By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Reading: उड़ीसा में बढ़ रहीं हरित नौकरियां पर स्थानीय युवाओं को नहीं मिल पा रहा इनका फायदा
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Search
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > सस्टेनिबिलिटी > उड़ीसा में बढ़ रहीं हरित नौकरियां पर स्थानीय युवाओं को नहीं मिल पा रहा इनका फायदा
सस्टेनिबिलिटीस्टोरी

उड़ीसा में बढ़ रहीं हरित नौकरियां पर स्थानीय युवाओं को नहीं मिल पा रहा इनका फायदा

Environment Pulse
Last updated: August 1, 2026 8:26 pm
Environment Pulse
Published: August 1, 2026
Share
(Photo-AI)
SHARE

आईफारेस्ट के सर्वे के अनुसार सात प्रतिशत छात्र ही पर्यावरण-अनुकूल नौकरियों से संबंधित पाठ्यक्रम पढ़ रहे

अधिकांश छात्र अभी भी कर रहे परंपरागत कोर्स, कई इलाकों में कोयला खनन ही एकमात्र आजीविका

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

ओडिशा में हरित ऊर्जा से जुड़ी नई नौकरियां बढ़ रही हैं लेकिन ये स्थानीय युवाओं को नहीं मिल पा रही हैं। स्थानीय युवा स्कूलों में जो पाठ्यक्रम पढ़ रहे हैं, वे ग्रीन जॉब्स के अनुकूल नहीं हैं। अंगुल और झारसुगुड़ा के कुछ स्कूलों में छात्र उन नौकरियों के लिए कौशल सीख रहे हैं, जो धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। कई युवा सरकारी नौकरी या बिजली उत्पादन करने वाली बड़ी फैक्ट्रियों में काम करना चाहते हैं पर ये फैक्ट्रियां भी प्रदूषण फैलाती हैं। कुछ क्षेत्रों में बहुत सारे परिवारों की एकमात्र आजीविका कोयला खनन ही है।

राज्य में अब सौर ऊर्जा संयंत्रों, बैटरी फैक्ट्रियों, इलेक्ट्रिक कार मरम्मत केंद्रों, अपशिष्ट पुनर्चक्रण केंद्रों और हरित हाइड्रोजन संयंत्रों जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियां उभर रही हैं। ये नौकरियां धीरे-धीरे बढ़ भी रही हैं। इधर के दिनों में ओडिशा स्वच्छ ऊर्जा और कम प्रदूषण फैलाने वाली नई तरह की फैक्ट्रियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है लेकिन क्या ये नई नौकरियां स्थानीय युवाओं को मिलेंगी?

ग्रीन जॉब्स या हरित नौकरियां क्या हैं? हरित नौकरियां केवल पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कार्यालयी नौकरियां नहीं हैं। इनमें सौर पैनलों की मरम्मत करने वाले, ऊर्जा मशीनों का प्रबंधन करने वाले, इलेक्ट्रिक कारों की मरम्मत करने वाले, बैटरियों को सावधानीपूर्वक संभालने वाले और अपशिष्ट पुनर्चक्रण करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। ये नौकरियां प्रदूषण से लड़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने में मदद करती हैं। 2030 तक ओडिशा में लगभग 10 लाख नई हरित नौकरियां सृजित किए जाने की संभावना है।

हरित परियोजनाओं के निर्माण और संचालन के दौरान पहले ही लगभग 1 लाख नौकरियां सृजित की जा चुकी हैं। ये नई हरित परियोजनाएं अगले दस वर्षों में सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक कार, बैटरी और जैव ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लगभग 10 लाख नौकरियां पैदा कर सकती हैं।

एक बड़ा लक्ष्य 2030 तक 7.5 गीगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन करना है, जिससे ओडिशा की अर्थव्यवस्था में बदलाव आएगा।

किंतु इसमें एक समस्या आड़े आ रही है। ओडिशा अभी भी कोयला और धातु खनन जैसे पुराने उद्योगों पर निर्भर है। तालचर, आईबी घाटी, झारसुगुड़ा, अंगुल और सुंदरगढ़ जैसे इलाकों में कई परिवार अपनी आजीविका के लिए कोयला खनन पर निर्भर हैं। स्वच्छ ऊर्जा और स्वचालन के विकास के साथ, पुराने उद्योगों में नौकरियां कम होती जाएंगी। ओडिशा को इन उद्योगों पर निर्भर श्रमिकों की मदद करने और युवाओं को हरित नौकरियों के लिए नए कौशल सिखाने के तरीके खोजने होंगे।

जब हरित उद्योगों को कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है, तो स्थानीय युवाओं के पास उपयुक्त कौशल न होने पर उन्हें ओडिशा के बाहर से लोगों को नियुक्त करना पड़ सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि नए निवेश तो आएं, लेकिन स्थानीय युवाओं को नौकरियां न मिलें।

IFOREST द्वारा किए गए एक हालिया सर्वेक्षण में 571 छात्रों, 30 स्कूलों और 33 नियोक्ताओं को शामिल किया गया। इस अध्ययन में एक बड़ी कमी सामने आई। वह यह कि केवल 7 प्रतिशत छात्र ही पर्यावरण-अनुकूल नौकरियों से संबंधित पाठ्यक्रम ले रहे हैं। लगभग आधे छात्रों को तो यह भी नहीं पता कि ऐसे पाठ्यक्रम भी मौजूद हैं।

Also Read: ओडिशा में नौकरियों की रफ्तार से पीछे छूटा कौशल विकास: 7% छात्र ही कर रहे ‘ग्रीन कोर्स’, आधी आबादी को खबर तक नहीं

You Might Also Like

क्या आप में पर्यावरण सम्बन्धी स्टार्टअप चलाने का जूनून है ?
एआई से भारी पर्यावरणीय नुकसान : जल, जमीन, जलवायु सभी को खतरा
Indian Cinema: Promoting Environment Through Stories
भारतीय गिद्ध ने 56 दिन में 1600 किलोमीटर से अधिक की उड़ान भरकर चौंकाया
Maruti Suzuki Strengthens Green Energy Push with Battery Energy Storage System at Kharkhoda Plant
TAGGED:environmentGreen jobsGreen jobs in OdishaIFORESTsurvey report
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
(सिंबोलिक फोटो-एआई)
सस्टेनिबिलिटीस्टोरी

आज के कुछ समय पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि यहां इतनी गर्मी पड़ेगी

Environment Pulse
Environment Pulse
August 4, 2026
दिल्ली में स्कूली छात्रों के बीच पूरे साल चलेगा वायु प्रदूषण जागरूकता कार्यक्रम
समुद्र का स्तर बढ़ने से अमेरिका के 84% कोस्टल वेटलैंड्स डूबने की कगार पर, स्टडी में बड़ा खुलासा
अंडों  के केज-फ्री सिस्टम पर बहस जारी
2045 तक भारत पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाए तो 17 लाख से अधिक लोगों की बच सकती है जान: आईसीसीटी रिपोर्ट

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ग्रीन जॉब
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?