क्लाइमेट थिंक टैंक ईसीसीओ (ECCO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इटली अपने वर्ष 2030 के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों से काफी पीछे चल रहा है और अब तक निर्धारित लक्ष्यों का केवल 15 प्रतिशत ही हासिल कर पाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में इटली ने लगभग 7 गीगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जबकि 2030 के लक्ष्य के लिए हर साल 10 गीगावाट क्षमता जोड़ने की आवश्यकता है। अनुमति मिलने की धीमी प्रक्रिया और ग्रिड कनेक्शन में देरी इसके मुख्य अवरोध हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और उत्सर्जन में कटौती की रफ्तार धीमी; पांच साल में कार्बन उत्सर्जन में करीब 25 प्रतिशत कमी लाने की चुनौती अक्टूबर 2026। जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के प्रयासों के बीच इटली अपने वर्ष 2030 के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों से काफी पीछे चल रहा है।
जलवायु संबंधी थिंक टैंक ईसीसीओ (ECCO) की ताजा वार्षिक निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, देश अब तक निर्धारित लक्ष्यों का केवल 15 प्रतिशत ही हासिल कर पाया है। रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और ऊर्जा खपत के विद्युतीकरण जैसे क्षेत्रों में प्रगति को सकारात्मक, लेकिन अपर्याप्त बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इटली ने वर्ष 2025 में लगभग सात गीगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की।
हालांकि, 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देश को हर साल करीब 10 गीगावाट नई क्षमता जोड़ने की जरूरत है। अनुमति मिलने की धीमी प्रक्रिया और बिजली ग्रिड से कनेक्शन के लिए लंबित आवेदनों के कारण परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो रही है। इनमें सट्टेबाजी की मंशा से किए गए आवेदन भी बाधा पैदा कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इटली में 2025 के दौरान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 90 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य बढ़ गया। यूरोपीय संघ के निर्धारित दायित्वों को पूरा करने के लिए देश को 2025 के स्तर से अगले पांच वर्षों में करीब 9.5 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन घटाना होगा।
यह देश के कुल उत्सर्जन का लगभग 25 प्रतिशत है। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए परिवहन, भवन, उद्योग और ऊर्जा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में उत्सर्जन घटाने के उपायों को तेज करना होगा। रिपोर्ट में प्राकृतिक गैस पर निर्भरता समाप्त करने और ऊर्जा खपत को बिजली आधारित बनाने की दिशा में भी धीमी प्रगति पर चिंता जताई गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के मामले में भी इटली पीछे है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष देश की सड़कों पर लगभग 4.45 लाख इलेक्ट्रिक कारें थीं, जबकि 2030 तक इनकी संख्या 43 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
स्थिर सरकारी प्रोत्साहनों की कमी के कारण इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इटली में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री यूरोपीय औसत से काफी नीचे है। परिवहन क्षेत्र देश में उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, इसलिए इस क्षेत्र में बदलाव ऊर्जा संक्रमण की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
ईसीसीओ के आकलन में ऊर्जा परिवर्तन की समग्र प्रगति का संकेतक पिछले मूल्यांकन की तुलना में पांच प्रतिशत अंक गिरकर 15 प्रतिशत रह गया। प्राकृतिक गैस को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने से संबंधित घटक का प्रदर्शन केवल पांच प्रतिशत रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इटली को यूरोपीय संघ के एफर्ट शेयरिंग रेगुलेशन के तहत निर्धारित उत्सर्जन सीमाओं को पार करने का जोखिम है।
ये नियम परिवहन, भवन, कृषि, कचरा प्रबंधन और छोटे उद्योगों जैसे उन क्षेत्रों पर लागू होते हैं, जो यूरोपीय संघ की उत्सर्जन व्यापार प्रणाली के दायरे में नहीं आते। यदि इटली निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन करता है, तो उसे अतिरिक्त उत्सर्जन की भरपाई के लिए दूसरे देशों से उत्सर्जन भत्ते खरीदने पड़ सकते हैं। इसके लिए कई अरब यूरो खर्च करने की नौबत आ सकती है।
इस प्रकार ऊर्जा परिवर्तन में देरी से पर्यावरणीय नुकसान के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है। ईसीसीओ की रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब इटली की राष्ट्रीय ऊर्जा एवं जलवायु योजना की समीक्षा हो रही है। इस योजना को यूरोपीय संघ के ‘फिट फॉर 55’ पैकेज के तहत निर्धारित महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता जताई जा रही है। रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया तेज करने, बिजली ग्रिड में निवेश बढ़ाने, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लगातार प्रोत्साहन उपलब्ध कराने और उत्सर्जन में अधिक प्रभावी कटौती करने पर जोर दिया गया है।
यदि इन क्षेत्रों में तेजी से सुधार नहीं हुआ, तो इटली के वर्ष 2030 के महत्वपूर्ण ऊर्जा एवं जलवायु लक्ष्यों से चूकने की आशंका है। इसका असर न केवल देश की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं पर पड़ेगा, बल्कि उत्सर्जन भत्तों की संभावित खरीद और ऊर्जा क्षेत्र में आवश्यक बदलावों के कारण वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है।
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