केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जारी किए आंकड़े; 2015 से 2025 के बीच दर्ज की गई ऐतिहासिक बढ़ोतरी।
2020 में PM मोदी द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट से शेरों का दायरा 30,000 से बढ़कर 35,000 वर्ग किलोमीटर पहुंचा।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
इस ‘वर्ल्ड लायन डे’ (World Lion Day) पर भारत के वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र से एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि भारत में एशियाई शेरों (Asiatic Lions) की आबादी वर्ष 2015 में 523 से बढ़कर वर्ष 2025 में 891 हो गई है। यह एक दशक में दर्ज की गई लगातार और ऐतिहासिक वृद्धि है, जो वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों के भगीरथ प्रयासों का परिणाम है।
सरकार का संकल्प और स्थानीय समुदायों की भूमिका
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि को भारत के संरक्षण प्रयासों के लिए अत्यंत गर्व का क्षण बताया। उन्होंने सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि एशियाई शेरों की दहाड़ आने वाली पीढ़ियों तक गुजरात के जंगलों में गूंजती रहेगी। इसी क्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि आवास संरक्षण (Habitat Conservation), मजबूत संरक्षण कार्यक्रमों और सह-अस्तित्व की बढ़ती संस्कृति के बल पर यह संभव हुआ है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकास और वन्यजीव संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
‘प्रोजेक्ट लायन’ की सफलता और बढ़ता दायरा
इस शानदार प्रगति का एक बड़ा श्रेय ‘प्रोजेक्ट लायन’ को जाता है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को एशियाई शेरों के दीर्घकालिक भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया था। प्रोजेक्ट लायन के प्रभाव से शेरों का दायरा वर्ष 2020 में लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर आज लगभग 35,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है। यह प्रोजेक्ट केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बेहतर प्राकृतिक आवास, बीमारियों की निगरानी व पशु चिकित्सा, आबादी की वैज्ञानिक ट्रैकिंग (Scientific Tracking), और तकनीक-आधारित आधुनिक उपकरणों का प्रयोग शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह सुनिश्चित करना रहा है कि शेरों के साथ रहने वाले स्थानीय समुदायों को इस संरक्षण का सीधा फायदा मिले।

