भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए पेरिस समझौते के शुरुआती लक्ष्यों को निर्धारित समयसीमा से पहले ही हासिल कर लिया है। संयुक्त राष्ट्र को सौंपी गई भारत की चौथी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (BUR-4) के अनुसार, वर्ष 2005 से 2020 के बीच देश की GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी दर्ज की गई है, जो 2030 तक 33-35% कमी के शुरुआती NDC लक्ष्य से अधिक है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में, गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता जुलाई 2026 तक 300 गीगावाट से अधिक होकर कुल क्षमता (~552 गीगावाट) का 54% से अधिक हो गई है, जिसमें सौर ऊर्जा (164 गीगावाट) और पवन ऊर्जा (58 गीगावाट) का प्रमुख योगदान रहा है। यद्यपि भारत आर्थिक विकास के साथ GDP की प्रति इकाई उत्सर्जन घटाने में सफल रहा है, लेकिन बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के कारण कुल उत्सर्जन में वृद्धि एक चुनौती बनी हुई है। आगामी वर्षों के लिए भारत ने 2035 तक उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी, गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 60% तक पहुँचाने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2005 से 2020 के बीच देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, बिजली उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
भारत ने ये उपलब्धियां अपने शुरुआती पेरिस समझौता लक्ष्यों की निर्धारित समयसीमा से पहले हासिल की हैं। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) को सौंपे गए भारत के चौथे द्विवार्षिक अद्यतन प्रतिवेदन (BUR-4) के अनुसार, वर्ष 2020 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता 2005 के स्तर की तुलना में 36 प्रतिशत घट गई।
उत्सर्जन तीव्रता का अर्थ आर्थिक उत्पादन की प्रति इकाई पर होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से है। यह उपलब्धि वर्ष 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 33 से 35 प्रतिशत की कमी लाने के भारत के शुरुआती राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से अधिक है। भारत ने बाद में 2030 के लिए इस लक्ष्य को बढ़ाकर 45 प्रतिशत किया था।
प्रस्तुत विवरण के अनुसार, 2035 तक इसे 47 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 की तुलना में 2020 में भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 7.93 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। भूमि उपयोग, भूमि उपयोग में बदलाव और वानिकी (LULUCF) को छोड़कर देश का कुल उत्सर्जन 2,959 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य रहा।
यह आंकड़ा उत्सर्जन में वार्षिक बदलाव को दर्शाता है, जबकि GDP की उत्सर्जन तीव्रता में कमी आर्थिक उत्पादन के मुकाबले उत्सर्जन के स्तर में आए बदलाव को बताती है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया है। जून 2025 में देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत के पार पहुंच गई, जो वर्ष 2030 के शुरुआती NDC लक्ष्य से पांच साल पहले की उपलब्धि है। जुलाई 2026 तक सौर, पवन, जलविद्युत, जैव ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा सहित गैर-जीवाश्म स्रोतों की स्थापित क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो गई।
यह लगभग 552 गीगावाट की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है। सौर ऊर्जा इस विस्तार का प्रमुख आधार रही है। वर्ष 2014 में भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2.8 गीगावाट थी, जो बढ़कर 164 गीगावाट से अधिक हो गई। इसी अवधि में पवन ऊर्जा क्षमता 21 गीगावाट से बढ़कर 58 गीगावाट से अधिक पहुंच गई। अधिकारियों के अनुसार, इन उपलब्धियों के पीछे नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार, अर्थव्यवस्था में अपेक्षाकृत कम कार्बन उत्सर्जन वाले सेवा क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका और निरंतर नीतिगत समर्थन प्रमुख कारक हैं।
आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत आर्थिक विकास के साथ GDP की प्रति इकाई पर होने वाले उत्सर्जन को कम करने में सफल रहा है। हालांकि, विकास और ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों के कारण कुल उत्सर्जन में वृद्धि की चुनौती बनी हुई है।
इसलिए उत्सर्जन तीव्रता में कमी और कुल उत्सर्जन में कमी को अलग-अलग संकेतकों के रूप में समझना आवश्यक है। भारत के अद्यतन जलवायु लक्ष्यों में वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47 प्रतिशत की कमी और कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य शामिल है।
इसके साथ ही भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा है। हालिया प्रगति इन लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार, तकनीकी नवाचार, निवेश और उत्सर्जन में निरंतर कमी लाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना होगा।
Also Read: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत में ब्लैक कार्बन और मीथेन उत्सर्जन घटाने पर जोर

