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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > भारत ने जैव विविधता संरक्षण, जैव सुरक्षा और लाभ-साझाकरण पर चार प्रमुख प्रकाशन जारी किए
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जैव-विविधता

भारत ने जैव विविधता संरक्षण, जैव सुरक्षा और लाभ-साझाकरण पर चार प्रमुख प्रकाशन जारी किए

Environment Pulse
Last updated: October 29, 2026 7:52 pm
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Published: October 29, 2026
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आर्मेनिया के येरेवन में आयोजित सीबीडी कॉप-17 (CBD COP-17) के दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने वैश्विक जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को प्रभावी क्रियान्वयन, सतत वित्तपोषण और ठोस परिणामों में बदलने का आह्वान किया। इस अवसर पर भारत ने जैव विविधता संरक्षण, जैव सुरक्षा और लाभ-साझाकरण को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख प्रकाशन जारी किए, जिनमें ओईसीएम (OECM) दिशानिर्देश 2026, कार्टाजेना प्रोटोकॉल पर पाँचवीं रिपोर्ट, संदर्भ मार्गदर्शिका और एबीएस (ABS) सफलता गाथा शामिल हैं। पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और यूएनडीपी (UNDP) के सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में भारत ने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संस्थागत क्षमता, पारंपरिक ज्ञान के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष जोर दिया। 

एनवायरमेंट पल्स डेस्क : आर्मेनिया में CBD COP-17 के दौरान भूपेंद्र यादव ने वैश्विक प्रतिबद्धताओं को प्रभावी क्रियान्वयन में बदलने पर दिया जोर नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) के 17वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP-17) के दौरान वैश्विक जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को प्रभावी क्रियान्वयन, सतत वित्तपोषण और दीर्घकालिक संरक्षण परिणामों में बदलने का आह्वान किया।

इस अवसर पर भारत ने जैव विविधता संरक्षण, जैव सुरक्षा और आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत बंटवारे से संबंधित चार प्रमुख प्रकाशन जारी किए। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया।

इसमें CBD COP-17 के अध्यक्ष और आर्मेनिया के पर्यावरण मंत्री हम्बरजुम मातेवोस्यान तथा CBD सचिवालय की एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) इकाई के प्रमुख डॉ. तौकोंडजो शिकोंगो भी शामिल हुए। ‘नीति से व्यवहार तक: नवाचार, वित्त, लाभ-साझाकरण और OECM के माध्यम से भारत की जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाना’ विषयक कार्यक्रम में भूपेंद्र यादव ने कहा कि कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल प्रतिबद्धताएं पर्याप्त नहीं हैं।

इनके लिए संस्थागत क्षमता, आवश्यक संसाधन और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत में जैव विविधता लोगों के जीवन, पारंपरिक ज्ञान और आजीविका से गहराई से जुड़ी है। पर्यावरण संरक्षण और विकास को एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण के लिए जीवनशैली (LiFE) पहल का उल्लेख करते हुए टिकाऊ विकल्पों और जिम्मेदार उपभोग को प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर चार प्रकाशन जारी किए गए। इनमें भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (I-OECMs) के निर्धारण संबंधी दिशानिर्देश 2026, कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पांचवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट, जैव विविधता पर कन्वेंशन: संदर्भ मार्गदर्शिका एवं भारतीय परिप्रेक्ष्य तथा भारत की एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) सफलता गाथा शामिल हैं।

ये प्रकाशन संरक्षित क्षेत्रों से परे प्रभावी संरक्षण उपायों की पहचान, जैव सुरक्षा में पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं की समझ और आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत वितरण को मजबूत करने में मदद करेंगे। मंत्री ने कहा कि नागोया प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे का आधार प्रदान करता है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारदर्शी प्रक्रियाओं, सक्षम संस्थानों, डिजिटल नवाचार और स्थानीय समुदायों की भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, उपयुक्त वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया। भूपेंद्र यादव ने कहा कि कोई भी देश अकेले वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकता। भारत कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के क्रियान्वयन के लिए सभी देशों और साझेदारों के साथ सहयोग जारी रखने को प्रतिबद्ध है।

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