संयुक्त राष्ट्र के एक नए आकलन के अनुसार, वायु प्रदूषण और जलवायु संकट से निपटने के लिए निवेश किए गए प्रत्येक एक अमेरिकी डॉलर से करीब 15 डॉलर तक का आर्थिक लाभ हासिल किया जा सकता है। रिपोर्ट में स्वास्थ्य, उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार को इस लाभ का प्रमुख आधार बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से निपटने पर किया गया निवेश केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से निपटने पर किया गया निवेश केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के एक नए आकलन के अनुसार, वायु प्रदूषण और जलवायु संकट से निपटने के लिए निवेश किए गए प्रत्येक एक अमेरिकी डॉलर से करीब 15 डॉलर तक का आर्थिक लाभ हासिल किया जा सकता है। रिपोर्ट में स्वास्थ्य, उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार को इस लाभ का प्रमुख आधार बताया गया है। संयुक्त राष्ट्र की 7 सितंबर को जारी रिपोर्ट Hidden Assets: The Economic and Health Case for Climate and Clean Air Action में 25 ऐसे उपायों की पहचान की गई है, जो एक साथ वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकते हैं।
केवल प्रत्यक्ष बाजार लाभ को देखें तो भी प्रत्येक एक डॉलर के निवेश पर करीब चार डॉलर का लाभ मिलने का अनुमान है। इसमें स्वास्थ्य खर्च में कमी और श्रमिक उत्पादकता में वृद्धि जैसे फायदे शामिल हैं। भारत के लिए रिपोर्ट के निष्कर्ष खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश के कई बड़े शहर लंबे समय से प्रदूषण की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 130 शहरों में से 108 में वर्ष 2025-26 के दौरान 2017-18 के आधार वर्ष की तुलना में पीएम10 स्तर में कमी दर्ज की गई। 72 शहरों में यह कमी 20 प्रतिशत से अधिक और 26 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक रही। हालांकि, केवल 14 शहर ही निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक को हासिल कर सके। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में स्वच्छ हवा और जलवायु संबंधी उपायों का लाभ-लागत अनुपात करीब 21:1 हो सकता है।
स्वच्छ खाना पकाने की व्यवस्था, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, औद्योगिक उत्सर्जन में कमी, कृषि अवशेष जलाने पर नियंत्रण, बेहतर कचरा प्रबंधन, मीथेन उत्सर्जन में कमी और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार प्रमुख उपायों में शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि प्रदूषण से होने वाली बीमारी का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
बीमारियों के कारण इलाज का खर्च बढ़ता है, काम के दिन कम होते हैं और श्रम उत्पादकता प्रभावित होती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में बाहरी वायु प्रदूषण से जुड़े पीएम2.5 और जमीनी स्तर के ओजोन के कारण दुनिया में करीब 64 लाख समयपूर्व मौतें हुईं।
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई में देरी की आर्थिक कीमत भी बहुत बड़ी है। वैश्विक स्तर पर जलवायु और स्वच्छ हवा से जुड़े उपायों में औसतन आठ वर्ष की देरी का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, हर साल की देरी से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 0.5 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गंवाया जा सकता है। भारत में स्वच्छ हवा की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। बीएस-VI उत्सर्जन मानकों, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, औद्योगिक उत्सर्जन निगरानी, निर्माण एवं सड़क की धूल पर नियंत्रण और पराली जलाने की घटनाओं में कमी जैसे प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार के अनुसार, 2021 की तुलना में 2025 में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में क्रमशः 93 प्रतिशत और 91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
संयुक्त राष्ट्र का आकलन स्पष्ट संकेत देता है कि स्वच्छ हवा को केवल पर्यावरणीय लक्ष्य मानने के बजाय आर्थिक विकास की रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। प्रदूषण घटाने पर किया गया निवेश स्वास्थ्य खर्च कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु जोखिमों को सीमित करने के साथ दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
(फोटो-एआई)

