9, 000 एकड़ में सीग्रास को बढ़ाने के लिए करीब 7 करोड़ ईलग्रास के बीज बांटे
उत्तरी अटलांटिक तट पर ईलग्रास की संख्या में भारी गिरावट आई
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
पर्यावरण में कई ऐसे अनोखे चीज़ हैं जिनके बारे में आम इंसान को जल्दी पता नहीं चल पाता। कभी कभी कुछ ऐसे धरोहर होते हैं जो विलुप्त होने की कगार पर होते हैं। फिर भी वैज्ञानिक समझ के कारण उन्हें फिर से जीवंत किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ वर्जिनिया में देखा गया है। साल 1999 में वैज्ञानिकों ने तटीय खाड़ियों में ईलग्रास (एक तरह की समुद्री घास) को फिर से उगाने का एक प्रोजेक्ट शुरू किया। जानकारी के हिसाब से बीमारी के कारण इनकी संख्या में कमी आयी थी। कई सालों में, उन्होंने लगभग 9,000 एकड़ में सीग्रास (समुद्री घास) को बढ़ाने के लिए करीब 7 करोड़ ईलग्रास के बीज बांटे।
काफी समय से वर्जीनिया के पूर्वी तट के उथली खाड़ियों में पानी के नीचे के पौधों का भारी नुकसान हुआ। जो जगह कभी स्वस्थ ईलग्रास से भरे होते थे, वे खाली समुद्री तल में बदल गए। इसके चलते समुद्री जीवों पर बुरा असर पड़ा जो इन जगहों पर निर्भर थे।
प्राप्त जानकारी के हिसाब से पता चलता है कि 1930 का दशक जब शुरू हुआ तो एक बीमारी के फैलने से उत्तरी अटलांटिक तट पर ईलग्रास की संख्या में भारी गिरावट आई। ऐसा होने पर तटीय इकोसिस्टम बिगाड़ गया। जहाँ कभी कई तरह की समुद्री प्रजातियाँ रहती थीं। ईलग्रास के मैदान समुद्री जीवों को ज़रूरी आश्रय और भोजन की जगह देते हैं, जिनकी जगह अब बिना किसी बनावट वाले बंजर इलाकों ने ले ली थी।
शोधकर्ताओं ने 1999 में एक बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट शुरू किया जिसमें सही जगहों पर बीज बिखेरने पर ध्यान दिया गया। इसे करने के दो दशक बाद उनके नतीजे एक रिसर्च पेपर में छपे, जिसका शीर्षक था “सीग्रास हैबिटेट (आवास) को बहाल करने से तटीय इकोसिस्टम सेवाओं में तेज़ी से सुधार होता है,” जिसमें बताया गया कि बहाल किए गए इकोसिस्टम में कैसे बदलाव आए।
इसमें ये पता चला कि ईलग्रास लगभग 9,000 एकड़ तक फैल गया था। पानी के साफ़ होने से सूरज की रोशनी समुद्र की तलहटी तक ज़्यादा पहुँचने लगी, जिससे घास के मैदानों के बढ़ने के लिए अनुकूल हालात बने।
जब लीग्रस्स के बीज लगाए गए तो उससे एक नयी हरियाली उत्पन्न हुई। चूँकि ईलग्रास प्राकृतिक रूप से बीजों से पनपता है, इसलिए यह तरीका पौधे के जीवन चक्र के अनुकूल था। जैसे-जैसे बीज अंकुरित हुए और बढ़े, ईलग्रास के नए पैच (झुंड) बन गए, जिससे पानी के नीचे घास के और भी बड़े मैदान तैयार हो गए।
ठीक होने की यह प्रक्रिया धीरे-धीरे चली और इसके लिए लगातार निगरानी और जाँच की ज़रूरत थी ताकि यह पक्का किया जा सके कि घास के मैदान फलें-फूलें और फैलें। नतीजों से इस बात पर ज़ोर दिया गया कि बड़े पैमाने पर इकोसिस्टम की बहाली तभी सफल हो सकती है जब वह उस प्रजाति की प्राकृतिक प्रक्रियाओं के अनुकूल हो जिसे बहाल किया जा रहा है।
सीग्रास को पानी के नीचे प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के लिए सूरज की रोशनी की ज़रूरत होती है, इसलिए पानी की बेहतर गुणवत्ता और रोशनी के पहुँचने से बीजों को जीवित रहने में मदद मिली। रिसर्च से पता चला कि सही हालात में बीज बोने से बहाली के काम को सफल बनाने में मदद मिली। इस प्रोजेक्ट की वजह से लगभग 9,000 एकड़ समुद्री इलाके को सफलतापूर्वक बहाल किया गया, जिससे ईलग्रास के स्वस्थ मैदान बने। ये मैदान समुद्री जीवों को ज़रूरी आश्रय देते हैं।
सीग्रास के मैदान, भले ही जंगल या वेटलैंड जितने आकर्षक न लगें, लेकिन ये तटीय इकोसिस्टम के लिए बहुत ज़रूरी हैं। बहाल किए गए ईलग्रास इलाके कई अहम काम करते हैं, जैसे छोटी मछलियों को रहने की जगह देना और समुद्र की तलहटी में तलछट (sediments) को स्थिर रखना। इनकी जड़ें तलछट को अपनी जगह पर बनाए रखती हैं, जिससे विकास के लिए अनुकूल माहौल बनता है।
बीस साल बाद, वर्जीनिया की तटीय खाड़ियों में लगभग 9,000 एकड़ ईलग्रास फल-फूल रही है। इस प्रोजेक्ट ने दिखाया कि बनावटी ढांचों पर निर्भर रहने के बजाय, प्राकृतिक स्थितियों को बहाल करके इकोसिस्टम को खुद से फिर से बनने दिया जा सकता है। यह सफल पहल बड़े पैमाने पर सीग्रास बहाली के सबसे स्पष्ट उदाहरणों में से एक है, जो यह बताती है कि इकोलॉजिकल बहाली एक धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है।
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