दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विश्व बैंक के सहयोग से ₹8,300 करोड़ की सात वर्षीय ‘क्लीन एयर, हेल्दी दिल्ली’ (सितंबर 2026 – अगस्त 2033) परियोजना तैयार की है। इस पहल का 65% हिस्सा विश्व बैंक ऋण और 35% हिस्सा दिल्ली सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जिसका क्रियान्वयन डीपीसीसी (DPCC) द्वारा होगा। इसका उद्देश्य परिवहन, सड़क की धूल, निर्माण कचरा, ठोस कचरा और औद्योगिक उत्सर्जन जैसे स्रोतों पर स्थायी रूप से रोक लगाना है। इसके तहत एआई आधारित कैमरों से निगरानी, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और उन्नत पीयूसी (PUC) व्यवस्था स्थापित करने की योजना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। दिल्ली सरकार ने राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सात वर्ष की व्यापक पहल ‘क्लीन एयर, हेल्दी दिल्ली’ (स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली) शुरू करने की तैयारी की है।
करीब ₹8,300 करोड़ की इस परियोजना को सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक लागू किया जाएगा। परियोजना को विश्व बैंक के सहयोग से संचालित किया जाएगा और इसका उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए दिल्ली की हवा की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार करना है।
परियोजना की कुल लागत का 65 प्रतिशत हिस्सा विश्व बैंक की ऋण सहायता से आएगा, जबकि शेष 35 प्रतिशत योगदान दिल्ली सरकार करेगी। परियोजना का क्रियान्वयन दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा पर्यावरण विभाग की प्रशासनिक निगरानी में किया जाएगा।
इसकी तैयारी में विश्व बैंक की परियोजना तैयारी अनुदान सहायता भी शामिल रही है। ‘क्लीन एयर, हेल्दी दिल्ली’ का मुख्य उद्देश्य राजधानी की वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना, प्रदूषण के बड़े स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाना और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्यों की दिशा में प्रगति तेज करना है।
यह पहल दीर्घकालिक स्तर पर विकसित भारत 2047 के विजन और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में भी योगदान देने के लिए तैयार की गई है। परियोजना के तहत परिवहन और वाहनों से होने वाला प्रदूषण, सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरा, ठोस कचरा प्रबंधन, औद्योगिक उत्सर्जन, हरित क्षेत्र और जल प्रदूषण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक प्रदूषण को केवल आपातकालीन उपायों के जरिये नियंत्रित करने के बजाय उसके स्रोतों पर स्थायी हस्तक्षेप करना परियोजना की प्राथमिकता होगी।
इस पहल में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल प्रस्तावित है। निर्माण एवं विध्वंस स्थलों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए एआई आधारित कैमरा सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे नियमों के उल्लंघन की पहचान, बेहतर प्रवर्तन और डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
निगरानी व्यवस्था में डेटा गोपनीयता के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के प्रावधानों का ध्यान रखा जाएगा। दिल्ली में उन्नत वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क और डेटा एनालिटिक्स क्षमता विकसित करने के साथ एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित करने की भी योजना है।
परियोजना के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाई जाएगी। स्वच्छ परिवहन को भी परियोजना में प्रमुख स्थान दिया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, व्यापक ईवी चार्जिंग नेटवर्क के लिए रोडमैप तैयार करने और पुराने तथा अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर जोर रहेगा।
सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के साथ वाहनों के उत्सर्जन की जांच के लिए उन्नत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) निगरानी व्यवस्था विकसित करने की योजना है। परियोजना की रणनीति दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी। पहला संस्थागत क्षमता मजबूत करना, जिसमें परियोजना प्रबंधन, उन्नत निगरानी प्रणाली, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, वैज्ञानिक योजना, जनजागरूकता और क्षमता निर्माण शामिल हैं।
दूसरा उत्सर्जन में कमी लाना, जिसके तहत परिवहन, धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और उद्योगों में लक्षित उपाय लागू किए जाएंगे तथा स्वच्छ तकनीकों और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहित किया जाएगा। परियोजना की तैयारियों के तहत दिल्ली के विभिन्न सरकारी विभागों, नगर निकायों, विश्व बैंक और अन्य संबंधित पक्षों के साथ कार्यशालाएं और ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।
इनका उद्देश्य सभी 13 जिलों में योजनाबद्ध और समन्वित तरीके से कार्यक्रम लागू करने के लिए रोडमैप को अंतिम रूप देना है। अधिकारियों के अनुसार, ₹8,300 करोड़ की यह पहल केवल अल्पकालिक प्रदूषण नियंत्रण अभियान नहीं है, बल्कि दिल्ली के लिए दीर्घकालिक पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश है।
परियोजना के माध्यम से स्वच्छ हवा, बेहतर स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता और अधिक रहने योग्य राजधानी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, परियोजना की सफलता केवल वित्तीय संसाधनों या तकनीकी प्रणालियों की स्थापना पर निर्भर नहीं करेगी। विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय, तकनीकी उपायों का समयबद्ध क्रियान्वयन और सात वर्षों तक लगातार राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता इसके अपेक्षित परिणाम हासिल करने के लिए निर्णायक होगी।
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