भारत में पॉपकॉर्न की खेती को बढ़ावा देने और आयातित हाइब्रिड तकनीक पर निर्भरता कम करने के लिए देश का पहला नॉन-जीएमओ, हाई-एक्सपैंशन पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज लॉन्च किया गया है। इसे उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले के मुसुनुरु में लॉन्च किया गया।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। पॉपकॉर्न की बढ़ती मांग और उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल के लिए आयातित हाइब्रिड तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले के मुसुनुरु में भारत का पहला नॉन-जीएमओ, हाई-एक्सपैंशन पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज लॉन्च किया।
इस स्वदेशी बीज को भारतीय कृषि में आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम उत्पाद के रूप में देखा जा रहा है। इस हाइब्रिड बीज की खासियत इसका हाई-एक्सपैंशन गुण है, यानी मक्के के दानों के गर्म होने पर बेहतर तरीके से फूलकर पॉपकॉर्न में बदलने की क्षमता।
पॉपकॉर्न उद्योग के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दाने की गुणवत्ता, फूलने की क्षमता और उत्पाद की एकरूपता सीधे तैयार पॉपकॉर्न की गुणवत्ता और व्यावसायिक मूल्य को प्रभावित करती है।
अब तक भारत में उच्च गुणवत्ता वाले पॉपकॉर्न मक्का के लिए बड़े पैमाने पर आयातित हाइब्रिड तकनीक पर निर्भरता रही है। ऐसे में स्वदेशी, नॉन-जीएमओ हाइब्रिड बीज का विकास घरेलू किसानों और पॉपकॉर्न प्रसंस्करण उद्योग के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध कराता है।
इससे आयात पर निर्भरता और विदेशी मुद्रा के खर्च को कम करने के साथ-साथ भारत में पॉपकॉर्न की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की संभावना है। उत्पाद के लॉन्च के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने तकनीक, नवाचार और स्वदेशी बीज विकास को भारतीय कृषि की मजबूती का आधार बताया।
उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर बीज उपलब्ध कराकर कृषि को अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाया जा सकता है। इस पहल के केंद्र में Gourmet Popcornica और उससे जुड़े किसान हैं। कंपनी की यात्रा आंध्र प्रदेश में एक घरेलू उद्यम से शुरू होकर पॉपकॉर्न मक्का के प्रसंस्करण और बाजार विस्तार तक पहुंची है।
उपराष्ट्रपति के अनुसार, यह मॉडल दिखाता है कि किसान, उद्यमी और तकनीक मिलकर स्थानीय स्तर पर ऐसा कृषि उत्पाद विकसित कर सकते हैं जिसकी वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता हो। Gourmet Popcornica के साथ आठ राज्यों के 17,500 से अधिक किसान जुड़े हैं और करीब 40,000 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती की जा रही है।
इस किसान-उद्यम साझेदारी से खेती से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक एक संगठित मूल्य श्रृंखला तैयार हो रही है, जिससे हजारों कृषि परिवारों के लिए बाजार तक बेहतर पहुंच और आय के नए अवसर बन रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण जमीन से होगा—किसानों द्वारा तैयार की गई मिट्टी, वैज्ञानिकों और उद्यमियों द्वारा विकसित बीज तथा खेत-खेत मजबूत होती आत्मनिर्भरता इसके आधार होंगे।
उन्होंने कहा कि मुसुनुरु की यह पहल दिखाती है कि छोटा प्रयास भी बड़े विजन और बड़े सपने की शुरुआत बन सकता है। लॉन्च कार्यक्रम से पहले उपराष्ट्रपति ने Gourmet Popcornica की फैक्ट्री और कोल्ड स्टोरेज सुविधा का भी दौरा किया। यहां उन्हें मक्का के प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और भंडारण की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
नॉन-जीएमओ हाई-एक्सपैंशन हाइब्रिड बीज का लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब भारत में स्नैकिंग और रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादों के बाजार के साथ पॉपकॉर्न की मांग भी बढ़ रही है। स्वदेशी बीज, स्थानीय उत्पादन, आधुनिक प्रसंस्करण और मजबूत किसान नेटवर्क का संयोजन इस क्षेत्र को अधिक संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक, नवाचार और आत्मनिर्भरता के जरिए भारतीय कृषि को न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाया जा सकता है, बल्कि भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक भी पहुंचाया जा सकता है।
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