इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में सितंबर 2026 की शुरुआत में हुए तेज विस्फोट के कारण पश्चिमी हिस्सों में जनजीवन और परिवहन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। ज्वालामुखी से निकली राख के घने गुबार लगभग 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गए, जिसके चलते जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित आठ हवाई अड्डों पर परिचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा और 1,500 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुईं। एहतियात के तौर पर जकार्ता, बैंटन और पश्चिमी जावा में स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गईं। राख गिरने से तटीय क्षेत्रों में मछुआरों की आजीविका भी प्रभावित हुई है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में सितंबर 2026 की शुरुआत में हुए तेज विस्फोट ने देश के पश्चिमी हिस्सों में जनजीवन और परिवहन को प्रभावित किया है।
ज्वालामुखी से निकली राख के घने गुबार के कारण कई हवाई अड्डों पर उड़ानंर अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं, जबकि कई इलाकों में स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन कक्षाएं चलानी पड़ीं। तटीय क्षेत्रों में राख गिरने के कारण मछुआरों ने भी समुद्र में जाने से परहेज किया। संडा जलडमरूमध्य में जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच स्थित अनाक क्राकाटोआ में 4 सितंबर की देर रात से विस्फोट की गतिविधियां तेज हुईं।
ज्वालामुखीय राख के गुबार कुछ स्थानों पर करीब 15,000 मीटर (लगभग 50,000 फीट) की ऊंचाई तक पहुंचे और घनी आबादी वाले इलाकों तथा विमान मार्गों की ओर फैल गए। राख के गुबार से विमान परिचालन पर गंभीर असर पड़ा। अधिकारियों ने जकार्ता के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सुकर्णो-हट्टा समेत आठ हवाई अड्डों पर परिचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।
इससे 1,500 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुईं और बड़ी संख्या में यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने जकार्ता से आने-जाने वाली उड़ानें रद्द कर दीं। हालांकि, 7 और 8 सितंबर तक राख की सांद्रता कम होने के साथ कुछ हवाई सेवाएं धीरे-धीरे बहाल होने लगीं। इसके बावजूद कुछ प्रांतीय हवाई अड्डों पर प्रतिबंध जारी रहे।
ज्वालामुखीय राख के फैलने के बाद जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा और लैम्पुंग के कुछ हिस्सों में स्कूलों को एक या अधिक दिनों के लिए बंद किया गया या पढ़ाई ऑनलाइन कराई गई। अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने छात्रों के स्वास्थ्य को देखते हुए यह कदम उठाया। राख के संपर्क में आने से सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं की आशंका के बीच प्रभावित इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में लोगों ने आंखों में जलन की शिकायत भी की। ज्वालामुखीय राख का असर तटीय समुदायों पर भी पड़ा है। बैंटन और लैम्पुंग प्रांतों में कई मछली पकड़ने वाले समुदायों ने राख गिरने के दौरान अपनी नौकाओं को समुद्र में भेजने के बजाय किनारे पर ही रखा।
इससे स्थानीय मछुआरों की दैनिक आय और आजीविका प्रभावित हुई। ज्वालामुखी के आसपास के इलाकों में सुरक्षा स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। अनाक क्राकाटोआ 1883 के ऐतिहासिक क्राकाटोआ विस्फोट से जुड़े ज्वालामुखीय क्षेत्र में स्थित है और लंबे समय से वैज्ञानिकों तथा अधिकारियों की निगरानी में है।
हालिया विस्फोट ने एक बार फिर इंडोनेशिया की ज्वालामुखीय गतिविधियों और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को सामने ला दिया है।
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