सौर व पवन ऊर्जा, ईवी, जैविक खेती, प्लास्टिक, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में शुरू हो रहे स्टार्टअप्स
सरकार दे रही भरपूर सहयोग, इस फील्ड में नए निवेशक आ रहे आगे
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
भारत में विगत कुछ वर्षों में हर क्षेत्र में स्टार्टअप्स का चलन बढ़ा है। ऐसे में स्वाभाविक है कि पर्यावरण सम्बन्धी स्टार्टअप्स भी होंगे। पर्यावरण संरक्षण में अब नवाचार के ज़रिये तमाम शोध और तरह-तरह के नए प्रयोग किये जा रहे हैं। यह उद्यमिता का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। अलग-अलग चुनौतियां, जैसे- जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसी चीजें आजकल युवाओं को पर्यावरण आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
पर्यावरण स्टार्टअप्स ऐसे उद्यम हैं, जो तकनीक और नवाचार के माध्यम से पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं। नए दौर के स्टार्टअप्स सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, जैविक खेती, प्लास्टिक के विकल्प, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) जैसे क्षेत्रों में सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। अब ये केवल लाभ कमाने का काम नहीं, विकास और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का जरिया भी हैं।
स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई ठोस कदम उठायी है। खास करके स्टार्टअप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान आदि पर्यावरण-अनुकूल उद्यमों को प्रोत्साहन दे रही हैं। इसमें हाथ बटाने का काम निजी निवेशक और वेंचर कैपिटल फंड भी कर रहे हैं, जिसके फलस्वरुप युवा उद्यमियों को अपने नवाचारों को व्यावसायिक रूप देने का अवसर मिल रहा है।
नए स्टार्टअप्स के आने से रोज़गार सृजन भी होता है। इससे ग्राम और शहर सब जगहों के लोगों को नए अवसर मिलते हैं। इनके निरंतर प्रयासों की वजह से पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कई स्टार्टअप घर-घर से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्र कर उसका पुनर्चक्रण कर रहे हैं। कुछ कंपनियां कृषि अपशिष्ट से जैव ईंधन और उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं।
इस क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है। इसके साथ नए तकनीकों के लागू होने के लिए राजस्व की भी बहुत जरूरत होती है। साथ ही ऊंची लागत, बाजार में प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं में जागरूकता के बारे में जानकारी ज़रूरी है। अच्छी बात यह है कि बढ़ती पर्यावरणीय चेतना और सरकारी सहयोग के कारण इस क्षेत्र की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। भारत की पर्यावरण स्टार्टअप संस्कृति आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में कदम से कदम बढ़ाकर चल रही है। अगर आप में पर्यावरण स्टार्टअप्स शुरू करने का जुनून है, तो उसके लिए यही उचित समय है।
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