‘Scientific Data’ में प्रकाशित IMBIE अध्ययन के अनुसार, 1970 के दशक के अंत से अब तक ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की ध्रुवीय हिमचादरों ने संयुक्त रूप से 11.3 ट्रिलियन टन बर्फ खो दी है, जिससे वैश्विक समुद्र स्तर में 3.14 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। वैज्ञानिकों द्वारा 27 उपग्रह मिशनों के डेटा का उपयोग करके तैयार किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि 1980 से 2010 के दशक के बीच बर्फ के नुकसान की रफ्तार चार गुना बढ़ गई, जिसका 84 प्रतिशत हिस्सा समुद्र की ओर ग्लेशियरों के बहने और गर्म होते समुद्र के कारण हुआ। यद्यपि 2020-2023 के दौरान अधिक बर्फबारी के कारण इस गति में कुछ अस्थायी कमी आई, लेकिन यह दीर्घकालिक प्रवृत्ति को नहीं बदलती, जो भविष्य में तटीय बाढ़ और कटाव के जोखिम को काफी बढ़ा रही है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ तेजी से पिघलने और समुद्र में पहुंचने के कारण वैश्विक समुद्र स्तर लगातार बढ़ रहा है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, 1970 के दशक के अंत से अब तक दोनों ध्रुवीय हिमचादरों ने संयुक्त रूप से करीब 11.3 ट्रिलियन टन बर्फ खो दी है।
इससे वैश्विक समुद्र स्तर में लगभग 3.14 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। जर्नल Scientific Data में प्रकाशित इस अध्ययन को आइस शीट मास बैलेंस इंटर-कम्पैरिजन एक्सरसाइज (IMBIE) के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है।
वैज्ञानिकों ने 27 अलग-अलग उपग्रह मिशनों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए अब तक का सबसे लंबा उपग्रह रिकॉर्ड तैयार किया। अध्ययन में पाया गया कि 1990 के दशक के बाद बर्फ के नुकसान की गति में तेज वृद्धि हुई और 1980 के दशक से 2010 के दशक के बीच यह करीब चार गुना हो गई। अध्ययन की एक महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि कुल बर्फ नुकसान का करीब 84 प्रतिशत हिस्सा ग्लेशियरों के तेज गति से समुद्र की ओर बहने और अधिक बर्फ समुद्र में पहुंचाने के कारण हुआ।
इसके मुकाबले हिमचादरों की सतह पर बर्फ पिघलने से लगभग 16 प्रतिशत नुकसान हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह परिणाम दीर्घकालिक बदलाव में गर्म होते समुद्र की महत्वपूर्ण भूमिका की ओर संकेत करता है। ग्रीनलैंड से समुद्र स्तर में करीब 1.81 सेंटीमीटर और अंटार्कटिका से लगभग 1.33 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई।
ग्रीनलैंड में वार्षिक बर्फ नुकसान 1980 के दशक में करीब 60 अरब टन से बढ़कर 2010 के दशक में 264 अरब टन तक पहुंच गया। इसी अवधि में अंटार्कटिका का वार्षिक नुकसान लगभग 48 अरब टन से बढ़कर 202 अरब टन हो गया। अंटार्कटिका में बर्फ का कुल नुकसान मुख्य रूप से समुद्र के कारण होने वाले पिघलाव और समुद्र की ओर तेजी से बढ़ते आउटलेट ग्लेशियरों से जुड़ा पाया गया। पश्चिमी अंटार्कटिका इस बदलाव से विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्र रहा है।
IMBIE के संस्थापक और नॉर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एंड्रयू शेफर्ड के अनुसार, समुद्र स्तर में तीन सेंटीमीटर से कुछ अधिक की वृद्धि भी तटीय बाढ़ और कटाव के जोखिम में रहने वाली आबादी को कई मिलियन तक बढ़ा सकती है।
उनके अनुमान के अनुसार, वर्तमान में ध्रुवीय हिमचादरें वैश्विक समुद्र स्तर वृद्धि में लगभग एक-चौथाई योगदान दे रही हैं। अध्ययन की प्रमुख लेखिका इनेस ओतोसाका ने कहा कि आंकड़े पुष्टि करते हैं कि ध्रुवीय बर्फ का नुकसान 1990 के दशक में तेज होना शुरू हुआ और इसके बाद बढ़ता रहा। हालांकि 2020 से 2023 के बीच बर्फ के नुकसान की गति में कुछ अस्थायी कमी देखी गई।
इसके पीछे पूर्वी अंटार्कटिका में अधिक बर्फबारी और ग्रीनलैंड में अपेक्षाकृत हल्की गर्मियों जैसे कारक रहे। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अस्थायी बदलाव दीर्घकालिक प्रवृत्ति को नहीं बदलता। गर्म होते समुद्र के प्रति हिमचादरों की गतिशील प्रतिक्रिया के कारण आने वाले दशकों में बर्फ का नुकसान जारी रहने की आशंका है। अध्ययन समुद्र तटीय क्षेत्रों में दीर्घकालिक योजना, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु अनुकूलन उपायों की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
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