
जलवायु परिवर्तन की तकलीफों को बेहद सधी भाषा में सामने लाती हैं इंगा
जल, जंगल, जमीन के कई रंग दिखते हैं इस संग्रह की जीवंत कहानियों में
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
प्रकृति और इंसान के रिश्ते पर इतनी दिल छू लेने वाली किताबें कम ही मिलती हैं। ऑस्ट्रेलियाई लेखिका इंगा सिम्पसन का नया कहानी-संग्रह ‘Once We Were Wildlife: stories’ यही एहसास बार-बार दिलाता है कि मनुष्य और प्रकृति का जुड़ाव सिर्फ साथ रहने भर का नहीं, बल्कि एक साझा जीवन-चक्र जैसा कुछ है। इसमें 12 कहानियां और एक कविता हैं, जो पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और इंसानी जज्बातों को ऐसे जोड़ती हैं कि दोनों के बीच की सारी दीवारें जैसे गायब हो जाती हैं।
इंगा सिम्पसन के बारे में लोग मानते हैं कि वे समकालीन ऑस्ट्रेलियाई इको-लिटरेचर की सबसे खास आवाज़ों में हैं। उनके पिछले उपन्यासों की तरह, इस संग्रह में भी प्रकृति बस सीनरी नहीं बनती—वो एक दमदार किरदार की तरह सामने आती है। आप अगर जंगल, समुद्र, पेड़-पौधे, पक्षी या जानवरों को पढ़ें, हर जगह उनकी अपनी-अपनी भावनाएं और मौजूदगी साफ महसूस होती है।
कई कहानियाँ दिखाती हैं कि आदमी अपने भीतर के अकेलेपन, प्यार, डर या खुद को खोजने की बहुत हिम्मत भरी यात्रा में भी आखिर प्रकृति का सहारा लेता है। ‘ब्लू क्रेन’ में एक औरत और समुद्र किनारे रहने वाले बगुले का रिश्ता बड़े गहरे और नए स्तर तक पहुँचता है—जैसे बगुले को रोज़ आते-जाते देखना उसे इस कदर सुकून देने लगता है, कि वो खुद उड़ने का सपना देखने लगती है।
‘द वॉश’ कहानी समुद्र की अचानक आकर डराने वाली ताकत दिखाती है, जब एक औरत लगभग डूब ही जाती है। ‘सी-वुल्फ’ में समुद्री जीवों पर रिसर्च करने वाली औरत कब खुद को उनके बीच का हिस्सा मानने लगती है, उसे भी नहीं पता चलता।
लेकिन ‘आउट ऑफ द फॉरेस्ट’ शायद सबसे हटकर है—इसमें कहानी एक पेड़ की जुबानी है। जंगल में होते बदलाव, आग, कीट, जानवर, और आखिरकार इंसानों की वजह से जो तबाही आती है, उस सबका वो गवाह बनता है। आखिर दिखता है कि जंगल या प्रकृति लगातार जूझती रहती है, मगर अब मौसम का बदलना और इंसानी दखल उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है।
इंगा सिम्पसन जलवायु परिवर्तन की तकलीफ को बहुत सधी और सच्ची भाषा में रखती हैं। जंगल सिमट रहे हैं, बर्फबारी कम हो रही है, पौधे सूख रहे हैं, और लोग भी कहीं-न-कहीं प्रकृति में अपने दुख का इलाज खोज रहे हैं। ये हर किस्सा सोचने पर मजबूर कर देता है कि पर्यावरण का संकट सिर्फ पेड़ों या जानवरों का मसला नहीं, ये तो हमारे वजूद का ही सवाल है।
संग्रह की टाइटल स्टोरी ‘Once We Were Wildlife’ दो औरतों की लव स्टोरी है, जो उत्तर ऑस्ट्रेलिया की ट्रैकिंग के दौरान शुरू होती है। ट्रेकिंग के साथ-साथ उनका रिश्ता भी गहराता है, पर निजी उलझनें और सामाजिक झिझकें आखिर उन्हें अलग कर जाती हैं। यहाँ भी प्रकृति के बिना रिश्ता जैसे पूरा ही नहीं होता; वो एक एक्टिव ताकत है, बस बैकग्राउंड नहीं।
‘पोच्ड’ संग्रह की सबसे असरदार कहानियों में एक है। इसमें एक पीटीएसडी (PTSD) झेल रहा पूर्व सैनिक भारत आता है, बंगाल टाइगर को बचाने के मिशन में जुड़ता है, और आखिर बाघिन को बचाते हुए जान दे देता है। उसकी मौत के बाद उसकी देह मिट्टी में मिल जाती है, जैसे वह खुद भी जंगल का हिस्सा हो गया हो। ये कहानी बहादुरी, करुणा और प्रकृति से घुल मिल जाने की बात सबसे अलग तरह से कह जाती है।
इंगा सिम्पसन की सबसे खूबसूरत बात यही है कि उनके लिए इंसान और प्रकृति के बीच कोई मोटी लाइन नहीं है। उनके किरदार भी जीवंत हैं, और जंगल, समुद्र, पेड़, पक्षी भी। शायद इसलिए उनकी कहानियाँ सिर्फ पढ़ने का अनुभव नहीं देतीं-वो हमारे भीतर प्रकृति के लिए संवेदनशीलता और खुद को टटोलने का मौका भी खोल देती हैं।
‘Once We Were Wildlife’ बस कहानी-संग्रह नहीं, एक याद दिलाने वाला आईना है कि इंसान प्रकृति से खुद को कितना भी अलग समझे, वो सचमुच में कभी अलग रहा ही नहीं। हमारा हर एहसास—प्यार, दुख, याद, जीवन—सब आखिरकार उसी संसार में लौट जाते हैं। यही बात इसे आज के वक्त की सबसे ज़रूरी और असरदार किताबों में खड़ा करती है।
(Photo courtesy: AI)

