By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: स्वच्छ ऊर्जा के रिकॉर्ड विस्तार से भारत के बिजली क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन स्थिर
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > फ्यूचर ग्रीन > ऊर्जा > स्वच्छ ऊर्जा के रिकॉर्ड विस्तार से भारत के बिजली क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन स्थिर
AI Image
ऊर्जा

स्वच्छ ऊर्जा के रिकॉर्ड विस्तार से भारत के बिजली क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन स्थिर

Environment Pulse
Last updated: November 4, 2026 8:21 pm
Environment Pulse
Published: November 4, 2026
Share
AI Image
SHARE

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 की पहली छमाही से 2026 की पहली छमाही के बीच भारत के बिजली क्षेत्र का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन स्थिर रहा है। 50 वर्षों में यह पहली बार है कि बिजली की मांग 7% बढ़ने के बावजूद कोयला आधारित बिजली उत्पादन में वृद्धि नहीं हुई, क्योंकि इस मांग को पूरी तरह से स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु) ने पूरा किया। इस दौरान 77 GW सौर और 11 GW पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई।हालांकि, इस्पात और सीमेंट उद्योगों में तेज वृद्धि के कारण देश का कुल कार्बन उत्सर्जन 2026 की पहली छमाही में 3.7% बढ़ा। इसके अलावा, बिजली कंपनियों द्वारा नई कोयला क्षमता जोड़े जाने से संयंत्रों की उपयोग दर घटी है। विश्लेषकों का कहना है कि भारी उद्योगों का बढ़ता उत्सर्जन अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : भारत के बिजली क्षेत्र से होने वाला कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 2024 की पहली छमाही से 2026 की पहली छमाही के बीच लगभग स्थिर रहा है। इसका प्रमुख कारण स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में हुआ रिकॉर्ड विस्तार है, जिसने बिजली की बढ़ती मांग को पूरा कर लिया। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) द्वारा कार्बन ब्रीफ के लिए किए गए विश्लेषण के अनुसार, 50 वर्षों से अधिक समय में यह पहली बार है जब दो साल की अवधि में बिजली की कुल मांग बढ़ने के बावजूद कोयला आधारित बिजली उत्पादन में वृद्धि नहीं हुई।

विश्लेषण बताता है कि इन दो वर्षों के दौरान बिजली की मांग में हुई सात प्रतिशत वृद्धि को पूरी तरह स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों ने पूरा किया। इस दौरान लगभग 63 से 70 टेरावाट-घंटे अतिरिक्त स्वच्छ बिजली का उत्पादन हुआ। यह मात्रा स्विट्जरलैंड की कुल बिजली खपत के बराबर है। इस वृद्धि में सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिससे लगभग 44 टेरावाट-घंटे बिजली मिली।

इसके बाद पवन ऊर्जा से 13 टेरावाट-घंटे, जलविद्युत से आठ टेरावाट-घंटे और परमाणु ऊर्जा से सात टेरावाट-घंटे का योगदान हुआ। इस अवधि में भारत ने 77 गीगावाट सौर ऊर्जा, 11 गीगावाट पवन ऊर्जा और पांच गीगावाट जलविद्युत क्षमता जोड़ी। बिजली क्षेत्र का उत्सर्जन 2025 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 2.2 प्रतिशत घटा, जबकि 2026 की पहली छमाही में इसमें 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इस तरह दो वर्षों के दौरान कुल उत्सर्जन में कोई शुद्ध वृद्धि नहीं हुई। इसी अवधि में तेल और गैस की खपत में लगातार दो वर्षों तक गिरावट आई। हालांकि, देश का कुल कार्बन उत्सर्जन 2026 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत बढ़ा। इसकी प्रमुख वजह इस्पात और सीमेंट उत्पादन में तेज वृद्धि रही। ये दोनों उद्योग अब भारत के कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 23 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।

कोयला आधारित बिजली उत्पादन में वृद्धि रुकने के बावजूद बिजली कंपनियों ने लगभग 8.5 गीगावाट नई कोयला आधारित उत्पादन क्षमता जोड़ी। इसके कारण संयंत्रों की उपयोग दर में कमी आई और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ी।

विश्लेषकों का कहना है कि स्वच्छ ऊर्जा के तेजी से विस्तार ने बिजली क्षेत्र के उत्सर्जन को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है। हालांकि, भारी उद्योगों से होने वाला उत्सर्जन अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से निर्माण और रियल एस्टेट गतिविधियों से जुड़ा है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े उत्सर्जक देश भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देश में नवीकरणीय ऊर्जा का तेजी से विस्तार यह साबित करता है कि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कार्बन उत्सर्जन बढ़ाना अनिवार्य नहीं है। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में निरंतर निवेश की जरूरत होगी।

इसके साथ ही उद्योगों को भी कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों की ओर ले जाना आवश्यक होगा।

Also Read: जलवायु संकट से दुनिया के अमीरों को दोहरा फायदा, ऑक्सफैम की रिपोर्ट में खुलासा

You Might Also Like

ब्रिटेन में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनिवार्य जलवायु रिपोर्टिंग की योजना रद्द
भारत के बढ़ते कोकिंग कोयला उत्पादन के बीच व्यापक मीथेन रणनीति की जरूरत
लिथियम-निकल के लिए भारत की बड़ी रणनीति, घरेलू प्रोसेसिंग को मिलेगा बढ़ावा
अमृतसर का किशोर पराली से बिजली बनाने की दिशा में कर रहा काम, AI तकनीक से प्रदूषण कम करने की पहल
24 घंटे स्वच्छ बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन से भारत के स्टील क्षेत्र को किया जा सकता है डीकार्बोनाइज
TAGGED:carbon emissionsClean Energy ExpansionClimate Goalscoal power generationCREA AnalysisIndia power sectorIndustrial EmissionsRenewable energySolar Powersteel and cement sectors
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: स्वच्छ तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिए कनाडा और यूरोपीय संघ मे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
ऊर्जाफ्यूचर ग्रीनसस्टेनिबिलिटी

भारत और नॉर्डिक देश ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में बदलेंगे संबंध: तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में PM मोदी का बड़ा ऐलान

Environment Pulse
Environment Pulse
August 11, 2026
संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों से पिछड़ा भूमि संरक्षण: मंगोलिया में चेतावनी
जलवायु परिवर्तन का फैशन उद्योग पर असर: गर्म होती गर्मियों ने बदला लग्जरी ब्रांड्स का ट्रेंड, सर्दियों के कलेक्शन में कटौती
अल नीनो की आशंका के बीच भारत ने 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य घटाकर 37.393 करोड़ टन किया
गर्मी की बढ़ती मार के बीच हिमाचल में पारंपरिक काठ-कुणी वास्तुकला की वापसी

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?