By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में 2025 में गैंडे के शिकार की घटनाएं शून्य, आवास संरक्षण अब बड़ी चुनौती
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जंगल > भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में 2025 में गैंडे के शिकार की घटनाएं शून्य, आवास संरक्षण अब बड़ी चुनौती
AI Image
जंगल

भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में 2025 में गैंडे के शिकार की घटनाएं शून्य, आवास संरक्षण अब बड़ी चुनौती

Environment Pulse
Last updated: September 22, 2026 9:42 pm
Environment Pulse
Published: September 22, 2026
Share
AI Image
SHARE

इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन (IRF) की ‘स्टेट ऑफ द राइनोज 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में गैंडों के शिकार की एक भी घटना दर्ज नहीं की गई है, जो एशियाई गैंडों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और नेपाल में पाए जाने वाले ‘ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो’ की वैश्विक आबादी बढ़कर लगभग 4,075 हो गई है, जिसमें अकेले भारत में इनकी संख्या 3,223 से 3,323 के बीच है और इसका लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा असम (विशेषकर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) में मौजूद है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में वर्ष 2025 के दौरान गैंडों के शिकार की कोई ज्ञात घटना दर्ज नहीं हुई। इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन (IRF) की ‘स्टेट ऑफ द राइनोज 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई गैंडों के संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि गैंडों के प्राकृतिक आवास में गिरावट अब भी उनके दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत और नेपाल में पाए जाने वाले ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो की वैश्विक आबादी करीब 4,075 हो गई है, जो 2022 में लगभग 4,014 थी।

भारत में इस प्रजाति के करीब 3,223 से 3,323 गैंडे हैं। इनमें लगभग 80 प्रतिशत आबादी असम में पाई जाती है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान इस प्रजाति का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां 2,600 से अधिक गैंडे मौजूद हैं। असम में 2025 में गैंडों के शिकार की कोई ज्ञात घटना सामने नहीं आई।

1970 के दशक के बाद यह राज्य में दूसरी ऐसी घटना-रहित अवधि है। इससे पहले 2022 में भी शिकार की कोई घटना दर्ज नहीं हुई थी। मानस राष्ट्रीय उद्यान में भी लगातार तीन वर्षों से गैंडे और बाघ के शिकार की कोई घटना सामने नहीं आई है। नेपाल में ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो की अनुमानित आबादी 752 है, जिसमें अधिकांश गैंडे चितवन राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं।

वर्ष 2021 से 2024 के बीच चार शिकार घटनाओं के बाद 2025 में नेपाल में भी कोई गैंडा शिकार दर्ज नहीं हुआ। 2011 के बाद नेपाल दस बार गैंडों के शून्य शिकार का वर्ष दर्ज कर चुका है। इंडोनेशिया में भी 2025 में बचे हुए सुमात्रन और जावन गैंडों के शिकार की कोई ज्ञात घटना दर्ज नहीं हुई। देश में सुमात्रन गैंडों की संख्या करीब 50 और जावन गैंडों की संख्या 34 से 47 के बीच अनुमानित है। संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि के पीछे बेहतर खुफिया तंत्र, समन्वित कार्रवाई, निगरानी व्यवस्था, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सक्रिय रोकथाम जैसे उपायों की अहम भूमिका रही है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने विश्व गैंडा दिवस 2026 के अवसर पर राज्य को ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो का वैश्विक गढ़ बताया। हालांकि, शिकार पर नियंत्रण के बावजूद गैंडों के आवास से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आक्रामक वनस्पतियों का प्रसार, घास के मैदानों का सिकुड़ना, आवासों का क्षरण और पर्याप्त घासभूमि एवं आर्द्रभूमि की उपलब्धता की जरूरत प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।

ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो अभी भी IUCN की रेड लिस्ट में Vulnerable (असुरक्षित) श्रेणी में है। संरक्षण विशेषज्ञों के मुताबिक शून्य शिकार की उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन गैंडों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आवास प्रबंधन, लगातार निगरानी, शिकार-रोधी कार्रवाई और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को जारी रखना जरूरी होगा।

Also Read: कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक में सियासी घमासान, पश्चिमी घाट को लेकर विधानसभा के विशेष सत्र में चर्चा

You Might Also Like

जंगलों की आग रोकने में अहम भूमिका निभाने वाले स्पेन के जंगली घोड़े खुद संकट में
180 साल बाद फिर मिली असम की दुर्लभ वनस्पति Rungia mastersii
India’s efforts towards tiger conservation are praiseworthy at the international level
आसियान की पहली जलवायु अनुकूलन गाइड जारी, जंगलों के नाम पर गलत उपायों से आग और धुंध का खतरा
गंगा का कहर: जब जीवनदायिनी नदी बन जाती है तबाही की वजह
TAGGED:Asian Rhinos ConservationAssam Wildlife ProtectionGreater One-Horned RhinosInternational Rhino FoundationKaziranga National ParkZero Poaching Success 2025
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: गर्मी की बढ़ती मार के बीच हिमाचल में पारंपरिक काठ-कुणी वास्तुकला की वापसी – Environment Pulse

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
कचरा-प्रबंधन

कश्मीर के पंपोर में लैंडफिल से केसर की खेती पर संकट, चूहों के प्रकोप और जहरीले रिसाव से किसान परेशान

Environment Pulse
Environment Pulse
October 10, 2026
मानसून ने बदली कश्मीर की तस्वीर
The Issue of Climate Justice via Nepal: India is a Polluter but Not Irresponsible
The SDG Journey of India: Real Progress, Real Shortcomings
जलवायु परिवर्तन से कमजोर हो रही महासागरों की कार्बन सोखने की क्षमता, संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?