कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों में फिलहाल कोयले की कोई गंभीर कमी नहीं है और 15 सितंबर 2026 तक यहाँ कोयला भंडार बढ़कर 8.41 लाख टन हो गया है। हालाँकि, मंत्रालय ने राज्य सरकार और यूपीआरवीयूएनएल को एक दशक पहले आवंटित झारखंड के सहरपुर-जमरपानी कैप्टिव कोयला ब्लॉक के विकास में तेजी लाने और संयंत्रों में मौजूद परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने का आग्रह किया है ताकि बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम हो सके।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: उत्तर प्रदेश में कोयले की उपलब्धता को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बीच कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य के ताप विद्युत संयंत्रों में फिलहाल कोयले की कोई गंभीर कमी नहीं है। मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (यूपीआरवीयूएनएल) से अपने कैप्टिव कोयला ब्लॉक के विकास की प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया है। वहीं, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने राज्य की कोयला जरूरतों को पूरा करने के लिए निरंतर आपूर्ति का भरोसा दिया है।
मंत्रालय के अनुसार, 15 सितंबर 2026 तक यूपीआरवीयूएनएल के किसी भी ताप विद्युत संयंत्र में कोयले का गंभीर संकट नहीं था। संयंत्रों में उपलब्ध कोयला भंडार 1 सितंबर के 7.25 लाख टन से बढ़कर 15 सितंबर को 8.41 लाख टन हो गया।
पिछले सात दिनों में यूपीआरवीयूएनएल के संयंत्रों को प्रतिदिन औसतन करीब 90,000 टन कोयला मिला, जबकि औसत दैनिक खपत लगभग 83,000 टन रही। इससे कोयला भंडार में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले 10 दिनों में सीआईएल ने यूपीआरवीयूएनएल के बिजली संयंत्रों को प्रतिदिन औसतन करीब 17.7 रेक कोयला उपलब्ध कराया।
कोयला मंत्रालय ने बताया कि झारखंड के दुमका जिले में स्थित सहरपुर-जमरपानी कोयला ब्लॉक में 973 मिलियन टन से अधिक का अनुमानित भंडार है। इस ब्लॉक का आवंटन 13 अगस्त 2015 को कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत यूपीआरवीयूएनएल को किया गया था। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों की कोयले की जरूरत को पूरा करना था।
आवंटन के एक दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद ब्लॉक को विकसित कर उत्पादन शुरू करने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। मंत्रालय के मुताबिक, इसके कारण उत्तर प्रदेश के बिजली संयंत्रों की कोयला जरूरत मुख्य रूप से सीआईएल की आपूर्ति से पूरी हो रही है।
मंत्रालय ने कहा कि सहरपुर-जमरपानी के आवंटन के आसपास या उसके बाद विद्युत क्षेत्र के आंतरिक उपयोग के लिए आवंटित 14 अन्य कोयला ब्लॉक अब चालू हो चुके हैं और संबंधित बिजली संयंत्रों के लिए उत्पादन शुरू कर चुके हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश को अपने आवंटित ब्लॉक के विकास की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।
कोयला आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए सीआईएल ने 3 सितंबर 2026 को यूपीआरवीयूएनएल समेत सभी जेनको और आईपीपी को सड़क/रेल-सह-सड़क (RCR) माध्यम से अतिरिक्त कोयला आपूर्ति की पेशकश की थी। इसका उद्देश्य ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार और बढ़ाना है।
हालांकि, मंत्रालय ने कुछ संयंत्रों में कोयला उतारने से जुड़ी परिचालन संबंधी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। माल उतारने में बाधाओं के कारण रेलवे को समय-समय पर रेक की तैनाती सीमित करनी पड़ती है, जिससे आपूर्ति बढ़ाने की क्षमता प्रभावित होती है।
मंत्रालय के अनुसार, यूपीआरवीयूएनएल के संयंत्रों में 8 लाख टन से अधिक कोयला भंडार होने के बावजूद चालू महीने का औसत प्लांट लोड फैक्टर करीब 48 प्रतिशत है। इसलिए कम बिजली उत्पादन को केवल कोयले की कमी से जोड़ना उचित नहीं है। मंत्रालय ने राज्य से संयंत्रों में मौजूद परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने और उपलब्ध कोयले का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने को कहा है।
कोयला मंत्रालय और सीआईएल ने उत्तर प्रदेश समेत देशभर में बिजली क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप कोयले की आपूर्ति जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के लिए सहरपुर-जमरपानी ब्लॉक का शीघ्र विकास दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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