कनाडा में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर जारी एक नई संघीय वैज्ञानिक रिपोर्ट (‘Canada’s Changing Climate Report 2026’) के अनुसार, सदी के अंत तक वैश्विक स्तर पर नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल होने की स्थिति में भी कनाडा में जंगलों की आग से प्रभावित क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, पश्चिमी कनाडा के अधिकांश ग्लेशियर 2100 तक पिघलकर लगभग समाप्त हो जाएंगे। रिपोर्ट में तापमान में भारी वृद्धि, लंबे सूखे, भीषण गर्मी और परमाफ्रॉस्ट के लगातार पिघलने जैसी गंभीर चुनौतियों की चेतावनी देते हुए तत्काल उत्सर्जन कटौती और अनुकूलन उपायों को तेज करने पर जोर दिया गया है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। कनाडा में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को लेकर एक नई संघीय वैज्ञानिक रिपोर्ट ने गंभीर चेतावनी जारी की है। ‘Canada’s Changing Climate Report 2026’ के अनुसार, वैश्विक स्तर पर करीब 2075 तक शुद्ध-शून्य (Net Zero) ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हासिल होने की आशावादी स्थिति में भी इस सदी के अंत तक कनाडा में जंगलों की आग से प्रभावित क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। वहीं, पश्चिमी कनाडा के अधिकांश ग्लेशियर 2100 तक लगभग गायब हो सकते हैं।
Environment and Climate Change Canada की ओर से जारी इस राष्ट्रीय आकलन को सरकार और स्वतंत्र संस्थानों के दर्जनों जलवायु वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। यह देश के जलवायु परिवर्तन पर दूसरा बड़ा राष्ट्रीय वैज्ञानिक आकलन है, जिसमें तेजी से बदलते कनाडा की विस्तृत तस्वीर पेश की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि दुनिया 2070 के दशक के मध्य तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल कर लेती है और उसके बाद वैश्विक तापमान स्थिर हो जाता है, तब भी सदी के अंत तक कनाडा का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में करीब 3.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है। इस स्थिति में भी जंगलों में आग का मौसम लंबा होने और आग से जलने वाले क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
पश्चिमी कनाडा के ग्लेशियर अपने 75 प्रतिशत से अधिक बर्फीले द्रव्यमान को खो सकते हैं, जिससे 2100 तक उनका अधिकांश हिस्सा समाप्त होने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि दुनिया में वर्तमान में लागू जलवायु नीतियां ही जारी रहती हैं, तो 2081-2100 के दौरान कनाडा के औसत तापमान में लगभग 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है।
नुनावुत के कुछ हिस्सों में सर्दियों के दौरान तापमान वृद्धि 10 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकती है। वहीं, उच्च उत्सर्जन और सीमित जलवायु कार्रवाई वाले परिदृश्य में कनाडा का तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से करीब 6.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का अनुमान है। वैज्ञानिकों ने कनाडा में भविष्य में कई अन्य गंभीर बदलावों की आशंका जताई है।
इनमें अधिक लगातार और तीव्र अत्यधिक गर्मी, दक्षिणी कनाडा में लंबे सूखे, अधिक शक्तिशाली वायुमंडलीय नदियां (Atmospheric Rivers) और अचानक आने वाली बाढ़ शामिल हैं। इसके साथ ही परमाफ्रॉस्ट के लगातार पिघलने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। केंद्रीय आर्कटिक महासागर के सितंबर महीने में अधिकांश समय काफी हद तक बर्फ-मुक्त रहने की संभावना भी जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा के प्रतिष्ठित प्राकृतिक परिदृश्य बर्फ और हिम के तेजी से गायब होने के कारण बदल रहे हैं और पश्चिमी कनाडा के ग्लेशियर इस सदी के अंत तक बड़े पैमाने पर समाप्त हो जाएंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र स्तर में वृद्धि, ग्लेशियरों का पिघलना और परमाफ्रॉस्ट का नुकसान जैसे कुछ जलवायु प्रभाव अब काफी हद तक अपरिवर्तनीय हो चुके हैं। तापमान स्थिर होने के बाद भी ये बदलाव लंबे समय तक जारी रह सकते हैं। हालांकि, भविष्य में इन प्रभावों की गंभीरता अभी भी वैश्विक उत्सर्जन में कटौती की गति पर काफी हद तक निर्भर करती है।
रिपोर्ट में तेजी से उत्सर्जन घटाने के साथ-साथ अनुकूलन उपायों में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया गया है, ताकि समुदायों, बुनियादी ढांचे और पारिस्थितिकी तंत्र को पहले से शुरू हो चुके जलवायु बदलावों से बचाया जा सके।
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