अंटार्कटिका की बर्फ से लेकर अमेज़न के जंगलों तक, आधे से अधिक जलवायु मापदंडों का सटीक आकलन सिर्फ अंतरिक्ष से संभव।
आधुनिक वेदर फोरकास्टिंग में 75% योगदान; सेंटिनल, क्रायोसेट और ग्रेस जैसे मिशनों से मिल रहा महत्वपूर्ण डेटा।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
अंतरिक्ष में तैरते हुए सैटेलाइट्स हमारी पृथ्वी से काफी ऊंचाई पर स्थित होकर पर्यावरण के हर बदलते मिजाज पर पैनी नजर रख रहे हैं। सैटेलाइट्स का यह बढ़ता हुआ समूह चुपचाप वह काम कर रहा है, जो दुनिया का कोई भी ज़मीनी स्टेशन (Ground Station) अकेले कभी नहीं कर सकता था। चाहे अंटार्कटिका के बर्फीले इलाके हों या अमेज़न के गहरे जंगल, आज के दौर में जलवायु परिवर्तन पर नज़र रखने में सैटेलाइट्स सबसे शक्तिशाली माध्यम बन चुके हैं।
उन्नत तकनीक और सेंसर से लैस सैटेलाइट्स
वैज्ञानिकों के अनुसार, पर्यावरण और जलवायु पर नज़र रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘ज़रूरी क्लाइमेट वेरिएबल्स’ (Essential Climate Variables) में से आधे से ज़्यादा मापदंडों को भरोसेमंद तरीके से सिर्फ़ अंतरिक्ष से ही मापा जा सकता है। ये केवल साधारण टूल नहीं हैं, बल्कि इनमें कई तरह के उन्नत इंस्ट्रूमेंट्स लगे होते हैं—जैसे ऑप्टिकल और थर्मल सेंसर, रडार (Radar) और लिडार (Lidar)।
लैंडसैट (Landsat): यह सैटेलाइट मिशन 1970 के दशक से ज़मीन के इस्तेमाल और उसमें हो रहे बदलावों पर लगातार नज़र रख रहा है।
सेंटिनल-2 (Sentinel-2): यूरोप का यह सैटेलाइट जंगलों की गैर-कानूनी कटाई और पेड़-पौधों पर पड़ने वाले तनाव (Vegetation Stress) को रियल-टाइम में ट्रैक करता है। इसके जरिए फ़सलों में सूखे के शुरुआती संकेतों को समय रहते पकड़ लिया जाता है, जिसका पता ज़मीन से लगाने में काफी लंबा समय लग सकता था।
ध्रुवों पर बर्फ पिघलने और समुद्र के जलस्तर की निगरानी
जलवायु परिवर्तन के सबसे स्पष्ट और पुख्ता सबूत पृथ्वी के ध्रुवों (Poles) से मिलते हैं।
ICESat-2 और CryoSat-2: ये विशेष मिशन बर्फ की चादर (Ice-sheet) की ऊंचाई को सेंटीमीटर के स्तर तक सटीकता से माप सकते हैं।
GRACE और ग्रेविटी-सेंसिंग सैटेलाइट्स: जब इस डेटा को GRACE और उसके बाद के सैटेलाइट्स के गुरुत्वाकर्षण डेटा के साथ मिलाया जाता है, तो यह बात प्रमाणित होती है कि ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका से हर साल अरबों टन बर्फ पिघलकर गायब हो रही है। इसी के परिणामस्वरूप समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, जिसकी निगरानी भी ऑर्बिट (कक्षा) से की जा रही है।
समुद्र, वायुमंडल और मौसम की भविष्यवाणी में योगदान
समुद्र और वायुमंडल के अध्ययन में भी सैटेलाइट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
ओशन ब्लूम्स (Ocean Blooms): ये समुद्री खाद्य श्रृंखला (Ocean Food Chain) के आधार बनने वाले ओशन ब्लूम्स की निगरानी करते हैं।
ग्रीनहाउस गैसें: ये वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर इतनी बारीकी से नज़र रखते हैं कि उनके मूल स्रोत का पता लगाया जा सकता है।
मौसम की भविष्यवाणी: आधुनिक मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting) की सटीकता में सैटेलाइट्स का योगदान लगभग तीन-चौथाई (75%) है। तूफ़ान या किसी प्राकृतिक आपदा के समय यह शुरुआती चेतावनी (Early Warning) लोगों की सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी साबित होती है।

