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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जमीन > बदलती जलवायु में खाना उगाने का सबसे अच्छा तरीका कौन सा है?
Photo- AI
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बदलती जलवायु में खाना उगाने का सबसे अच्छा तरीका कौन सा है?

Environment Pulse
Last updated: August 13, 2026 8:05 pm
Environment Pulse
Published: August 13, 2026
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Photo- AI
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खाद्य उत्पादन के लिए खुले खेत, ग्रीनहाउस और वर्टिकल फार्मिंग ये तीनों प्रणालियां अलग-अलग पैमानों और पर्यावरण नियंत्रण के स्तर पर काम करती हैं। गेहूं, आलू और सरसों जैसी मुख्य फसलों के लिए विशाल भूमि और मुफ्त प्राकृतिक संसाधनों (धूप, बारिश) का उपयोग करते हैं, लेकिन वे सूखे और अप्रत्याशित मौसम के आगे सबसे अधिक असुरक्षित हैं।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। जब भी ब्रिटेन में खेती की बात होती है, तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में गेहूं, आलू या सब्जियों से भरे खेत उभरते हैं, जो दूर-दूर तक फैली ग्रामीण भूमि पर लहलहाते हैं। लेकिन सुपरमार्केट की अलमारियों में रखा कुछ खाना ऐसी जगहों पर उगाया जाता है, जो देखने में बिल्कुल अलग हैं।

एक टमाटर का पूरा जीवन किसी ग्लासहाउस के भीतर बीत सकता है, जहां वह 20 मीटर से भी ऊंचा बढ़ता है और उसकी जड़ों तक सीधे पानी व पोषक तत्व पहुंचाए जाते हैं।

  • वहीं एक लेट्यूस किसी इमारत के भीतर, शेल्फ पर एलईडी रोशनी में उगाया जा सकता है — बिना कभी प्राकृतिक धूप देखे।
  • खुले खेत, ग्रीनहाउस और वर्टिकल फार्म — इन तीनों प्रणालियों को कभी-कभी भविष्य की खेती के लिए एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी विचारों के रूप में पेश किया जाता है।
  • लेकिन असल में ये बिल्कुल अलग पैमानों पर काम करते हैं, और सबसे अहम बात — इनमें वातावरण पर नियंत्रण की मात्रा भी बेहद अलग है।

बदलती जलवायु में यह फर्क क्यों मायने रखता है फसलों को घर के भीतर ले जाने से उन्हें सूखे, गर्मी और अनिश्चित मौसम से बचाया जा सकता है। लेकिन यह नियंत्रण अपनी कीमत के साथ आता है।

ब्रिटेन के पास करीब 1.7 करोड़ हेक्टेयर उपयोग योग्य कृषि भूमि है, जिसमें से लगभग 61 लाख हेक्टेयर फसल योग्य मानी जाती है। अकेले अनाज की खेती में करीब 30 लाख हेक्टेयर जमीन इस्तेमाल होती है।

इसकी तुलना में, ब्रिटेन में बागवानी फसलें — जिनमें टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलें शामिल हैं — कुल मिलाकर केवल 1,47,000 हेक्टेयर जमीन घेरती हैं, और इसमें भी ग्लासहाउस का हिस्सा बेहद छोटा है — करीब 850 हेक्टेयर।

वर्टिकल फार्मिंग तो इससे भी कहीं छोटे स्तर पर है, और इसे राष्ट्रीय कृषि भूमि-उपयोग आंकड़ों में अलग से दर्ज तक नहीं किया जाता। अनुमान है कि ऐसे फार्म ब्रिटेन की कुल कृषि भूमि के महज 0.0001 प्रतिशत हिस्से पर ही फैले हैं — यानी लगभग 10 से 30 हेक्टेयर के बीच।

फिर भी, किसी खेती प्रणाली के कब्जे वाली जमीन की मात्रा यह जरूरी नहीं बताती कि हमारी खाद्य आपूर्ति में उसकी अहमियत कितनी है। खेत: बड़े पैमाने पर उत्पादन, लेकिन मौसम की मार के आगे बेबस खुले खेत बड़े पैमाने पर उत्पादन देते हैं, लेकिन जलवायु के आगे कहीं अधिक असुरक्षित रहते हैं। यदि आप रोटी की एक टुकड़ी खाते हैं, तो उसमें इस्तेमाल हुआ गेहूं लगभग निश्चित रूप से बाहर खेतों में ही उगाया गया होगा। यही बात जौ, सरसों, आलू और कई सब्जियों पर भी लागू होती है।

खुले खेतों में खेती का सबसे बड़ा फायदा उसका विशाल पैमाना है। धूप और बारिश, पौधों की बढ़त के लिए सबसे जरूरी दो चीजें हैं, और किसानों को इन्हें खुद बनाना नहीं पड़ता। लाखों टन गेहूं को रोशनी वाली इमारतों के भीतर उगाना न तो आर्थिक रूप से समझदारी होगी, न ही पर्यावरण के लिहाज से। लेकिन इसकी कीमत है नियंत्रण की कमी। किसान यह तय नहीं कर सकते कि कब बारिश होगी या खेत कितना गर्म होगा। सूखे के दौरान यह बात खासतौर पर अहम हो जाती है।

सिंचाई कुछ हद तक बारिश की कमी की भरपाई कर सकती है, खासकर आलू और कई अन्य सब्जियों जैसी अहम फसलों के लिए — लेकिन अलग-अलग खेतों में पानी की उपलब्धता में काफी अंतर होता है। होजपाइप पर पाबंदी का यह मतलब जरूरी नहीं कि किसानों को सिंचाई रोकनी ही पड़े। घरेलू इस्तेमाल पर लगी पाबंदियां, नदियों और भूजल से कृषि के लिए पानी निकालने के नियमों से अलग होती हैं। लेकिन लंबे समय तक सूखा पड़ने की स्थिति में, जल आपूर्ति और पर्यावरण की रक्षा के लिए पानी निकालने पर भी रोक लगाई जा सकती है।

इस तरह खेती एक मुश्किल दुविधा से जूझती है — फसलों को सबसे ज्यादा सिंचाई की जरूरत अक्सर ठीक उसी समय पड़ती है, जब जल संसाधनों पर सबसे ज्यादा दबाव होता है। ग्रीनहाउस: नियंत्रण तो मिलता है, पर संसाधनों की भारी जरूरत किसी खेत से निकलकर आधुनिक टमाटर ग्रीनहाउस में कदम रखते ही पर्यावरण पर नियंत्रण का स्तर नाटकीय रूप से बदल जाता है। यहां पौधे बिना मिट्टी के भी उगाए जा सकते हैं, जबकि कंप्यूटर सिंचाई, पोषक तत्व, वेंटिलेशन, नमी और तापमान को नियंत्रित करते हैं। आधुनिक प्रणालियां सीधे जड़ों तक पानी पहुंचा सकती हैं और बहकर निकले पानी को इकट्ठा करके उसे शुद्ध कर दोबारा इस्तेमाल कर सकती हैं।

इस वजह से ये पानी के इस्तेमाल में 90 प्रतिशत तक अधिक कुशल हो सकती हैं। इससे ग्रीनहाउस उत्पादन संभावित रूप से बेहद जल-कुशल बन जाता है। यह टमाटर, खीरा और शिमला मिर्च जैसी फसलों को अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र से बड़ी मात्रा में उगाने की सुविधा भी देता है। लेकिन जल-कुशलता का मतलब जल-सुरक्षा नहीं है। नीदरलैंड, जो दुनिया के सबसे उन्नत ग्रीनहाउस उद्योगों में से एक का घर है, इस समस्या को अच्छी तरह दर्शाता है। हाल के सूखे हालातों ने वहां सतही और भूजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे ग्रीनहाउस बागवानी सहित कृषि के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। एक ग्रीनहाउस पानी को बेहद कुशलता से पुनर्चक्रित कर सकता है, लेकिन उसे शुरुआत में पानी का कोई स्रोत तो चाहिए ही।

इसलिए जैसे-जैसे सूखे का खतरा बढ़ेगा, ग्रीनहाउस की छतों से बारिश का पानी इकट्ठा करना, भंडारण क्षमता बढ़ाना और सिंचाई के पानी को पुनर्चक्रित करना और भी ज्यादा जरूरी होता जाएगा। तापमान एक और चुनौती खड़ी करता है।

ग्रीनहाउस बाहरी वातावरण से सुरक्षा तो देते हैं, लेकिन वे उससे पूरी तरह अलग-थलग नहीं होते। यदि टमाटर एक खास तापमान सीमा में सबसे बेहतर उगते हैं, तो बाहरी हालात जितने अधिक चरम होते जाएंगे, उतना ही उस सीमा को बनाए रखना मुश्किल होता जाएगा। जब बाहर गर्मी बढ़ती है, तो उत्पादकों को अधिक वेंटिलेशन, छाया या कूलिंग की जरूरत पड़ सकती है।

वहीं ठंड के मौसम में अतिरिक्त हीटिंग की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि आज हम ग्रीनहाउस जिस तरह चलाते हैं, भविष्य में शायद वैसे न चला सकें। जलवायु परिवर्तन के चलते सिर्फ वही उगाने की परिस्थितियां बनाए रखने के लिए भी कहीं अधिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ सकती है और हस्तक्षेप का मतलब है — खर्च।

वर्टिकल फार्म: सबसे ज्यादा नियंत्रण, सबसे ज्यादा निर्भरता वर्टिकल फार्म इस नियंत्रण के स्पेक्ट्रम के दूसरे छोर पर खड़े हैं। लेट्यूस, हर्ब्स और पत्तेदार सब्जियों जैसी फसलें इमारतों के भीतर — यहां तक कि जमीन के कई किलोमीटर नीचे भी — कई परतों में उगाई जा सकती हैं, जहां रोशनी, पानी, पोषक तत्व, नमी और तापमान सब कुछ बारीकी से नियंत्रित होता है। ये बेहद कम जमीन का इस्तेमाल करते हैं और अपने अधिकांश पानी को पुनर्चक्रित कर सकते हैं। साथ ही ये सूखे, तूफान और अन्य चरम मौसमी घटनाओं से भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।

लेकिन जितना अधिक नियंत्रण होगा, उतनी ही अधिक निर्भरता बुनियादी ढांचे और ऊर्जा पर होगी। यहां तक कि वर्टिकल फार्म भी बाहरी तापमान से पूरी तरह स्वतंत्र नहीं होते। एलईडी और अन्य उपकरण गर्मी पैदा करते हैं, जिसे हटाना जरूरी होता है। जैसे-जैसे बाहरी तापमान फसल के लिए जरूरी परिस्थितियों से दूर होता जाता है, भीतर आदर्श जलवायु बनाए रखने के लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। यह नियंत्रित-वातावरण खेती में छिपे एक बुनियादी समझौते को उजागर करता है — हम खाद्य उत्पादन को प्राकृतिक वातावरण से जितना अधिक अलग करेंगे, प्रकृति द्वारा मुफ्त में दी जाने वाली सेवाओं की जगह लेने के लिए हमें उतनी ही अधिक ऊर्जा और बुनियादी ढांचे की जरूरत पड़ेगी। इसका आर्थिक पहलू भी उतना ही मुश्किल हो सकता है। वर्टिकल फार्मिंग ने यह साबित किया है कि बहुत कम जमीन और पानी में फसलें उगाई जा सकती हैं, लेकिन इस क्षेत्र में कई कारोबारी असफलताएं भी देखी गई हैं। ऊंची ऊर्जा जरूरत, भारी बुनियादी ढांचागत लागत और सीमित मुनाफे के मार्जिन ने कुछ तकनीकी रूप से प्रभावशाली प्रणालियों के लिए भी वित्तीय रूप से टिके रहना मुश्किल बना दिया है।

टिकाऊपन की एक कीमत होती है खेत, ग्रीनहाउस या वर्टिकल फार्म — इनमें से खाद्य उत्पादन का सबसे टिकाऊ तरीका कौन सा है, इसका कोई सीधा-सादा जवाब नहीं है। खेतों को अपेक्षाकृत कम बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है, लेकिन वे मौसम के आगे बेहद असुरक्षित हैं। ग्रीनहाउस अधिक नियंत्रण देते हैं, लेकिन इसके लिए निवेश, ऊर्जा और सुरक्षित जल आपूर्ति चाहिए।

वर्टिकल फार्म और भी अधिक नियंत्रण देते हैं, लेकिन बिजली और महंगे बुनियादी ढांचे पर उनकी निर्भरता भी उतनी ही अधिक है। जलवायु परिवर्तन इस समझौते को दिन-ब-दिन और अधिक अहम बनाता जा रहा है। भविष्य में सिर्फ अधिक नियंत्रित नहीं, बल्कि अधिक समझदार खेती की जरूरत होगी — खेतों में बेहतर जल प्रबंधन, ग्रीनहाउस में बारिश के पानी का अधिक संग्रहण और भंडारण, अधिक कुशल हीटिंग और कूलिंग व्यवस्था, और नवीकरणीय ऊर्जा तथा अन्य उद्योगों से निकलने वाली बेकार गर्मी का बढ़ता इस्तेमाल।

अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग फसलों के लिए हमें खेत, ग्रीनहाउस और वर्टिकल फार्म — तीनों की जरूरत बनी रहेगी। असली चुनौती यह है कि बदलती जलवायु के जोखिम और उसे नियंत्रित करने की बढ़ती लागत के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

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