इस साल नवंबर की शुरुआत में दिल्ली की हवा में पिछले 12 वर्षों के मुकाबले सुधार देखा गया है। 1 नवंबर को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 261 दर्ज किया गया, जो पिछले कुछ वर्षों (2018-2023 के दौरान पहले 15 दिनों का औसत 370) की तुलना में बेहतर है। हालांकि, विशेषज्ञों और डीपीसीसी (DPCC) का मानना है कि यह राहत अस्थायी है। आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाओं (जो कुल प्रदूषण का 18 से 20 प्रतिशत तक हो सकती हैं) और आगामी दिवाली के कारण हवा की गुणवत्ता फिर से गंभीर होने की आशंका है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और SAFAR के विशेषज्ञों ने भी शुरुआती पखवाड़े को चुनौतीपूर्ण बताते हुए प्रदूषण नियंत्रण के कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : दिल्लीवासियों को इस साल नवंबर की शुरुआत में प्रदूषण से कुछ राहत मिली है। राजधानी में 1 नवंबर को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 261 दर्ज किया गया, जो पिछले कई वर्षों की समान अवधि के मुकाबले बेहतर स्थिति दर्शाता है।
वर्ष 2018 से 2023 के बीच नवंबर के पहले 15 दिनों का औसत AQI 370 रहा था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती राहत को प्रदूषण से स्थायी राहत नहीं माना जा सकता, क्योंकि आने वाले दिनों में पराली जलाने और दिवाली के कारण वायु गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के विश्लेषण के अनुसार, 1 से 15 नवंबर तक का समय राजधानी के सबसे प्रदूषित दौर में शामिल रहता है। इसके बाद 15 से 31 दिसंबर के बीच प्रदूषण का स्तर आमतौर पर सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के पूर्वानुमान के मुताबिक, आने वाले दिनों में दिल्ली के कुल प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी बढ़कर 18 से 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। SAFAR के संस्थापक डॉ. गुफरान बेग ने भी पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि आगामी दिवाली के कारण प्रदूषण का दबाव और बढ़ सकता है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने भी नवंबर के शुरुआती 10 दिनों को वायु गुणवत्ता के लिहाज से चुनौतीपूर्ण बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल दर्ज किया गया अपेक्षाकृत बेहतर AQI राहत जरूर देता है, लेकिन नवंबर के पहले पखवाड़े में मौसम की परिस्थितियों, पराली के धुएं और आतिशबाजी का संयुक्त असर दिल्ली की हवा को फिर गंभीर बना सकता है। ऐसे में आने वाले दिन राजधानी के प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों की वास्तविक परीक्षा साबित होंगे।
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