपोषित बोधन एआई केंद्र किफायती डेटा सेंटरों पर शोध कर रहा है।
इसका एक प्रमुख उद्देश्य देश के लगभग 25 करोड़ स्कूली विद्यार्थियों के लिए व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप एआई आधारित शिक्षण सहायक विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन करना है। शोधकर्ता ऐसे एआई मॉडल पर काम कर रहे हैं, जिनमें ऊर्जा की खपत कम हो और पर्यावरण पर दबाव न्यूनतम रहे। इसके लिए ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) के संचालन को बिजली की कीमतों तथा बिजली ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव के अनुसार व्यवस्थित करने, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और शीतलन प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
वर्तमान में बड़े डेटा सेंटर एआई मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी बिजली और पानी की जरूरतें पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा और पानी की आवश्यकता पड़ सकती है। आईआईटी मद्रास की यह पहल तकनीकी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
छोटे, स्थानीय और ऊर्जा-कुशल डेटा सेंटरों की व्यवहार्यता का अध्ययन भारत में एआई सेवाओं के विस्तार के लिए नए रास्ते खोल सकता है। इससे डिजिटल तकनीक की पहुंच बढ़ाने के साथ ऊर्जा संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
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