
देश भर के केवल 20 नगर निगम ही जुटा पाए हैं पूंजी बाजार से पैसा
नगर निगमों की आय नहीं बढ़ी तो मुश्किल होगा नागरिक सुविधाओं को पूरा कर पाना
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
भारतीय शहरों को जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने और अपने विकास के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 2050 तक लगभग 2.4 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी। लेकिन अब तक इस राशि में से केवल 476 मिलियन डॉलर ही जुट सके हैं, जो बेहद छोटा हिस्सा है। यह जानकारी फिक्की और ईवाई द्वारा जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के केवल 20 नगर निगम ही अब तक पूंजी बाजारों से पैसा जुटा पाए हैं। इन सभी ने मिलकर लगभग 476 मिलियन डॉलर एकत्र किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के शहरी क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा देते हैं। इनमें देश की लगभग एक-तिहाई आबादी रहती है। लेकिन नगर निगमों की कुल आय देश के GDP के सिर्फ 0.6 प्रतिशत के बराबर है। अगले 15 साल में शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 840 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 55 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2047 तक आवश्यक बुनियादी ढांचे का लगभग 70 प्रतिशत भाग अभी बनाना बाकी है। भारत में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि 2036 तक शहरी आबादी लगभग 60 करोड़ हो जाएगी और इसका योगदान GDP में 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। 2050 तक शहरी आबादी बढ़कर 87.7 करोड़ हो जाएगी और इसका योगदान GDP में 75 प्रतिशत हो जाएगा। भारतीय शहरों को निवेश योग्य बनाने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शहरों को नागरिक सेवाएं देने वाले इकाइयों के बजाय आर्थिक विकास के केंद्र बनाना होगा। केंद्र सरकार के 1 लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड के बारे में रिपोर्ट ने कहा कि यह शहरी निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के तहत शहरी निकायों को प्रत्येक परियोजना के आधे हिस्से का निवेश पूंजी बाजार से जुटाना होगा। इससे लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश को गति मिल सकती है।
रिपोर्ट ने छह मुख्य बदलावों की आवश्यकता बताई। इसमें शहरों को आर्थिक नेतृत्वकर्ता बनाना, नेटवर्क आधारित विकास के मॉडल को अपनाना, निवेश योग्य शहर बनाना, आर्थिक प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देना, डेटा को रणनीतिक संसाधन के रूप में इस्तेमाल करना और जलवायु-सक्षम शहर बनाना शामिल है। फिक्की शहरी विकास समिति के चेयरमैन राज मेंडा का कहना है कि भारत के शहरों को आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी और निवेश योग्य बनाना होगा। उनके मुताबिक, मजबूत प्रशासन, नए वित्तीय मॉडल और एकीकृत शहरी नियोजन के जरिए ही भारत 2047 तक विकसित बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बीच भारत के शहरों को अब पारंपरिक विकास मॉडल से आगे बढ़कर हरित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर मॉडल अपनाने की जरूरत है।

