By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: चार प्रमुख रिफाइनरियों को 30 केटीपीए क्षमता आवंटित
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > सस्टेनिबिलिटी > राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: चार प्रमुख रिफाइनरियों को 30 केटीपीए क्षमता आवंटित
(फोटो सौजन्य-एआई)
फ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटीस्टोरीहवा

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: चार प्रमुख रिफाइनरियों को 30 केटीपीए क्षमता आवंटित

Environment Pulse
Last updated: August 12, 2026 9:10 pm
Environment Pulse
Published: August 12, 2026
Share
(फोटो सौजन्य-एआई)
SHARE

देश को स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत पेट्रोलियम रिफाइनिंग क्षेत्र पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में जानकारी दी कि ‘साइट’ मोड-2बी योजना के तहत चार बड़ी रिफाइनरियों को कुल 30 किलो टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है। घरेलू स्तर पर हरित हाइड्रोजन का यह उत्पादन देश के कार्बन उत्सर्जन को घटाने में सहायक होगा। रिफाइनरियों को केटीपीए (Kilo Tonnes Per Annum) क्षमता आवंटित करने का सीधा मतलब है कि उन कंपनियों को हर साल  उतना हरित हाइड्रोजन बनाने या इस्तेमाल करने की सरकारी मंजूरी मिली है।

 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क।  देश को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में सरकार लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत अब पेट्रोलियम रिफाइनिंग सेक्टर में भी हरित हाइड्रोजन को अपनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में इससे जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मिशन की साइट (स्ट्रेटेजिक इंटरवेंशन्स फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन) मोड-2बी योजना के तहत देश की चार बड़ी रिफाइनरियों को कुल 30 किलो टन प्रति वर्ष (केटीपीए) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है। रिफाइनरियों को 10 केटीपीए (KTPA – Kilo Tonnes Per Annum) क्षमता आवंटित करने का सीधा मतलब है कि उन कंपनियों को हर साल 10,000 मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) बनाने या इस्तेमाल करने की सरकारी मंजूरी और वित्तीय सहायता मंजूर की गई है।

किस रिफाइनरी को मिली कितनी क्षमता

इस योजना के तहत पानीपत स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी को सबसे ज़्यादा 10 केटीपीए क्षमता दी गई है। इसी तरह असम के नुमालीगढ़ में स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरीज लिमिटेड को भी 10 केटीपीए की क्षमता आवंटित हुई है। मध्य प्रदेश के बीना में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और आंध्र प्रदेश के विजाग में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को 5-5 केटीपीए की क्षमता दी गई है। इस तरह चारों रिफाइनरियों को मिलाकर कुल 30 केटीपीए सालाना हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता तय की गई है। निजी डेवलपर्स के ज़रिए होगा क्रियान्वयनइन सभी परियोजनाओं को बिल्ड-ओन-ऑपरेट मॉडल के तहत निजी डेवलपर्स के माध्यम से लागू किया जा रहा है, यानी संबंधित परियोजना का निवेश और संचालन जिम्मा उन्हीं डेवलपर्स पर होगा।

सरकार का मानना है कि इससे रिफाइनरियों को आधुनिक तकनीक और निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ मिलेगा, जबकि निवेश का बोझ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर सीधे नहीं पड़ेगा।आयातित ईंधन पर निर्भरता होगी कमसरकार को उम्मीद है कि रिफाइनरियों में हरित हाइड्रोजन के घरेलू उत्पादन और उपयोग से आयातित जीवाश्म ईंधन पर देश की निर्भरता घटेगी, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

इसके साथ ही यह कदम भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते सफर और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में भी मददगार साबित होगा। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत उठाया गया यह कदम दिखाता है कि सरकार अब सिर्फ बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि तेल-गैस रिफाइनिंग जैसे भारी उद्योगों को भी हरित ऊर्जा की दिशा में ले जाने पर गंभीरता से काम कर रही है।

रिफाइनरियों के लिए यह क्यों जरूरी है?

कच्चे तेल से पेट्रोल और डीजल बनाने तथा उसमें से सल्फर हटाने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन की जरूरत होती है। अभी रिफाइनरियां इसके लिए प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करती हैं, जिससे बहुत प्रदूषण होता है (इसे ‘ग्रे हाइड्रोजन’ कहते हैं)। सरकार चाहती है कि वे प्रदूषण फैलाने वाली हाइड्रोजन की जगह पानी और सौर ऊर्जा से बनी ‘हरित हाइड्रोजन’  का इस्तेमाल शुरू करें।

 

Also Read: हरित वित्त और डिजिटल नवाचार से टिकाऊ आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ता देश

You Might Also Like

इनॉक्स ग्रीन को बड़ी कामयाबी, ₹550 करोड़ तक में विंड वर्ल्ड का 4.5 GW विंड O&M कारोबार खरीदेगी
Greta Thunberg: The Making of a Global Climate Movement
सभी विभाग अपनी छतों पर शीघ्र लगवाएं सोलर पैनल : मुख्य सचिव
एआई से भारी पर्यावरणीय नुकसान : जल, जमीन, जलवायु सभी को खतरा
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में वर्षा का पानी जमा करने की अनूठी पहल
TAGGED:30 KTPA Green Hydrogen CapacityGreen HydrogenGreen Hydrogen Mission IndiaIOCL Panipat Green HydrogenNational Green Hydrogen MissionRefineriesRefineryRefinery Green Hydrogen AllocationShripad Yesso Naik in Rajya SabhaSIGHT Mode 2B Schemeराष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशनरिफाइनरी हरित हाइड्रोजन आवंटनहरित हाइड्रोजन मिशन
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
(फोटो सौजन्य-एआई)
जलसस्टेनिबिलिटीस्टोरीहवा

एआई-आधारित पूर्वानुमान प्रणाली का बड़ा संकेत, फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो

Environment Pulse
Environment Pulse
August 6, 2026
पीले सागर का बढ़ता तापमान दक्षिण कोरिया में तूफानों को बना रहा ज्यादा शक्तिशाली
गंगा का कहर: जब जीवनदायिनी नदी बन जाती है तबाही की वजह
मिशन जीरो: देपालपुर ने 1,250 टन पुराने कचरे का निस्तारण कर रचा स्वच्छता का नया मॉडल
उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024 के तहत आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?