सिंगापुर सरकार जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और समुद्री दीवारों व बुनियादी ढांचे पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर आवासीय और शहरी विकास के लिए माजू सहित कई प्राकृतिक जंगलों की कटाई को लेकर पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का तर्क है कि मौजूदा जंगल प्राकृतिक रूप से तापमान नियंत्रण और बाढ़ रोकने में मदद करते हैं, इसलिए नए पेड़ लगाने के बजाय पुराने जंगलों का संरक्षण करना भी जलवायु सुरक्षा का एक अहम हिस्सा होना चाहिए।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए सिंगापुर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन दूसरी ओर आवासीय और शहरी विकास के लिए जंगलों की कटाई को लेकर पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा जंगलों का संरक्षण स्वयं जलवायु अनुकूलन की एक महत्वपूर्ण रणनीति हो सकता है।
सिंगापुर इस समय अपनी पहली राष्ट्रीय जलवायु अनुकूलन योजना तैयार कर रहा है। बढ़ते तापमान, अत्यधिक बारिश, बाढ़ और समुद्र के बढ़ते स्तर जैसे खतरों से निपटना इस योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
सरकार ने 2026 को ‘जलवायु अनुकूलन वर्ष’ घोषित किया है और वर्ष 2027 में राष्ट्रीय योजना जारी करने की तैयारी है। इसी बीच मध्य सिंगापुर में स्थित 23 हेक्टेयर के माजू फॉरेस्ट को आवासीय विकास के लिए इस्तेमाल करने की योजना ने सार्वजनिक विरोध को जन्म दिया है।
अगस्त में आयोजित एक रैली में 2,000 से अधिक लोगों ने जंगलों के संरक्षण की मांग की। पर्यावरण समूहों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए तैयार की जाने वाली पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्टों में जंगलों के तापमान नियंत्रण, बाढ़ रोकने, वायु गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े लाभों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।
सरकार ने माजू और गिलमैन बैरक्स में आवासीय विकास आगे बढ़ाने का फैसला किया है, हालांकि सार्वजनिक सुझावों के बाद पहले की योजना की तुलना में अधिक वन क्षेत्र बचाने की बात कही गई है।
सिंगापुर में सेम्बावांग, वुडलैंड्स और तेंगाह सहित कई अन्य द्वितीयक वन भी विकास के दबाव में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों की कटाई से शहरी तापमान बढ़ सकता है और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी के शहरी जलवायु विशेषज्ञ विंस्टन चाउ के मुताबिक वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि माजू जैसे जंगलों को हटाने से गर्मी और बाढ़ का जोखिम बढ़ने के साथ वायु गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
सिंगापुर ने जलवायु अनुकूलन के लिए इस सदी में करीब 100 अरब सिंगापुर डॉलर खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है। अगले दशक में समुद्री दीवारों जैसी संरचनात्मक सुरक्षा पर करीब 10 अरब सिंगापुर डॉलर खर्च करने की योजना है। इसके अलावा 2025 में सरकार ने गर्मी से निपटने के लिए एक विशेष कार्यालय बनाया और संवेदनशील आबादी पर अत्यधिक गर्मी के प्रभावों के अध्ययन के लिए 4 करोड़ सिंगापुर डॉलर की पहल शुरू की।
पर्यावरणविदों का तर्क है कि जंगलों को भी समुद्री दीवारों, जल निकासी प्रणालियों और आधुनिक शीतलन तकनीकों की तरह जलवायु सुरक्षा ढांचे का हिस्सा माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि आवास की जरूरतों को पूरा करने के लिए जंगलों की जगह अन्य विकल्पों, जैसे गोल्फ कोर्स और बड़े निजी आवासीय क्षेत्रों, पर भी विचार किया जाना चाहिए। सिंगापुर के कुल भू-क्षेत्र का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा द्वितीयक जंगलों से ढका है।
ये जंगल उन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से दोबारा विकसित हुए हैं जहां पहले गांव, बागान और अन्य मानवीय गतिविधियां थीं। हालांकि संरक्षणवादियों का कहना है कि केवल नए पेड़ लगाना पुराने और विकसित जंगलों की पारिस्थितिक सेवाओं की भरपाई नहीं कर सकता।
सरकार के ‘OneMillionTrees’ अभियान के तहत 2030 तक देशभर में 10 लाख अतिरिक्त पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय उद्यान बोर्ड के अनुसार 2020 से अब तक 8.87 लाख से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि नए पौधों और परिपक्व जंगलों के बीच पारिस्थितिक और जलवायु संबंधी क्षमताओं में बड़ा अंतर होता है। सिंगापुर खुद को ‘City in Nature’ के रूप में पेश करता है और सरकार के अनुसार द्वीप का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र है।
हालांकि संरक्षणवादियों का कहना है कि इस आंकड़े में पार्क, छतों पर बने उद्यान और अन्य प्रबंधित हरित क्षेत्र भी शामिल हैं, जो प्राकृतिक जंगलों की तरह तापमान कम करने और वर्षाजल को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होते। विशेषज्ञों के मुताबिक सिंगापुर के सामने चुनौती केवल नए हरित क्षेत्र तैयार करने की नहीं, बल्कि मौजूदा प्राकृतिक जंगलों को बचाने की भी है। उनका मानना है कि यदि शहर को वास्तव में जलवायु-लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाना है, तो आर्थिक विकास और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना होगा।
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