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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जंगल > भारत लाए जाएंगे बोत्सवाना से आठ चीते, प्रोजेक्ट चीता को मिलेगा आनुवंशिक विविधता का सहारा
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जंगल

भारत लाए जाएंगे बोत्सवाना से आठ चीते, प्रोजेक्ट चीता को मिलेगा आनुवंशिक विविधता का सहारा

Environment Pulse
Last updated: September 22, 2026 9:28 pm
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Published: September 22, 2026
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भारत सरकार ने प्रोजेक्ट चीता के तहत बोत्सवाना से आठ अफ्रीकी चीतों को भारत लाने पर सहमति जताई है। यह निर्णय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बोत्सवाना यात्रा के दौरान लिया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में चीतों की आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) को बढ़ाना और उनकी आबादी को मजबूत करना है। ये चीते मुख्य रूप से कालाहारी के घांजी क्षेत्र से लाए जाएंगे, जिन्हें वर्तमान में गैबोरोन के पास मोकलोडी नेचर Reserve में क्वारंटीन किया गया है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क: भारत और बोत्सवाना ने प्रोजेक्ट चीता के तहत आठ अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की योजना पर सहमति जताई है। इस पहल का उद्देश्य भारत में पुनर्स्थापित किए गए चीतों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाना और उनकी आबादी को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाना है।

यह निर्णय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बोत्सवाना यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच हुआ। प्रस्तावित चीतों को मुख्य रूप से कालाहारी के घांजी क्षेत्र से लाया जाएगा। बोत्सवाना ने इन चीतों को प्रतीकात्मक रूप से भारत को सौंपा है।

यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन प्रक्रिया के लिए उन्हें गैबोरोन के पास मोकलोडी नेचर रिजर्व में क्वारंटीन किया गया है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, बोत्सवाना से आने वाले आनुवंशिक रूप से अलग चीतों से भारत में मौजूद सीमित संस्थापक आबादी पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

इससे पहले नामीबिया से 2022 और दक्षिण अफ्रीका से 2023 में चीते भारत लाए गए थे। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के समन्वय में चल रहे प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत पहुंचने के बाद इन चीतों को फिर क्वारंटीन और सॉफ्ट-रिलीज प्रक्रिया से गुजरना होगा।

मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में इन्हें बसाने की योजना है, जबकि गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य जैसे अन्य संभावित स्थलों पर भी परियोजना का विस्तार किया जा रहा है। भारत में जन्मे शावकों के सफल प्रजनन को परियोजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया है। नए चीतों को शामिल करने का उद्देश्य एक ऐसी टिकाऊ मेटापॉपुलेशन तैयार करना है, जो बीमारियों और पर्यावरणीय बदलावों के प्रति अधिक लचीली हो। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बोत्सवाना के अधिकारियों ने इस सहयोग को वन्यजीव संरक्षण में दक्षिण-दक्षिण सहयोग का उदाहरण बताया है। चीतों के स्थानांतरण से पहले स्वास्थ्य, आनुवंशिकी और लॉजिस्टिक्स से जुड़े वैज्ञानिक आकलन किए जा रहे हैं।

इसमें CITES नियमों का अनुपालन और विशेष हवाई परिवहन व्यवस्था भी शामिल है। भारत में 1952 में चीते को विलुप्त घोषित किए जाने के बाद प्रोजेक्ट चीता के जरिए देश में मुक्त विचरण करने वाली चीता आबादी स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। बोत्सवाना से प्रस्तावित आठ चीतों के आगमन की समयसीमा क्वारंटीन और अन्य तैयारियों की प्रगति के आधार पर तय की जाएगी।

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