उत्तर प्रदेश में मानसून के अंतिम चरण में सक्रिय हुए नए मौसम तंत्र के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में भारी से अत्यधिक बारिश हो रही है। राजधानी लखनऊ में महज 21 घंटों में 125 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे हजरतगंज, गोमती नगर और चारबाग जैसे प्रमुख इलाकों में भारी जलभराव हो गया। बांदा में 146 से 227 मिमी और बहराइच समेत कई अन्य जिलों (बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बाराबंकी, कानपुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी) में भी मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: उत्तर प्रदेश में मानसून के अंतिम चरण में बारिश ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बंगाल की खाड़ी से बने निम्न दबाव क्षेत्र और उसके प्रभाव से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य क्षेत्र और तराई के जिलों में बारिश के साथ जलभराव और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने 27 सितंबर तक कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
राजधानी लखनऊ में शुक्रवार से शनिवार के बीच हुई लगातार बारिश ने इस साल के मानसून की अब तक की तस्वीर बदल दी। करीब 21 घंटे में 125 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज होने से शहर के कई प्रमुख इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं।
हजरतगंज, गोमती नगर, अलीगंज और चारबाग सहित कई क्षेत्रों में यातायात प्रभावित रहा। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई।
कई जगह वाहन फंस गए और सामान्य जनजीवन की रफ्तार धीमी पड़ गई। बांदा में भी बारिश की तीव्रता काफी अधिक रही। विभिन्न स्थानीय केंद्रों से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में अलग-अलग अवधि में 146 से 227 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई।
बहराइच में 100 मिलीमीटर से अधिक वर्षा हुई, जबकि बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती और सिद्धार्थनगर में भी भारी बारिश दर्ज की गई। बाराबंकी, कानपुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी समेत कई अन्य जिलों में भी बारिश का व्यापक असर देखने को मिला। भारी बारिश और जलभराव के मद्देनजर कई जिलों में स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए गए।
स्थानीय प्रशासन ने मौसम और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाए हैं। लगातार बारिश से प्रदेश के सड़क नेटवर्क को भी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर सड़कें धंस गईं, गड्ढे बढ़ गए और तेज पानी के बहाव से सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रारंभिक आकलन में हजारों किलोमीटर सड़कों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। कुछ इलाकों में पेड़ गिरने और कच्चे मकानों तथा दीवारों के ढहने की घटनाएं भी हुई हैं।
ललितपुर में तेज बहाव के कारण एक टैंकर पुल के पास पानी की चपेट में आ गया। चालक और सहायक ने वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई। सीतापुर और हरदोई में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में जनहानि की भी सूचना है। ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवा और पानी से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। घाघरा, सरयू, राप्ती, शारदा, गंगा और गोमती समेत कई नदियों के जलस्तर पर प्रशासन नजर बनाए हुए है।
निचले और नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में मौके पर मौजूद रहने, जर्जर मकानों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और बारिश से हुए नुकसान का तत्काल आकलन करने के निर्देश दिए हैं। राहत शिविरों, नावों और चिकित्सा सुविधाओं को भी आवश्यकता के अनुसार सक्रिय रखने को कहा गया है। मौसम विभाग के अनुसार 26 और 27 सितंबर को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है।
प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले रास्तों, नदी और नालों के आसपास जाने से बचने तथा बिजली चमकने और तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की अपील की है।
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