वेदांता (Vedanta) ने अपने हरित बदलाव (Green Transition) और ‘नेट-जीरो’ (Net-Zero) लक्ष्य की दिशा में निवेश में अभूतपूर्व तेजी लाई है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में नेट-जीरो ट्रांजिशन से जुड़ी विभिन्न पहलों पर 1 अरब डॉलर (1 Billion USD) से अधिक का खर्च किया है। इसमें अक्षय ऊर्जा, कम कार्बन वाले ईंधन, ऊर्जा दक्षता और आधुनिक तकनीक आधारित उपायों को प्रमुखता दी गई है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। खनन और धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता ने अपने हरित बदलाव और नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में निवेश तेज कर दिया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में नेट-जीरो ट्रांजिशन से जुड़ी पहलों पर 1 अरब डॉलर से अधिक खर्च किया।
इसमें अक्षय ऊर्जा, कम कार्बन वाले ईंधन, ऊर्जा दक्षता और तकनीक आधारित उपायों को प्रमुखता दी गई। वेदांता के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के अक्षय ऊर्जा उपयोग में सालाना आधार पर 52 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 4 अरब यूनिट यानी करीब 400 करोड़ यूनिट हो गया।
कंपनी का दावा है कि इतनी बिजली करीब तीन करोड़ भारतीय परिवारों की एक साल की बिजली खपत के बराबर है। कंपनी के पास अब लगभग 2,000 मेगावाट की स्थापित और अनुबंधित अक्षय ऊर्जा क्षमता है।
वेदांता ने 2030 तक 2.5 गीगावाट की चौबीसों घंटे उपलब्ध अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए कंपनी अपने ऊर्जा उपयोग में स्वच्छ स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दे रही है। वेदांता ने बताया कि अक्षय ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल और अन्य डीकार्बोनाइजेशन उपायों की मदद से वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन को टाला गया।
वहीं, समूह के धातु और खनन कारोबार में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता वित्त वर्ष 2020-21 के आधार स्तर की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत कम हुई है। कंपनी का यह निवेश ऐसे समय में हुआ है जब भारत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और कार्बन-गहन ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने की दिशा में काम कर रहा है।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही देश की 2030 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का आधा हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने की महत्वाकांक्षा है। भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अक्षय ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क, पावर ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और विद्युतीकरण में बड़े निवेश की जरूरत होगी। खनन और धातु कंपनियों के लिए यह बदलाव एक नए कारोबारी अवसर के रूप में भी सामने आ रहा है, क्योंकि स्वच्छ ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए तांबा, एल्युमीनियम और अन्य खनिजों की मांग बढ़ सकती है।
ऐसे में वेदांता का हरित निवेश केवल उत्सर्जन कम करने की रणनीति नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा और औद्योगिक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश भी माना जा सकता है।
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