By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत में ब्लैक कार्बन और मीथेन उत्सर्जन घटाने पर जोर
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत में ब्लैक कार्बन और मीथेन उत्सर्जन घटाने पर जोर
AI Image
जलहवा

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत में ब्लैक कार्बन और मीथेन उत्सर्जन घटाने पर जोर

Environment Pulse
Last updated: October 11, 2026 7:39 pm
Environment Pulse
Published: October 11, 2026
Share
AI Image
SHARE

भारत में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ब्लैक कार्बन और मीथेन जैसे अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों (SLCPs) के उत्सर्जन में कटौती पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रदूषकों पर नियंत्रण से तापमान वृद्धि की रफ्तार धीमी करने, वायु गुणवत्ता सुधारने, हिमालयी ग्लेशियरों को बचाने और कृषि उत्पादकता तथा खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क :  भारत में पर्यावरण विशेषज्ञों और नीति संस्थानों ने अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों (SLCPs) के उत्सर्जन में कटौती पर ध्यान केंद्रित किया है। ब्लैक कार्बन और मीथेन जैसे प्रदूषकों को नियंत्रित करना निकट भविष्य में तापमान वृद्धि की रफ्तार कम करने, वायु गुणवत्ता सुधारने और कृषि उत्पादकता को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कम समय तक बने रहते हैं, लेकिन इस दौरान उनकी गर्मी रोकने की क्षमता काफी अधिक हो सकती है। ब्लैक कार्बन, जिसे आमतौर पर कालिख कहा जाता है, अधूरे दहन से पैदा होता है। वहीं मीथेन कृषि, पशुपालन, कचरा प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्र से उत्सर्जित होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रदूषकों में लक्षित कटौती से निकट भविष्य में जलवायु परिवर्तन की गति धीमी करने के साथ स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को भी लाभ मिल सकता है। कुछ आकलनों में इनके उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण से वर्ष 2050 तक संभावित तापमान वृद्धि में 0.6 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आने की संभावना जताई गई है। भारत में ब्लैक कार्बन के प्रमुख स्रोतों में ठोस ईंधन से खाना पकाना, डीजल वाहन, ईंट भट्ठे और कृषि अवशेषों को जलाना शामिल हैं।

दूसरी ओर, देश में मीथेन उत्सर्जन का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र से आता है। पशुओं के पाचन के दौरान होने वाला उत्सर्जन और धान के खेत इसके प्रमुख स्रोत हैं। कचरा तथा ऊर्जा क्षेत्र भी इसमें योगदान करते हैं। वैश्विक उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी लगभग नौ प्रतिशत आंकी जाती है, जिससे वह मीथेन उत्सर्जित करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है।

ब्लैक कार्बन के कण जब हिमालयी ग्लेशियरों और बर्फ पर जमते हैं, तो सतह की सूर्य की रोशनी परावर्तित करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे बर्फ तेजी से पिघल सकती है और उन नदी घाटियों की जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, जिन पर करोड़ों लोग निर्भर हैं। इसी तरह, वातावरण में अन्य प्रदूषकों की रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनने वाली निचले वायुमंडल की ओजोन फसलों को नुकसान पहुंचाती है।

इससे गेहूं, चावल और अन्य कृषि उत्पादों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। प्रदूषण कम करने से फसल क्षति घटाने और खाद्य उत्पादन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है। जलवायु एवं स्वच्छ वायु गठबंधन (CCAC) सहित विभिन्न संस्थानों और भारतीय नीति विशेषज्ञों के विश्लेषण में भी अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों को कम करने से होने वाले लाभों को रेखांकित किया गया है। पंजाब में कृषि से जुड़े उत्सर्जन घटाने के लिए स्वच्छ कोल्ड-चेन तकनीकों पर काम किया जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने गैर-कार्बन डाइऑक्साइड प्रदूषकों के उत्सर्जन का आकलन करने और उन्हें कम करने के लिए योजनाएं या रोडमैप विकसित किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन को बढ़ावा देने वाली योजनाएं, बायोगैस और पशु अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े प्रयास भी इन प्रदूषकों को कम करने में योगदान दे सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों को केवल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाने के सहायक मुद्दे के रूप में देखने के बजाय जलवायु, कृषि, ऊर्जा, परिवहन और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में सीधे शामिल किया जाना चाहिए।

ब्लैक कार्बन और मीथेन पर नियंत्रण से अपेक्षाकृत कम समय में जलवायु संबंधी लाभ मिलने की संभावना है। इससे हिमालयी जल संसाधनों की सुरक्षा, वायु प्रदूषण में कमी और कृषि व्यवस्था की जलवायु सहनशीलता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

बढ़ती गर्मी और अनियमित मौसम के बीच भारत के लिए इन प्रदूषकों पर प्रभावी नियंत्रण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आजीविका और देश की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

Also Read: सूखे से जूझते देशों में क्लाउड सीडिंग ड्रोन की बढ़ी मांग, कृत्रिम बारिश से जल संकट दूर करने की कोशिश

You Might Also Like

हरित वित्त और डिजिटल नवाचार से टिकाऊ आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ता देश
हरिकेन साइमन श्रेणी-4 के शक्तिशाली तूफान में बदला, मेक्सिको के प्रशांत तट पर तबाही का खतरा
उत्तराखंड में वासुंधरा ताल पर पहली ग्लेशियल झील चेतावनी प्रणाली स्थापित
भारत पर बढ़ा बहुत मजबूत अल नीनो का खतरा, गर्मी, सूखे और कृषि संकट की आशंका
भारत में स्कूली पर्यावरण शिक्षा को कैसे बदला जा सकता है?
TAGGED:Air QualityBlack CarbonClimate Change IndiaFood securityHimalayan GlaciersMethane EmissionsShort-Lived Climate Pollutants (SLCPs)
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
1 Comment
  • Pingback: भारत ने समय से पहले हासिल किए जलवायु लक्ष्य, उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी और गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
AI Image
फ्यूचर ग्रीन

How Engines of Green Growth Are Driving India’s Economy

Environment Pulse
Environment Pulse
October 2, 2026
सभी विभाग अपनी छतों पर शीघ्र लगवाएं सोलर पैनल : मुख्य सचिव
भूजल का दुरुपयोग पड़ा महंगा, तीन स्टेडियमों पर लगी रोक
Ghostly WW1 submarine leaking TNT into the North Sea – a century on
Why India’s Housing Boom Might Just Save the Planet (Or Break It)

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?