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Environment Pulse > Blog > अंडों  के केज-फ्री सिस्टम पर बहस जारी
(फोटो सौजन्य-एआई)
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अंडों  के केज-फ्री सिस्टम पर बहस जारी

Environment Pulse
Last updated: August 5, 2026 9:30 pm
Environment Pulse
Published: August 5, 2026
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(फोटो सौजन्य-एआई)
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पशु कल्याण, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा-तीनों पर समवेत रूप से ध्यान देने की ज़रूरत

पूरी तरह केज-फ्री, फ्री-रेंज तरीकों से उत्पादन पर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन अधिक

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

एक शोध के अनुसार 50 सालों में अण्डों का उत्पादन चार गुना ज़्यादा बढ़ा है। अगर ये सुखद खबर है तो इसका एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। पहले ये माना जा रहा था कि केज-फ्री और फ्री-रेंज अंडे सेहत और पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं पर अब वैज्ञानिक कुछ और बता रहे हैं।

एक रिसर्च सामने आया है यूनाइटेड किंगडम से। परंपरागत केज सिस्टम, बार्न सिस्टम, फ्री-रेंज और ऑर्गेनिक फार्मिंग जैसे अंडा-उत्पादन के अलग-अलग मॉडल की तुलना की गई। जानकारी है कि सभी तरीकों में अंडों की संख्या बराबर रखी गई, ताकि नतीजे सटीक रहें।

इसमें यह पता चला की अगर अंडा उत्पादन पूरी तरह केज-फ्री, फ्री-रेंज या ऑर्गेनिक तरीकों से किया जाए, तो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करीब 60% तक बढ़ सकता है।

इस पर विस्तार से बात करते हुए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की सीनियर रिसर्चर, डॉ. हैरियट बार्टलेट ने कहा  पशु कल्याण, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा—तीनों पर  ध्यान देने की ज़रुरत है। इन सब का संतुलन समझना ज़रूरी है।

लीड ऑथर, ओलिवर मार्टिनिक ने भी दुनियाभर में केज सिस्टम को खत्म करने की मांग तो ठीक है, मगर बिना पूरी तस्वीर समझे बड़ा बदलाव किया तो आगे चलकर दिक्कतें हो सकती हैं।

आंकड़े बताते हैं कि  दुनिया की पूरी फूड लाइफ का करीब 26% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। खाना उत्पादन के चलते जलस्रोत से  पोषक तत्व की 78% कमी और मिट्टी के अम्लीकरण की 32% समस्या उजागर हो रही है। चार गुना बढ़ा भले ही हो अंडा उद्योग पर उसका पर्यावरण पर उतना ही गहरा असर पढ़ा है।

इसके अलावा  फ्री-रेंज और ऑर्गेनिक सिस्टम में मुर्गियों की मृत्यु  अपेक्षाकृत रही। रिसर्चर्स का मानना है कि ये डाटा वर्ष 2009-10 का है और तब से फार्मिंग तकनीकों में सुधार हुए हैं। पर फिर भी आंकड़े अब भी यूके के लेयर हेन उत्पादन सिस्टम का मज़बूत आधार हैं।

कुल मिलाकर केज-फ्री अंडे के पीछे की सच्चाई अलग है।  जानवरों के जीवन, पर्यावरण और फूड सिस्टम—तीनों के बीच बैलेंस बनाना असली चुनौती है।

Also Read: क्या आप में पर्यावरण सम्बन्धी स्टार्टअप चलाने का जूनून है ?

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